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वेनेजुएला का भूकंप और आपदा की राजनीति: सत्ताईसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

वेनेजुएला आपदा से उबरने में जुटा है, लेकिन यूएस और उसके साथी उसके तमाम प्रयासों पर सवाल खड़े करते हुए बोलिवेरियन प्रक्रिया को बदनाम कर रहे हैं।

बैरोको नेग्रो (ब्लैक बैरोक), हेसूस रफाएल सोतो (वेनेजुएला ), 1961.

प्यारे दोस्तो,

ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।

24 जून 2026 को वेनेजुएला को दो बड़े भूकंपों ने दहला दिया। अभी कुछ महीने पहले ही एक दूसरी तरह की आपदा इस देश ने देखी जब संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) ने राजधानी पर बमबारी की और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा राष्ट्रीय असेंबली सदस्य सिलिया फ़्लोरेस का अपहरण कर लिया था। यह साल वेनेजुएला  के लिए अच्छा नहीं रहा है। वैसे तो इसकी जनता बोलिवेरीयन क्रांति की शुरुआत से ही यूएस के हमले झेल रही है। इस हफ़्ते के न्यूज़लेटर में हमारा नवीनतम रेड अलर्ट शामिल है, जिसका शीर्षक है ‘मलबे के बीच दबा सच’। इसे इंटरनेशनल पीपल्ज़ असेंबली, अल्बा मूविमिएंतोस,  सोसिदाद पात्रियोतिका, ला उनियोन कोमुनेरा, फुएर्सा पात्रियोतिका अलेक्सिस विवे और फ्रेंते फ्रांसिस्को दे मिरांडा ने मिलकर जारी किया है। नीचे यह अलर्ट अपनी पूर्णता में प्रस्तुत किया जा रहा है और इसका प्रिंट करने योग्य वर्ज़न यहाँ उपलब्ध है।

रेड अलर्ट संख्या 22: मलबे के बीच दबा सच

प्राकृतिक आपदाएँ टेक्टोनिक प्लेटों में हो रही हलचल से भी ज़्यादा कुछ उजागर करती हैं: समाजों की ताक़त, समुदायों की ख़ुद को बचाए रखने की क्षमता और वे राजनीतिक दरारें जिनसे सुनिश्चित होता है कि किसकी पीड़ा दिखाई जाए और किसकी पीड़ा का फ़ायदा उठाया जाए। 24 तारीख़ को आए भूकंपों के कुछ ही घंटों में, सोशल मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय प्रेस के कुछ हलके जाने-पहचाने आख्यान फैलाने लगे। इससे पहले कि राहत कार्य ठीक से शुरू भी होते इस आपदा को ह्यूगो चावेज़ के 1998 के चुनाव द्वारा शुरू की गई बोलिवेरियन प्रक्रिया को कमज़ोर करने के लिए यूएस के नेतृत्व में चल रहे लंबे अभियान के ही एक और युद्धक्षेत्र में बदल दिया गया।

इस सबसे वेनेजुएला  की जनता पर आई इस विपदा को भुलाया नहीं जा सकता। वहाँ पूरे-पूरे मोहल्ले बर्बाद हो चुके हैं। सैकड़ों इमारतें गिर चुकी हैं। अस्पताल, सड़कें, पुल और दूसरे आधारभूत ढाँचे तबाह हो चुके हैं। लोग अब भी अपने परिजनों को ढूँढ रहे हैं, जबकि बचावकर्मी बारिश, भूकंप के बाद के झटकों और बर्बाद हुए रास्तों आदि का सामना कर रहे हैं। लेकिन एकजुटता सिर्फ़ सहानुभूति के ज़रिए नहीं दिखाई जा सकती। इसके लिए सच की भी ज़रूरत पड़ती है। इसलिए यह रेड अलर्ट संख्या 22 ‘मलबे के बीच दबा सच’, इस आपदा से जुड़े प्रचलित झूठे दावों की मौजूद सबूतों के सहारे पड़ताल कर रहा है।

एक क्यूबाई परिदृश्य का रूपक, मारीयो करेनो (क्यूबा), 1943.

पहला दावा: वेनेजुएला  की सरकार भूकंप के बाद ठोस कार्रवाई करने में विफल रही।

कोई भी गंभीर टिप्पणी करने से पहले इस तबाही के स्तर को समझना बेहद ज़रूरी है। जैसे-जैसे बचावकर्मी और स्वयंसेवक मलबा हटा रहे हैं वैसे-वैसे हर दिन मरने वालों की संख्या बढ़ रही है, और हज़ारों लोग अब भी लापता हैं। लगभग दो सौ इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं, सैकड़ों आंशिक रूप से बर्बाद हो चुकी हैं। सामान्य हालात में जिन अस्पतालों में घायलों को पहुँचाया जाता वे ख़ुद काफ़ी तबाह हो चुके हैं। ला गुऐरा शहर में एक प्रमुख पुल और कई सड़कों को नुक़सान पहुँचा है, जिससे प्रभावित इलाक़ों में बचाव उपकरण और दस्ते ले जाना बहुत मुश्किल हो गया है। लगातार बारिश और भूकंप के बाद आए लगभग 800 झटकों की वजह से बचाव कार्य और भी जटिल हो गया है, साथ ही कराकस हवाई अड्डे के कुछ हिस्सों के ढह जाने की वजह से अंतर्राष्ट्रीय राहत दस्तों को भी दूर के हवाई अड्डों पर उतरकर सड़कों से प्रभावित इलाक़ों तक पहुँचना पड़ रहा है। इतने बड़े स्तर की तबाही से निपटने की असीम क्षमता किसी भी देश के पास नहीं है।

इसके अलावा, वेनेजुएला ने इस आपदा के साथ-साथ एक ऐसा अतिरिक्त बोझ उठाया है जो कुछ ही देशों ने इस स्तर पर कभी अनुभव किया है: मुख्यतः यूएस और उसके सहयोगियों द्वारा लगाए गए एकतरफा दबाव बनाने के उपायों के माध्यम से वेनेजुएला के ख़िलाफ़ वर्षों से एक आर्थिक युद्ध चल रहा है। इन उपायों ने वेनेजुएला  की 30 अरब डॉलर से अधिक की सार्वजनिक संपत्तियों को फ़्रीज़ कर दिया है, जिनका उपयोग अन्यथा आपदा प्रबंधन को मज़बूत करने, बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने और आपातकालीन भंडार के लिए किया जा सकता था। इन्होंने देश की विशेष बचाव उपकरण, भारी मशीनरी, दवाइयाँ, पुर्ज़े और निर्माण सामग्री ख़रीदने की क्षमता को गंभीर रूप से सीमित कर दिया है और बड़े पैमाने पर पलायन को बढ़ावा दिया है।

2017 में यूएस द्वारा चलाए जा रहे प्रतिबंधों की कड़ाई ने पलायन को बढ़ावा दिया और प्रमुख सार्वजनिक सेवाओं में कर्मियों की कमी आई है। संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक एलेना दौहान ने बताया कि 2021 तक सार्वजनिक सेवाओं ने अपने 30% से 50% कर्मियों को खो दिया था, जिनमें कई डॉक्टर, नर्स, इंजीनियर, शिक्षक, न्यायाधीश और अन्य कुशल पेशेवर शामिल थे, और कई सार्वजनिक अस्पतालों ने बताया कि 50% से 70% विशेषज्ञ पद खाली थे। कर्मियों के इस नुकसान ने देश की आपातकालीन क्षमता को कमज़ोर कर दिया: कम प्रशिक्षित कर्मचारी, बचे हुए लोगों पर भारी कार्यभार, और सार्वजनिक सेवाओं की आपदा की स्थिति में राहत पहुँचाने की क्षमता कम हो गई।

प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को उन राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों से अलग नहीं किया जा सकता जिनके दौरान वे घटित होती हैं। फिर भी वेनेजुएला कोई असहाय पीड़ित देश नहीं है। मानव जीवन पर इस विनाशकारी प्रभाव के बावजूद, देश ने धीरे-धीरे हालात से उबरना शुरू किया है। 2013 और 2021 के बीच सकल घरेलू उत्पाद में 75% की गिरावट के बाद, 2024 में वेनेजुएला  का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 9% बढ़ा और 2025 में फिर से बढ़ा। वेनेजुएला  2017 में अपनी 70% से अधिक खाद्य सामग्री आयात करता था, लेकिन मार्च 2026 तक 96% घरेलू उत्पादन करने की स्थिति में आ गया। तेल राजस्व, जो 2012 में 93 अरब डॉलर से गिरकर 2020 में 4.2 अरब डॉलर हो गया था, हाल के वर्षों में इसमें सुधार हुआ और यह लगभग 18 अरब डॉलर तक पहुँच चुका था। वेनेजुएला  में जीवन चुनौतियों से रहित नहीं था, न ही देश संकट-पूर्व स्तर पर लौट आया था, लेकिन – अब भी लागू लगभग 1,000 एकतरफ़ा दबाव बनाने वाले उपायों के बावजूद – देश की अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढाँचा, सार्वजनिक सेवाएँ, और उसके कई लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होना शुरू हो गया था – इसमें आपदा से प्रबंधन की क्षमता भी शामिल है।

मीठा समुद्र, गुइल्लेर्मो कुइटका (अर्जेंटीना), 1989.

दूसरा दावा: वेनेजुएला सरकार राहत कार्यों में बाधा डाल रही है।

शायद सबसे अधिक प्रचलित दावा यह रहा है कि वेनेजुएला  के अधिकारियों ने जानबूझकर स्वयंसेवकों और सहायता को पीड़ित समुदायों तक पहुँचने से रोका है। जबकि आधुनिक खोज और बचाव अभियान सावधानीपूर्वक समन्वय पर निर्भर करते हैं। बचाव कार्य में लगे कुत्तों को मलबे के नीचे जीवित लोगों का पता लगाने के लिए आसपास शांति की ज़रूरत होती है। भारी मशीनरी को साफ़ और खुले रास्तों की आवश्यकता होती है। एम्बुलेंसों को भीड़-मुक्त सड़कों की आवश्यकता होती है। हज़ारों नागरिकों की आपदाग्रस्त क्षेत्रों में मनमानी आवाजाही, चाहे वह कितनी भी सद्भावनापूर्ण क्यों न हो, बचाव कार्यों में बाधा डाल सकती है और जानें ले सकती है।

ज़मीनी रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि बचाव वाहन ट्रैफ़िक में फँस रहे थे। आमतौर पर चालीस मिनट में पूरी होने वाली यात्राओं में घंटों लग गए। गंभीर रूप से घायल पीड़ितों को ले जा रही एम्बुलेंसें भीड़भाड़ वाली और अगम्य सड़कों के कारण देरी से पहुँच रही हैं। इसलिए, आपदा क्षेत्रों में आम लोगों का आना-जाना प्रतिबंधित करना दमन का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह एक मानक आपातकालीन प्रक्रिया है जिसका उपयोग दुनिया भर में किया जाता है।

साथ ही, शुरू से ही संगठित स्वयंसेवकों की भागीदारी व्यापक रही है, जिसमें 26 जून के बाद पेशेवर आपातकालीन सेवाओं के साथ मिलकर राहत कार्यों के लिए हज़ारों लोगों ने औपचारिक रूप से पंजीकरण किया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि एकजुटता से बचाव कार्य मज़बूत होते हैं, न कि बाधित। सवाल यह नहीं कि नागरिकों को सहायता करनी चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि क्या सहायता इस तरह से व्यवस्थित की जाती है जिससे जानें बचती हैं।

बैरिकेड, होज़े क्लेमेंटी ओरोज़को (मेक्सिको), 1931.

तीसरा दावा: वेनेजुएला सरकार प्रभावित समुदायों की उपेक्षा कर रही है।

इस त्रासदी के पहले दिन, सिविल प्रोटेक्शन, बोलिवेरियन राष्ट्रीय सशस्त्र बल (एफ़एएनबी), पुलिस और पीड़ितों के परिवारों तथा समुदायों के संयुक्त प्रयासों ने ला गुवाऐरा के सबसे प्रभावित इलाक़ों से 2,407 लोगों को बचाने में मदद की। 1 जुलाई तक, यानी भूकंप के एक हफ़्ते बाद, आपदा क्षेत्र में सिविल प्रोटेक्शन एजेंसियों, आपातकालीन सेवाओं, पुलिस, सशस्त्र बलों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के लगभग 26,000 कर्मियों को तैनात किया गया था। लगभग 17,000 स्वयंसेवकों ने औपचारिक रूप से राहत अभियानों में भाग लिया था। प्रभावित क्षेत्रों से 6,461 लोगों को बचाया गया है। अधिकारियों ने 4,000 से अधिक विदेशी बचाव कर्मियों और मानवीय प्रयासों में भाग लेने वाले कम से कम 41 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ बचाव प्रयासों में समन्वय किया है। मानवीय राहत कार्यों ने पहले ही प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 90 लाख किलो भोजन, लगभग 28,000 खाद्य पार्सल और 32 लाख लीटर पेयजल सीधे पहुँचाया है – ये आँकड़े चल रहे राहत प्रयासों और नेशनल असेंबली की दैनिक रिपोर्टों के साथ हर दिन बढ़ रहे हैं। 80,000 से अधिक परिवारों को भोजन, परिवहन, चिकित्सा, देखभाल, मनोवैज्ञानिक सहायता और राहत शिविर की सहायता प्राप्त हुई है।

चिकित्सा दलों ने अस्पतालों, स्थानीय क्लीनिकों और आपातकालीन ट्राइएज [वह प्रक्रिया जिसके तहत घायलों को श्रेणियों में बाँटा जाता है ताकि उनकी चोटों की गंभीरता के अनुसार उनका इलाज किया जा सके] केंद्रों में 17,000 से अधिक लोगों का इलाज किया है। प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत सेवा बड़े पैमाने पर बहाल कर दी गई है। ये दावे कि ग्रान मिसियोन विविएंडा वेनेजुएला  – सरकार का प्रमुख आवास कार्यक्रम, जिसने 5.2 मिलियन परिवारों को आवास प्रदान किया है – के माध्यम से बनाए गए घर खराब निर्मित थे, तब झूठे साबित हुए जब पिछली सरकारों के तहत और निजी ठेकेदारों द्वारा बनाए गए घरों को भी इसी तरह की क्षति हुई। ला गुवाऐरा में तेरह बड़े राहत शिविर खोले गए हैं, जबकि काराकास, मिरांडा और अन्य प्रभावित राज्यों में बारह और शिविर बनाए जा रहे हैं और विस्तार के प्रयास भी जारी हैं। ये उपलब्धियाँ किसी भी तरह से मौजूद असह्य पीड़ा को मिटा नहीं देतीं। लेकिन वे यह दिखाती हैं कि वेनेजुएला  की सार्वजनिक संस्थाएँ और हज़ारों संगठित नागरिक बेहद कठिन परिस्थितियों में राहत प्रयास जारी रखे हुए हैं, और न कि हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

श्रापित टिन, अलेहांद्रो मारियो य्लानेस (बोलीविया), 1937.

चौथा दावा: वेनेजुएला के लिए यूएस की चिंता को उसके छद्म युद्ध से अलग किया जा सकता है।

हर सच्चे मानवीय योगदान, चाहे उसका स्रोत कोई भी हो, को सराहा जाना चाहिए। लेकिन मानवीय क़दमों को न तो व्यापक राजनीतिक वास्तविकता से अलग किया जा सकता है और न ही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से। यूएस के वे प्रतिबंध अब भी जारी हैं जिन्होंने व्यवस्थित रूप से वेनेजुएला  की अर्थव्यवस्था को कमज़ोर किया है, अंतर्राष्ट्रीय वित्त तक उसकी पहुँच को प्रतिबंधित किया है, ज़रूरत की वस्तुओं के आयात को अवरुद्ध किया है और वेनेजुएला  के लोगों के अरबों डॉलर फ्रीज़ कर दिए हैं। इसलिए एक साथ मानवीय सहायता की प्रशंसा नहीं की जा सकती जबकि वे नीतियाँ अब भी लागू हैं जो मानवीय आपात स्थितियों को और अधिक गंभीर बनाती हैं।

प्रतिबंध और अन्य एकतरफ़ा दबाव बनाने वाले उपाय अक्सर राजनीतिक रूप से प्रभावी होते हैं, इसलिए क्योंकि वे अदृश्य होते हैं। बमों के विपरीत, शायद ही कभी इनकी वजह से ऐसे हालात बनते हैं जिनकी तस्वीरें विचलित करने वाली हों। इसके बजाय, वे कई वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों, बुनियादी ढाँचे, उत्पादन क्षमता और राज्य संस्थानों को धीरे-धीरे कमज़ोर करते हैं। जब अंततः कोई आपदा आती है तो कमज़ोर संस्थानों को सरकारी अक्षमता के सबूत के तौर पर पेश किया जाता है, न कि जानबूझकर थोपे गए आर्थिक युद्ध के प्रभाव के रूप में। इस आर्थिक युद्ध की मानवीय लागत विनाशकारी रही है, जिसमें यूएस प्रतिबंधों की वजह से 2017 और 2018 के बीच 40,000 से अधिक मौतें हुईं और 300,000 लोगों को भी इसी जोख़िम में डाल दिया क्योंकि उनके पास आवश्यक दवाओं या उपचार तक पहुँच नहीं थी।

वेनेजुएला  का लगभग 31 टन सोना – जिसका मूल्य 2020 में लगभग 1.95 अरब डॉलर था – बैंक ऑफ इंग्लैंड में अभी भी रखा हुआ है, ऐसा इसलिए क्योंकि यूनाइटेड किंगडम भी वेनेजुएला  के ख़िलाफ़ वाशिंगटन के दबाव अभियान में शामिल है। देश पर लगभग 240 अरब डॉलर का ऋण भी होने की सूचना है, जिसमें डिफ़ॉल्टेड सॉवरेन और पीडीवीएसए बांड, उपार्जित ब्याज, अवैतनिक चालान, मध्यस्थता निर्णय और द्विपक्षीय ऋण शामिल हैं। हालाँकि सारा ऋण 2017 में लगाए गए वित्तीय प्रतिबंधों की वजह से नहीं है, लेकिन उन्होंने वेनेजुएला  को यूएस वित्तीय बाज़ारों से काट दिया और अपने क़र्ज़ों को चुकाने और पुनर्गठन करने की इसकी क्षमता को गंभीर रूप से सीमित कर दिया। देश की परिसंपत्तियों को क़ब्ज़े में रखा जाना जारी है और ऋण का बोझ देश के बुनियादी ढाँचे के पुनर्निर्माण, आवास प्रदान करने और पीड़ितों की गरिमा के साथ देखभाल करने के प्रयासों में बाधा डालता है।

चिंता प्रकट करता हुआ एक वक्तव्य जारी कर देना आज कोई अर्थवान मानवीय प्रयास नहीं माना जा सकता। यह सिर्फ़ तब हो सकता है जब इन एकतरफ़ा दबाव बनाने वाले उपायों को तुरंत हटा लिया जाए और वेनेजुएला  की फ़्रीज़ की हुई परिसंपत्तियों को उसे लौटा दिया जाए ताकि यह देश एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

हुआंका मूलनिवासी महिलाएँ, जूलिया कोडेसिदो (पेरू), 1931.

पाँचवाँ दावा: यह भूकंप बोलिवेरीयन प्रक्रिया की असफलता साबित करता है।

इस आपदा ने एक संगठित समाज की क्षमता को उजागर किया है जो असाधारण दबाव में सामूहिक रूप से काम करने में सक्षम है। दशकों में निर्मित कम्यून, स्थानीय संगठन, सार्वजनिक स्वास्थ्य नेटवर्क, खाद्य वितरण प्रणालियाँ, स्वयंसेवी ब्रिगेड और स्थानीय संस्थाएँ आपातकालीन राहत कार्य के लिए अपरिहार्य बन गई हैं। पूरे देश में, संगठित समुदायों ने उन संरचनाओं के माध्यम से भोजन, आश्रय, परिवहन, चिकित्सा देखभाल और स्वयंसेवकों को संगठित किया है जो भूकंप से बहुत पहले से मौजूद थीं।

कोई भी समाज इस स्तर की आपदा से उत्पन्न पीड़ा को ख़त्म नहीं कर सकता। लेकिन संगठित समुदायों वाले समाज आम तौर पर उन लोगों की तुलना में ऐसे संकटों का सामना करने और राहत कार्यों में ज़्यादा सक्षम होते हैं जो विशेष रूप से बाज़ारों और निजी पहल पर निर्भर करते हैं। यह जिजीविषा अनायास नहीं उभरती। यह सार्वजनिक शिक्षा, साक्षरता, स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक संगठन में दशकों के निवेश पर टिका है। बोलिवेरियन प्रक्रिया की शुरुआत के बाद से, लाखों वेनेजुएलावासियों  को शिक्षा तक पहुँच मिली है, निरक्षरता समाप्त कर दी गई है, नए सार्वजनिक विश्वविद्यालयों ने उच्च शिक्षा का विस्तार किया है, और स्वास्थ्य सेवाओं में सार्वजनिक निवेश बहुत अधिक बढ़ा है। यूएस के नेतृत्व वाले हाइब्रिड युद्ध द्वारा पहुँचाई गई क्षति के बावजूद, इन प्रगतियों ने न केवल सामाजिक संकेतकों को बल्कि सामूहिक संगठन के उन रूपों को भी मज़बूत किया है जो राष्ट्रीय आपातकाल के क्षणों में अपरिहार्य हो जाते हैं।

एल सेम्ब्रादोर का आवरण, गैब्रियल फर्नांडेज़ लेदेस्मा (मेक्सिको), 1930.

वेनेजुएला के लोगों के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाने चाहिए:

  1. आर्थिक प्रतिबंध सहित वेनेजुएला पर थोपे गए सभी एकतरफ़ा दबाव बनाने वाले उपायों को तुरंत वापस लिया जाए, और वेनेजुएला की जो सार्वजनिक परिसंपत्तियाँ फ़्रीज़ हैं, जिन पर रोक लगी है या अन्यथा विदेशों में इसकी पहुँच से बाहर है, उन्हें वेनेजुएला को दे दिया जाए।
  2. हर तरह के विदेशी हस्तक्षेप को ख़त्म किया जाए।
  3. वेनेजुएला का विदेशी ऋण माफ़ कर दिया जाए।
  4. मानवीय सहायता का समन्वय वेनेजुएला के सार्वजनिक संस्थानों और संगठित समुदायों के साथ किया जाना चाहिए, न कि इसे राजनीतिक या सैन्य हस्तक्षेप के एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
  5. अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान अंतत: इस आपदा से हट जाएगा लेकिन तब भी आंदोलनों को वेनेजुएला  की जनता को समर्थन देना जारी रखना चाहिए।

प्राकृतिक आपदाओं को टाला नहीं जा सकता। लेकिन इनका मानवीय संकट बन जाना पूरी तरह से राजनीतिक निर्णयों पर निर्भर करता है। वेनेजुएला  के लोगों के सामने आज अपने घरों, स्कूलों, अस्पतालों और समुदायों के पुनर्निर्माण की चुनौती खड़ी है, लेकिन इसके साथ ही वे दशकों से चले आ रहे आर्थिक युद्ध की मार भी झेलते आ रहे हैं। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता को सहानुभूति से आगे बढ़ना होगा: इसे उन सभी दावों को ख़ारिज करना होगा जो वेनेजुएला के दुश्मन कर रहे हैं, यह माँग उठानी होगी कि वेनेजुएला की क्षमता को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों और परिसंपत्तियों पर लगी बाधाएँ ख़त्म की जाएँ, और साथ ही इस देश के संकट से उबरने, पुनर्निर्माण करने, बाहरी हस्तक्षेप से आज़ाद होने तथा अपना भविष्य ख़ुद तय करने के अधिकार की रक्षा करनी होगी।

स्नेह सहित,

विजय