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आईएमएफ़ की लूट रुकेगी, तभी आज़ाद होगा अफ़्रीका: इकतालीसवाँ न्यूज़लेटर (2025)

सेनेगल जैसे देशों में आईएमएफ़ गलत तरीक़े से कर्ज़ देने और झूठे हिसाब-किताब में लिप्त रहा है, ताकि देश की आज़ादी कमजोर हो और बड़ी विदेशी कंपनियों को फ़ायदा मिले।

मुखौटे के साथ सैर, ओमर बा (सेनेगल), 2016

प्यारे दोस्तो,

ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।

फरवरी 2025 में, सेनेगल के लेखा परीक्षक न्यायालय (कोर्ट ऑफ ऑडिटर्स) ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें मैकी साल (2012-2024) के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान 2019 और 2024 के बीच सार्वजनिक वित्त के प्रबंधन में अनियमितताएँपाई गईं। न्यायालय के अनासर सरकार ने बताया था कि साल 2023 में बजट घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.9% था, जबकि वास्तव में यह 12.3% था। सितंबर 2024 में दकार में सेनेगल के नए प्रधानमंत्री उस्माने सोंको ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में काफ़ी गम्भीर आरोप लगाए जिसके बाद ही न्यायालय ने राजकोषीय पुनर्गठन की जाँच करना शुरू किया। लेखा परीक्षकों ने अपनी जाँच में पाया और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने इस बात की पुष्टि की कि 2023 में वास्तविक ऋण अनुपात जीडीपी का 99.7% था न कि 74.7% और कि घाटे को जीडीपी के 5.6% से कम आंका गया था (अगस्त 2025 में ऋण अनुपात को संशोधित करके जीडीपी का 111% कर दिया गया)।

प्रधानमंत्री सोंको ने कहा कि सेनेगल की वित्तीय स्थिति विनाशकारीहै, जिसका कारण है एक दशक लंबे साल के शासनकाल से विरासत में मिली तीन समस्याएँ:

  1. एक अनियंत्रित ऋण नीतिजिसने देश के सार्वजनिक ऋण को बढ़ाया, जबकि उस ऋण को चुका पाने के लिए ज़रूरी विकास की तमाम संभावनाओं को मिटा दिया।
  2. एक ऐसा प्रशासन जिसने सेनेगल के लोगों से इस क़र्ज़ और अर्थव्यवस्था की गंभीर समस्याओं को छिपाया (सेनेगल की जनता ने फिर भी मार्च 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में साल के चुने हुए उत्तराधिकारी, अमादौ बा को हराकर बसीरौ डियोमाए फाए को चुना)।
  3. भ्रष्टाचार‘, जिसमें चार मंत्रियों द्वारा देश के कोविड फंड का गबन शामिल है।

आध्यात्मिक मत्स्य पालन, अमादू कैमारा गेय (सेनेगल), 2021

साल की सरकार ने जानबूझकर अपने देश को दिवालिया बनाया और सरकारी ख़ज़ाने को लूटा, इस बात के सबूत अब धीरे-धीरे राष्ट्रपति फाए और प्रधानमंत्री सोंको द्वारा जुटाए जा रहे हैं। फाए (जन्म 1980) और सोंको (जन्म 1974) दोनों कर अधिकारी रहे हैं और ये सेनेगल की राजनीति और नौकरशाही में अक्षमता, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से परेशान होकर राजनीति में आए। देशभक्ति के आदर्शों से प्रेरित अपनी युवावस्था के दौरान फाए और सोंको ने École nationale d’administration (राष्ट्रीय प्रशासनिक स्कूल) में पढ़ाई की और फिर कर एवं संपदा महानिदेशालय (DGID) में मिले, जहाँ सोंको ने कर एवं संपदा एजेंटों की स्वायत्त यूनियन (Autonomous Union of Tax and Estate Agents) की स्थापना की।

2011 में, कनाडा की कंपनी SNC-लवालिन ने ग्रांड कोट में एक मिनरल सैंड्स प्रोसेसिंग प्लांट बनाने के लिए 5 करोड़ डॉलर का ठेका हासिल किया। हालांकि, बाद में पैराडाइज पेपर्स में खुलासा हुआ कि सेनेगल सरकार ने SNC-लवालिन मॉरीशस नामक किसी इकाई के साथ अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) किया था। दूसरे शब्दों में, कनाडा की कंपनी एक मॉरीशस की कंपनी बन गई (दिलचस्प बात यह है कि सेनेगल और मॉरीशस के बीच एक कर संधि थी जो मॉरीशस में पंजीकृत कंपनियों को सेनेगल में करों का भुगतान करने से छूट देती थी)। अधिकार क्षेत्र बदल जाने की वजह से SNC-लवालिन सेनेगल को लगभग 89 लाख डॉलर कर देने से बच गई (SNC-लवालिन की वार्षिक आय लगभग 600 करोड़ डॉलर है जो 1.8 करोड़ की आबादी वाले सेनेगल की जीडीपी का एक तिहाई है)।

प्रस्थान, सेआ डियालो (सेनेगल), 2017

प्रधानमंत्री सोंको इस परियोजना के मुखर विरोधी थे और इसके ख़िलाफ़ संघर्ष जारी रखने के लिए उन्होंने जनवरी 2014 में अफ्रीकन पैट्रियट्स ऑफ सेनेगल फॉर वर्क, एथिक्स एंड फ्रैटर्निटी (PASTEF) नामक एक राजनीतिक दल का गठन किया। 2017 में, उन्होंने राष्ट्रीय संसद में एक सीट जीती, जहाँ उन्होंने टैक्स हेवन और कॉर्पोरेट चोरी के मुद्दे को उठाया। उन्होंने 2018 में कहा, ‘एक टैक्स हेवन उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए स्वर्ग हो सकता है जो करों का भुगतान करने से बचना चाहती हैं, लेकिन किसी देश के लिए यह एक नरक है2019 में, सोंको ने एक विवादास्पद राष्ट्रपति चुनाव में लगभग 16% वोट हासिल किए। 2022 के नगरपालिका और संसदीय चुनावों में, येवी असकान वी (फ्री द पीपल/जनता को आज़ाद करो) नाम के एक गठबंधन को बड़ी सफलता मिली जिसका नेतृत्व PASTEF कर रहा था। इन चुनावों में सेनेगल की सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार बार्थेलेमी डायस को दकार का मेयर चुना गया। तत्कालीन राष्ट्रपति साल इन पूर्व कर अधिकारियों से नाराज़ थे और उन्होंने उनकी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने और सोंको को ख़ामोश करने की कोशिश की। इसकी वजह से 2023-2024 में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए जिनका नतीजा हुआ कि फाए और सोंको की चुनावों में जीत हुई। ज़ाहिर सी बात है कि इन पूर्व कर अधिकारियों ने लेखाकारों के बहीखातों की जाँच शुरू की और धोखाधड़ी के सबूत खोज निकाले।

लेकिन क्या केवल साल और उनकी सरकार ही धोखाधड़ी की दोषी हैं? आखिरकार, सेनेगल की पूरी नौकरशाही, जिसमें लेखा न्यायालय भी शामिल है, न तो सोंको और अन्य लोगों की शिकायतों पर जाँच करते दिखाई दिए और न ही पैराडाइज पेपर्स के खुलासों पर उन्होंने कोई कार्रवाई की।

शायद सबसे बड़ा दोष सेनेगल सरकार का नहीं बल्कि आईएमएफ़ का है। 2017 में जब से सोंको ने यह मुद्दा उठाना शुरू किया तब से आईएमएफ़ ने सेनेगल पर कम-से-कम सात स्टाफ रिपोर्टें जारी की हैं, जिनमें से किसी ने भी ऋण या वित्त पर रिपोर्टिंग व्यवस्थाओं में कोई समस्या होने का संकेत नहीं दिया। उदाहरण के लिए, आईएमएफ़ की 2019 की स्टाफ रिपोर्ट में कहा गया था कि सेनेगल की लेखा परीक्षा व्यवस्था अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों के अनुरूप है और देश ने 2017 में आईएमएफ़ के विशेष डेटा प्रसारण मानक (Special Data Dissemination Standard) को अपना लिया था। यदि आईएमएफ़ ने सेनेगल द्वारा दिए गए आंकड़ों को स्वीकृति दी थी तो वह भी धोखाधड़ी के लिए उतना ही जिम्मेदार है जितना कि साल की सरकार और इसकी भी जवाबदेही बनती है।

कम्पोज़िशन, सुलेमान केइता (सेनेगल), 2010

बजट संबंधी गलत रिपोर्टिंग के ख़ुलासे के बाद, अक्टूबर 2024 में आईएमएफ़ ने सेनेगल को ऋण देने की योजना को निलंबित कर दिया। मार्च 2025 में, आईएमएफ़ की स्टाफ रिपोर्ट ने सेनेगल की नौकरशाही और संस्थानों में आवश्यक सुधारों की ज़रूरतपर ध्यान दिया (लेकिन आईएमएफ़ में सुधारों पर नहीं)। लगभग उसी समय आईएमएफ़ की प्रवक्ता जूली कोज़ैक ने कहा कि संभव है कि सेनेगल को साल सरकार द्वारा धोखाधड़ी से लिया गया क़र्ज़ वापस न करना पड़े क्योंकि फाए-सोंको सरकार ने इन अनियमितताओं को उजागर करने के लिए जो ऑडिट करवाया उसमें उनकी नेकनीयत दिखती है। हालाँकि इस छूट के साथ कुछ शर्तें जुड़ी थीं क्योंकि यह आईएमएफ़ और सेनेगल के बीच समझौते का हिस्सा था।

आईएमएफ़ ने अगस्त 2025 की अपनी स्टाफ रिपोर्ट में अपने इरादे साफ़ कर दिए ऋण में छूट की इस संभावना के बदले में वह नई सरकार से ऐसी रियायतें चाहता है जिनसे सेनेगल की बची-खुची संप्रभुता भी तबाह हो सकती है। फाए-सोंको सरकार ने संप्रभुता को मज़बूत करने के आधार पर भी इतना बड़ा जनादेश हासिल किया है। आईएमएफ़ पिछली सरकार की धोखाधड़ी को लेकर फाए-सोंको सरकार की ईमानदारी का इस्तेमाल उसे कमज़ोर करने के लिए कर रहा है। आईएमएफ़़ दरअसल चाहता है कि बहुराष्ट्रीय निगमों के माध्यम से रणनीतिक क्षेत्रों‘ (जैसे ऊर्जा और कृषि) में उसकी और अधिक पहुँच बने, सरकार सख़्ती से राजकोषीय अनुशासन का पालन करें (यानी मज़दूर वर्ग और किसानों के कल्याण के लिए सार्वजनिक ख़र्च में कटौती) और साल के 2014 की प्लान सेनेगल एमरजेंट को जारी रखा जाए, जिसके अंतर्गत तकनीकी भाषा के मायाजाल में यह सच्चाई छिप जाएगी कि कैसे राष्ट्रीय संपदा बहुराष्ट्रीय कंपनियों और सेनेगल के अभिजात वर्ग के हाथों में आती जा रही है। ऋण चुकाने में यह रियायत फाए-सोंको की सरकार को मजबूर करती रहेगी कि वे  संप्रभुता का अजेंडा छोड़कर आईएमएफ़ के सामने झुक जाएँ।

शीर्षकहीन, यूनूस सेय (सेनेगल), 1972

सेनेगल का मामला अनोखा नहीं है। 1980 के दशक में लैटिन अमेरिका में अमेरिका समर्थित सैन्य सरकारों ने बजट से बाहर ऋण लिए, जिस पर आईएमएफ़ ने गंभीर सवाल तो ज़रूर उठाए लेकिन कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की। 2000 में आईएमएफ़ ने पाकिस्तान की सैन्य सरकार द्वारा गलत रिपोर्टिंग पकड़ी लेकिन फिर भी कुछ किया नहीं, ख़ासतौर से 2001 में पाकिस्तान के अमेरिका की वार ऑन टेररमें उत्साहपूर्वक शामिल हो जाने के बाद। लगभग इसी दौर में आईएमएफ़ ने यूक्रेन को ऋण की ग़लत रिपोर्टिंग के लिए माफ कर दिया, यह क़दम भी अमेरिकी सरकार के दबाव में उठाया गया क्योंकि अमेरिका राष्ट्रपति लियोनिद कुचमा द्वारा पश्चिमी देशों को दिए जा रहे समर्थन को बनाए रखना चाहता था। कांगो-ब्राज़ाविल में 2002 और गाम्बिया में 2003 में भी कुछ ऐसा ही हुआ। 2006 में आईएमएफ़ ने एक पेपर जारी किया कि कैसे ग़लत रिपोर्टिंग नीतियों को कम बोझिलबनाया जाए ताकि देशों पर भारी जुर्माने का बोझ न डाला जाए। इस रवैये ने 2016 में आईएमएफ़ द्वारा मोज़ाम्बिक के साथ हुए व्यवहार को प्रभावित किया जब ऊर्जा निर्यातक देश को छिपे हुए क़र्ज़ से खड़ी हुई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

वाशिंगटन की पसंदीदा सरकारों को हल्की सी फटकार मिलती है जबकि एक संप्रभु नीति विकसित करने की इच्छुक सरकारों को दंडित किया जाता है।

सखियाँ, पापे दउदा गेय (सेनेगल), 1960

सितंबर में, सेनेगल के लोकप्रिय संगीतकार शेख लो (जन्म 1955) ने Maame (2025) नाम से एक नया एल्बम निकाला। एल्बम में अफ्रीकन डेवलपमेंटनाम का एक रेगे गीत है जिसकी शुरुआत होती है शेख लो द्वारा शेख अंता डियोप, थॉमस संकारा और नेल्सन मंडेला के नाम लेते हुए। इसके बाद वे फ्री, फ्री, फ्री अफ्रीका… अफ्रीका मस्ट गो बी फ्री‘ [आज़ाद, आज़ाद, अफ़्रीकाअफ़्रीका आज़ाद होगा ही] शब्दों से अपनी आवाज़ का जादू चलाते हैं। यह गीत जड़ों की ओर लौटने जैसा है, उन आशाओं और आकांक्षाओं की ओर वापस जाने जैसा, जब सेनेगल ने 1960 में अपनी आज़ादी हासिल की थी और इसके पहले राष्ट्रपति लेओपोल्ड सेदार सेघोर के नेतृत्व में अपना झंडा फहराया था। शेख लो हेल्थ फ़र्स्ट’ (सबसे पहले सेहत) कहते हैं और इसके साथ ही कई और माँगों को भी पेश करते हैं:

खेती, पशुपालन, मछली पकड़ना।
शिक्षा: ज्ञान का मंदिर।
व्यावसायिक प्रशिक्षण।
नौजवानों के लिए रोज़गार।
सार्वजनिक सुरक्षा।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
गरीबी से लड़ना।
भ्रष्टाचार से लड़ना।
स्वतंत्र और निष्पक्ष न्याय।
लोकतंत्र का विकास।

अफ्रीका की आज़ादी महाद्वीप के चौवन देशों की राजधानियों में लहराए जाने वाले उनके चौवन झंडों के बावजूद सुनिश्चित नहीं है। आज़ादी तभी मिलेगी जब अफ्रीका के लोग अपने संसाधनों पर संप्रभु नियंत्रण का दावा करें और पूंजीवाद और साम्राज्यवाद की अपमानजनक परिस्थितियों से खुद को आज़ाद करवाएँ।

स्नेह सहित,

विजय