भविष्य
भविष्य का मतलब कैलेंडर में कोई आने वाली तारीख़ नहीं है। यह संघर्ष है, मानवता को पूँजीवाद की जकड़ से छुड़ाने का और उस राह चलने का जहाँ समस्याएँ सचमुच हल होंगी।

ग़ज़ा के नरसंहार की ख़बरों न आना, इस हिंसा का अंत नहीं, बल्कि इसकी यह निरंतरता ही दुनिया को इसकी तरह से उदासीन बना रही है।



यह डोसियर तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष की विशाल सांस्कृतिक विरासत का ब्यौरा पेश करता है और इस बात पर रोशनी डालता है कि कैसे गीतों और नाटकों ने जनता को उपनिवेशवाद, राजशाही और जमींदारी के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत दी। यह स्पष्ट है कि कला और संस्कृति वर्ग संघर्ष में जन्म लेती है और फिर वर्ग संघर्ष को आगे बढ़ाने में मदद करती है। एक ऐसे समाज में जिसे साक्षर होने से रोका गया था, वहाँ गीतों और नाटकों ने जनता में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
