मिट्टी और ख़ूनः लू शुन का क्रांतिकारी साहित्य, उनकी मृत्यु के नब्बे वर्ष बाद
लू शुन के अंतिम दशक के राजनीतिक निबंधों-भाषणों में भाषा, निराशा, अंतर्राष्ट्रीयतावाद और सामाजिक परिवर्तन के सांस्कृतिक आधार पर उनके विचारों को हम फिर से समझते हैं।

वॉशिंगटन की घटती ताक़त से नए अवसर पैदा हुए हैं, लेकिन इससे वित्त, तकनीक और उत्पादन पर बड़ी कंपनियों का एकाधिकार अपने-आप ख़त्म नहीं हो जाएगा।

भविष्य का मतलब कैलेंडर में कोई आने वाली तारीख़ नहीं है। यह संघर्ष है, मानवता को पूँजीवाद की जकड़ से छुड़ाने का और उस राह चलने का जहाँ समस्याएँ सचमुच हल होंगी।



एआई की सीमाएँ उजागर होने के साथ युवाओं में यह समझ बढ़ी है कि इस पर आँख मूँदकर भरोसा करने की बजाय इसका विवेकपूर्ण इस्तेमाल किया जाए।