तबाही की कगार पर सेनेगल: तेरहवाँ न्यूज़लेटर (2026)
दशकों के उपनिवेशवाद और भ्रष्टाचार से त्रस्त सेनेगल के सामने भी अन्य देशों की तरह एक दुविधा है: ऋण के बोझ तले संप्रभु विकास कैसे हो।
प्यारे दोस्तो,
ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।
साल 2026 में दाख़िल होने के साथ सेनेगल पहाड़ जैसे क़र्ज़ के चंगुल में और भी ज़्यादा फँस गया। अप्रैल 2024 में मौजूदा राष्ट्रपति बासिरौ दियोमे फेय के सत्ता सँभालने के बाद यह साफ़ हो गया कि उनसे पिछले राष्ट्रपति मैकी सैल (जो 2012 से 2024 तक इस पद पर रहे) ने भारी क़र्ज़ की सच्चाई छिपा रखी थी। इसमें वे छिपे क़र्ज़ भी शामिल थे जो जीडीपी के 25.3 प्रतिशत के बराबर थे, यह सच्चाई सेनेगल की जनता और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) दोनों से छिपाई गई। इन देनदारियों ने एक संरचनात्मक विरोधाभास को उजागर किया: विदेशी वित्त पर आधारित विकास के मॉडल की कमज़ोरियाँ साफ़ दिखाई देती हैं।
सेनेगल ज़्यादा देर तक इस रास्ते पर नहीं चल सकता।
राष्ट्रपति फेय के सामने अब एक स्पष्ट दोराहा है: या तो आईएमएफ़ की नीतियों के ज़रिए सेनेगल की निर्भरता को और बढ़ाया जाए या बेहद कठिन दौर के बीच भी विकास की एक संप्रभुता आधारित राह तैयार की जाए। सेनेगल का सार्वजनिक ऋण इसके जीडीपी के 130% से भी ज़्यादा हो चुका है, आईएमएफ़ की ओर से मदद स्थगित है और निजी ऋण बाज़ार तक पहुँच मुश्किल होती जा रही है। अब इसके पास बहुत कम उपाय हैं: पुनर्वित्तपोषण के साथ कल्याणकारी नीतियों पर सरकारी ख़र्च में कटौती, या जी20 कॉमन फ़्रेमवर्क के ज़रिए ऋण की शर्तों में बदलाव, यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसके ज़रिए आधिकारिक लेनदार समन्वित ऋण वसूल कर पाते हैं लेकिन यह भी आईएमएफ़ समर्थित उदारीकरण के कार्यक्रम पर टिकी है।
यदि राष्ट्रपति फेय आईएमएफ के रास्ते पर बने रहते हैं, तो उन्हें प्रतिगामी करों के माध्यम से राजस्व संग्रह को मजबूत करना होगा और सरकारी व्यय को सख़्ती से सीमित करना होगा। आईएमएफ ने व्यापक आर्थिक स्थिरता बहाल करने और ‘बाज़ार विश्वास’ फिर से हासिल करने के लिए इन उपायों पर ज़ोर दिया है। इस नीति के परिणामस्वरूप स्थायी स्थिरता के उदाहरण बहुत कम हैं। इसके बजाय, यह एक ऋण-कटौती (डैट-ऑस्टेरिटी) चक्र को पुनः उत्पन्न करता है, जिसमें ऋणदाताओं को देनदार देशों के विकास और लोगों की बुनियादी ज़रूरतों पर प्राथमिकता दी जाती है।
पूरे वैश्विक दक्षिण में क़र्ज़ चुकाने का बढ़ता दबाव सार्वजनिक निवेश पर हावी रहता है, औद्योगिक नीति को सीमित करता है, और राज्य की क्षमता को कमज़ोर करता है। सेनेगल भी कोई अपवाद नहीं: यह क़र्ज़ चुकाने के लिए जितने संसाधन लगाता है, उतना ही ऊर्जा प्रणालियों, कृषि-उद्योग बदलाव और सामाजिक आधारभूत ढाँचे में इसका निवेश कम होता जाता है – जबकि ये क्षेत्र दीर्घकालिक समष्टि आर्थिक स्थिरता की बुनियाद हैं।
आईएमएफ़ फ़्रेमवर्क विकास को संतुलित सरकारी बजट के नतीजे के रूप में देखता है न कि उसकी पूर्वस्थिति के रूप में। यह मानता है कि स्थिरता से प्रगति होगी और बदलाव भी। ऋण चुकाने की गारंटी देने के बजाय, आईएमएफ के स्थिरीकरण कार्यक्रम अक्सर अर्थव्यवस्था को संकुचित कर देते हैं और देशों को स्थायी ऋण-नवीनीकरण (रोलओवर) की स्थिति में फँसा देते हैं।
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विदेशी वित्त पर निर्भरता ने सेनेगल को इसके झटकों के सामने कमज़ोर और अस्थिर पूँजी प्रवाह पर निर्भर कर दिया है। भविष्य में होने वाली आय के वादे – ख़ासतौर से हाइड्रोकार्बन निर्यात से – ने और क़र्ज़ को बढ़ावा दिया जिसने देश को वैश्विक वित्तीय अस्थिरता को सह पाने में थोड़ा और अक्षम बना दिया है। जब इस व्यवस्था में संकट आया और छिपी हुई देनदरियाँ सामने आयीं तो साफ़ हुआ कि यह मॉडल किसी भी वक़्त ढह सकता है। परिणाम केवल एक राजकोषीय संकट ही नहीं था, बल्कि नीतिगत और राजनीतिक स्वायत्तता का ह्रास भी था, क्योंकि आर्थिक रणनीति लेनदारों की अपेक्षाओं, क्रेडिट रेटिंग और आईएमएफ की शर्तों द्वारा सीमित हो गई। यह उपनिवेशवाद-मुक्ति की बच गई समस्या का आर्थिक रूप है: आर्थिक संप्रभुता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता।
सेनेगल अब एक गहरे वित्तीय संकट का सामना कर रहा है जो इतना बढ़ सकता है कि वह क़र्ज़ न चुका पाए। लेकिन असली ख़तरा इस बात में है कि इस संकट को कैसे हल किया जाता है और उसके लंबे समय के असर क्या होंगे। आईएमएफ की अगुआई में किया गया समायोजन थोड़े समय के लिए स्थिति को स्थिर कर सकता है, लेकिन इसकी कीमत लंबे समय तक सख़्ती (कटौती) और कमजोर होती सरकारी क्षमता के रूप में चुकानी पड़ सकती है। अगर क़र्ज़ का पुनर्गठन ठीक से नहीं किया गया, तो यह देश की वित्तीय संस्थाओं को अस्थिर कर सकता है और भविष्य में ऋण मिलने को गुंजाइश को सीमित कर सकता है।
अगर सेनेगल को ऋण-सरकारी ख़र्च में कटौती के इस दबाव से बाहर निकलना है तो इसे आईएमएफ तथा वैश्विक उत्तर के वित्तीय बाज़ारों द्वारा परिभाषित संकीर्ण दायरों से बाहर निकलकर विकल्पों के बारे में सोचना होगा। ये विकल्प जोख़िम से रहित नहीं हैं और संस्थागत रूप से कठिन होंगे क्योंकि सीएफए फ्रैंक क्षेत्र और पश्चिम अफ्रीकी आर्थिक और मौद्रिक संघ (WAEMU) में सेनेगल की सदस्यता इसकी मौद्रिक और राजकोषीय नीति स्वायत्तता को सीमित करती है। आईएमएफ की अगुआई वाली ऋण-कटौती व्यवस्था के लिए निम्नलिखित आठ संभावित विकल्प हैं:
विकल्प 1: एक अस्थायी ऋण स्थगन और सार्वजनिक लेखापरीक्षा। सेनेगल को विदेशी ऋण चुकाने पर अस्थायी रोक लगाने और अपने ऋण भंडार का व्यापक और पारदर्शी सार्वजनिक लेखापरीक्षा करने के द्वारा वार्ता की शर्तों को बदलना होगा, जिसमें छिपी हुई देनदारियाँ भी शामिल हैं। 2007–2008 में, इक्वाडोर में राफेल कोर्रिया की सरकार ने सभी सार्वजनिक ऋणों का लेखापरीक्षा करने के लिए एक आयोग गठित किया, जिसमें पाया गया कि इसके बड़े हिस्से अवैध थे; इसके बाद कोर्रिया ने इक्वाडोर के विदेशी ऋण के कुछ हिस्सों पर स्थगन घोषित कर दिया, बाद में उनकी सरकार ने भारी डिस्काउंट पर बॉन्ड वापस ख़रीद लिए और 7 अरब डॉलर से अधिक की रक़म बचा ली। एक स्थगन राजकोषीय राहत प्रदान करेगा और किसी भी बाद के पुनर्गठन में सेनेगल की बातचीत की स्थिति को मजबूत करेगा। वास्तव में अफ्रीकी बांडों पर उच्च ब्याज दरों ने पहले ही निवेशकों को चूक के जोख़िम के लिए मुआवज़ा दे दिया है, जिससे उन्हें पूर्ण भुगतान से पहले ही लाभ कमाने की अनुमति मिलती है। इसलिए बांडधारकों को महत्त्वपूर्ण ‘हेयरकट’ स्वीकार करना चाहिए क्योंकि कई लोग पहले ही अपने प्रारंभिक निवेश की वसूली कर चुके हैं।
विकल्प 2: दक्षिण-दक्षिण ऋण समाधान ढाँचा। आईएमएफ द्वारा नियंत्रित वार्ता में प्रवेश करने की बजाय, सेनेगल एक ऋण सम्मेलन के लिए दबाव बना सकता है जिसमें उसके प्रमुख द्विपक्षीय लेनदार निजी बांडधारकों के साथ शामिल हों – जो देश के वाणिज्यिक ऋण के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। चीन और फ्रांस की उपस्थिति, जो मिलकर सेनेगल के द्विपक्षीय ऋण के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं, वार्ता को निजी-लेनदार-प्रधान वार्ताओं से हटाकर एक सार्थक समाधान की ओर ले जाएगी। सेनेगल को एक एकीकृत ढाँचे में मैच्योरिटी की समयसीमा बढ़ाने, ब्याज में कमी, और आंशिक ऋण माफ़ी की माँग करनी चाहिए जो आईएमएफ की शर्तों के अधीन न हो। सेनेगल को अपनी विकास आवश्यकताओं को सर्वोपरि रखते हुए वार्ता करनी चाहिए।
विकल्प 3: अफ्रीकी वित्तीय एकजुटता। सेनेगल का संकट पश्चिम अफ्रीका के पूरे क्षेत्र के लिए मायने रखता है। अफ्रेक्सिमबैंक और अफ्रीकी विकास कोष, साथ ही क्षेत्र के संप्रभु कोष (जैसे नाइजीरिया संप्रभु निवेश प्राधिकरण और मोरक्को की कैस डे डिपो ए डे गेस्टियन) जैसे संस्थान ऋण के वैकल्पिक स्रोत पेश कर सकते हैं। ये आवश्यक आयातों के वित्तपोषण, प्रमुख क्षेत्रों के समर्थन, और राजकोषीय संकुचन के सबसे बुरे प्रभावों से बचने में मदद कर सकते हैं। लेकिन क्षेत्रीय वित्तपोषण का रणनीतिक उपयोग केवल निरंतर ऋण सेवा सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके बजाय, इसे एक बफर के रूप में काम करना चाहिए जो सेनेगल को अपने बाह्य दायित्वों का पुनर्गठन करते हुए घरेलू आर्थिक गतिविधि को प्राथमिकता देने की अनुमति देता है।
विकल्प 4: वैश्विक दक्षिण विकास बैंकों के साथ जुड़ाव। सेनेगल को न्यू डेवलपमेंट बैंक में शामिल होने की कोशिश करनी चाहिए, जो ब्रिक्स देशों द्वारा स्थापित बहुपक्षीय विकास बैंक है; वर्तमान में इसके नौ सदस्यों में से केवल तीन अफ्रीकी देश हैं: अल्जीरिया, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका। ऐसे बैंक, विश्व बैंक जैसी शर्तों के बिना बुनियादी ढाँचे और औद्योगिक परियोजनाओं के वित्तपोषण की संभावनाएँ प्रदान करते हैं। सेनेगल को वित्त के स्रोतों में विविधता लाने की दीर्घकालिक रणनीति के रूप में ऐसे संस्थानों के साथ जुड़ना शुरू करना चाहिए। यह विकल्प तत्काल राहत के बारे में नहीं है, बल्कि एक नए वैश्विक दक्षिण वित्तीय ढाँचे के निर्माण में भाग लेने के बारे में है।
विकल्प 5: ऋण को उत्पादक निवेश में परिवर्तित करना। सेनेगल का लगभग 30 अरब डॉलर के सार्वजनिक ऋण में से चीनी लेनदारों पर लगभग 5 अरब डॉलर का ऋण है, जिसमें से अधिकांश यूरोबॉन्ड उधार के माध्यम से नहीं, बल्कि बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए अर्जित किया गया था। सेनेगल चीन को अपने कुछ भुगतानों को प्रत्यक्ष निवेश में परिवर्तित करने के लिए वार्ता कर सकता है ताकि नकद चुकौती की बजाय, ऋण सेवा को उन परियोजनाओं में पुनर्निर्देशित किया जाए जो देश की उत्पादक क्षमता का विस्तार करती हैं (उदाहरण के लिए, ऊर्जा प्रणाली, परिवहन नेटवर्क, और कृषि-प्रॉसेसिंग)। यह तरीक़ा क़र्ज़ को विकास के एक साधन में बदल देता है और लंबे समय के लिए ऋणदाताओं के हितों को सेनेगल के अपने संरचनात्मक बदलाव के साथ जोड़ देता है।
विकल्प 6: पूंजी प्रबंधन और आर्थिक प्राथमिकता निर्धारण। राष्ट्रपति फेय और प्रधानमंत्री उस्मान सोंको राजनीति में कर अधिकारियों के रूप में आए थे, जो राज्य की कर वसूली में विफलता और बहुराष्ट्रीय निगमों की लेखांकन प्रथाओं की जाँच न कर पाने से निराश थे। अब उनके पास पूंजी प्रवाह पर नियंत्रण कसने, आवश्यक आयातों (ईंधन, दवा, मध्यवर्ती वस्तुओं) को प्राथमिकता देने, और अर्थव्यवस्था के रणनीतिक क्षेत्रों की रक्षा करने का अवसर है। इस तरह के उपाय सेनेगल को घरेलू प्राथमिकताओं को बाहरी दबावों के अधीन करने से इनकार करके वैश्वीकरण के सबसे ख़राब पहलुओं से ‘अलग होने‘ का अवसर देंगे।
विकल्प 7: हाइड्रोकार्बन राजस्व का संप्रभु उपयोग। मार्च के मध्य में, सेनेगल की राज्य ऊर्जा कंपनी पेट्रोसेन होल्डिंग के सीईओ अलियूने गे ने ख़ुलासा किया कि सरकार को सेनेगल के पहले ऑफ़शोर तेल उत्पादन, संगोमार तेल परियोजना से उत्पन्न राजस्व का केवल एक अंश प्राप्त हो रहा था। पेट्रोसेन को 4 अरब डॉलर के राजस्व में से केवल 600 मिलियन डॉलर प्राप्त हुए – उस राशि का आधा हिस्सा ऋण चुकाने में चला गया और केवल लगभग 200 मिलियन डॉलर सेनेगल सरकार को गए। वित्तीय लेखापरीक्षक के रूप में प्रशिक्षित गे ने कहा, ‘अनुबंध पूरी तरह से विफल रहा।’ आईएमएफ का ढाँचा इन आयों को क़र्ज़ चुकाने के लिए गिरवी (कोलेटरल) की तरह देखता है, जबकि इन्हें लंबे समय के विकास के लिए अलग रखा जाना चाहिए। इसके बजाय, हाइड्रोकार्बन से होने वाली आय का उपयोग एक संप्रभु धन कोष (सॉवरेन वेल्थ फंड) बनाने के लिए किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सार्वजनिक नियंत्रण और रणनीतिक योजना होनी चाहिए कि यह संपत्ति क़र्ज़ चुकाने के चक्र में जाने के बजाय विविधीकरण, औद्योगीकरण और सामाजिक निवेश में लगाई जाए।
विकल्प 8: एक अफ्रीकी ऋण-विरोधी गुट का निर्माण। अफ्रीकी देशों ने लागोस योजना (1980), अफ्रीकी एकता संगठन के सामूहिक आत्मनिर्भरता और क्षेत्रीय एकीकरण पर आधारित अफ्रीकी विकास के आह्वान से लेकर हाल के अफ्रीकी संघ के सुधार संबंधी आह्वान तक, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की बार-बार सामूहिक आलोचना की है। लेकिन वैश्विक वित्तीय प्रणाली की संरचनात्मक शक्ति के कारण उन्होंने इस आलोचना को कभी एक स्थायी ऋण-विरोधी गुट में संगठित नहीं किया है। आईएमएफ, जो इस प्रणाली की आधारशिला है, ऋणग्रस्त देशों को अलग-थलग करती है और उन्हें द्विपक्षीय वार्ताओं के लिए मजबूर करती है, जिससे ऋण-सरकारी ख़र्च में कटौती की व्यवस्था को चुनौती देने में सक्षम एक सामूहिक मोर्चे के विकास को रोका जा सके। एक ऋण-विरोधी गुट में क़र्ज़ पर अस्थायी रोक के लिए सामूहिक समर्थन, क्षेत्रीय पुनर्वित्तपोषण तंत्र, और बाह्य ऋण दायित्वों पर उत्पादक निवेश को प्राथमिकता देने का साझा सिद्धांत शामिल होगा।
अंतत: सेनेगल का ऋण संकट सिर्फ़ बहीखाते के आँकड़ों का संकट नहीं है। यह अपने आप में विकास की दिशा से जुड़ा है। आईएमएफ का दिखाया रास्ता स्थिरता का वादा तो करता है पर इसका नतीजा सिर्फ़ और सिर्फ़ ठहराव है। यहाँ जो विकल्प दिए गए हैं वे ज़्यादा अनिश्चित हैं, राजनीतिक रूप से अधिक प्रयासों की माँग करते हैं और सीधी लड़ाई की ओर ले जाते हैं। लेकिन इनके ज़रिए संभावना का एक नया फ़लक खुलता है: ऐसा फ़लक जिसमें ऋण चुकाने के दबाव के बजाय विकास, आर्थिक नीति की बुनियाद बनता है।
1955 में इक्कीस अफ्रीकी और एशियाई देश इंडोनेशिया के बांडुंग शहर में इकट्ठा हुए थे। सेनेगल के कवि डेविड डीयोप (1927-1960) ने ख़ूबसूरत शोकगीत ‘Afrique, mon Afrique’ (अफ़्रीका, मेरे अफ़्रीका) लिखा जो उन्होंने Présence Africaine में छपवाया। यह कविता सेनेगल के हर शहर में हर रेड बुक्स डे को दोहराई जानी चाहिए:
अफ़्रीका, मेरे अफ़्रीका।
सवाना के पुराने योद्धाओं के गौरवशाली अफ़्रीका।
मेरी दादी के गीतों के अफ़्रीका।
उनकी नदी के सुदूर किनारे से
मैंने देखा है तुम्हें।
पर मुझे नज़र सिर्फ़ तुम्हारा ख़ून आया।
मैदानों में फैला तुम्हारा ख़ूबसूरत स्याह ख़ून।
तुम्हारे पसीने का ख़ून।
तुम्हारी मेहनत का ख़ून।
ग़ुलाम मेहनत।
तुम्हारे ग़ुलाम बनाए गए बच्चे।
अफ़्रीका, मेरे अफ़्रीका:
क्या ये तुम्हारी कमर है,
जो ज़िल्लत के बोझ से दबी हुई है,
दर्द से कराहती, लाल दागों वाली तुम्हारी पीठ,
जो सड़कों पर चाबुक की मार पर हाँ कह उठती है?
एक संजीदा आवाज़ ने मुझे जवाब दिया:
मेरे उतावले बच्चे, वो मज़बूत और जवान पेड़,
वो जो वहाँ खड़ा है,
अकेले शानदार, सफ़ेद और धुँधले पड़ते फूलों के बीच –
वो है अफ़्रीका, तुम्हारा अफ़्रीका,
फिर से उगता, धैर्य से, ज़िद से,
और इसके फल धीरे-धीरे,
देंगे आज़ादी का खट्टा स्वाद।
स्नेह सहित,
विजय
पुनश्च: इस न्यूज़लेटर में शामिल छवियाँ सेनेगल के कलाकार मंसूर सिस कनाकासी (जन्म 1957) की 2025 की चित्र-श्रृंखला गोंडवाना ला फैब्रिक दु फ्यूचर (गोंडवाना: द फैक्ट्री ऑफ द फ्यूचर) से ली गई हैं, जो प्रागैतिहासिक महाद्वीप गोंडवाना और अब्दियास नैसिमेंटो के क्विलोम्बिस्मो विचार पर आधारित है। इस परियोजना में शामिल ‘अफ्रीकी-क्विलोम्बो’ बैंकनोट काल्पनिक क्विलोम्बो बैंक, पैन-अफ्रीकनिज़्म के बैंक द्वारा जारी किए गए हैं।