वेनेजुएला के मामले में कितने अंतर्राष्ट्रीय क़ानून तोड़कर भी बच सकता है यूएस? : दूसरा न्यूज़लेटर (2026)
वेनेजुएला में यूएस की कार्रवाई ने दर्शा दिया कि वॉशिंगटन किस तरह अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों और संप्रभुता की धज्जियाँ उड़ाता है।
एफयूबीडब्ल्यू, दमासो ओगाज़, 1968
प्यारे दोस्तो,
ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।
3 जनवरी के शुरुआती घंटों में संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) ने वेनेजुएला में अपनी सेना भेजी और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी तथा राष्ट्रीय असेम्बली में डिप्टी पद संभालने वालीं सिलिया फ़्लोरेस का अपहरण कर लिया, साथ ही पूरे कराकस शहर में नागरिक और सैन्य जगहों पर बमबारी की। मादुरो और फ़्लोरेस दोनों पर ‘नशे द्वारा आतंकवाद’ फैलाने और इसी से जुड़े अन्य आरोपों में अभियोग लगाया गया है। वे दोनों न्यूयॉर्क में क़ैद हैं और 5 जनवरी 2026 को मैनहैटन के फ़ेडरल कोर्ट में पहली बार पेश किए गए।
ज़ाहिर है कि वेनेजुएला पर यूएस के इस हमले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 को नहीं हुई। वेनेजुएला की बोलिवेरियन प्रक्रिया के ख़िलाफ़ यह दोहरा युद्ध शुरू हुआ था 2001 में जब ऑर्गैनिक लॉ ऑफ़ हाइड्रोकार्बन्स पारित हुआ था। यह शावेज़ द्वारा घोषित और राष्ट्रीय असेम्बली द्वारा स्वीकृत उनचास क़ानूनों में से एक था। वेनेजुएला के इस नए क़ानून से तेल की बड़ी कंपनियों -जिनमें ज़्यादातर यूएस की थीं- को नुक़सान हुआ क्योंकि इसके बाद से तेल से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा सरकार सामाजिक कार्यक्रमों और देश के विकास में लगा सकती है। तेल की बड़ी कंपनियाँ ख़ासकर ExxonMobil (Exxon) इस क़दम से बहुत ग़ुस्से में थीं और तभी से वे यूएस सरकार के साथ मिलकर न सिर्फ़ वेनेजुएला की सरकार गिराने की कोशिशों में लगी थीं, बल्कि पूरी बोलिवेरियन प्रक्रिया को ही तबाह कर देना चाहती हैं। पिछले पच्चीस सालों से, आर्थिक, राजनीतिक, सूचना, और यहाँ तक की सोशल मीडिया के ज़रिए छेड़ा गया यह दोहरा युद्ध वेनेजुएला के लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। 2026 की शुरुआत ही में वेनेजुएला पर हुआ ग़ैर-क़ानूनी हमला और राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया जाना दक्षिण अमेरिकी देशों के लोगों के ख़िलाफ़ जारी इस लंबे और निरंतर युद्ध का ही एक हिस्सा है।
Cambiar la vida, transformar la sociedad (वक़्त बदलो, समाज बदलो), El Techo de la Ballena (आर्टिस्ट कलेक्टिव), 1963
वेनेजुएला पर हुआ यह हमला ग़ैर-क़ानूनी कैसे है? यूएस अंतर्राष्ट्रीय क़ानून की धज्जियाँ उड़ाता रहता है हालाँकि वह ‘नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था’ की बात करता है। 3 जनवरी को वेनेजुएला पर हमला कर यूएस ने जिन अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों को तोड़ा उन पर नज़र डालना ज़रूरी है।
पहला, ‘अंतर्राष्ट्रीय क़ानून’ से हमारा मतलब उन क़ानूनी बाध्यताओं से है जो राष्ट्र (कुछ मामलों में, अंतर्राष्ट्रीय संगठन और व्यक्ति) अपने आपसी संबंधों पर लागू मानते हैं। इन नियमों के दो प्रमुख स्रोत हैं: संधियाँ (लिखित समझौते) और रिवायती अंतर्राष्ट्रीय क़ानून (ऐसे नियम जो राष्ट्र लगातार प्रयोग करते हैं और उन्हें क़ानून के रूप में मान्यता मिल जाती है)। किसी देश पर कोई संधि तभी लागू होती है जब वह उसे स्वीकार करे या उस पर हस्ताक्षर करे। लेकिन रिवायती अंतरराष्ट्रीय क़ानून और अनिवार्य नियम सभी देशों पर अपने-आप लागू होते हैं, भले ही उन्होंने किसी संधि पर हस्ताक्षर न किए हों। उदाहरण के लिए जनसंहार और दासप्रथा के निषेध संबंधी किसी दस्तावेज़ पर किसी राष्ट्र के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं हैं क्योंकि इन्हें सर्वमान्य मूलभूत मानदंड के रूप में मान्यता मिली हुई है जो एक अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के रूप में सभी राज्यों पर लागू हैं। दूसरे शब्दों में कुछ क़ानून इतने बुनियादी होते हैं कि कोई भी राष्ट्र उन्हें मानने से मना नहीं कर सकता। मैं आगे जिन बाध्यताओं के बारे में ज़िक़्र करूँगा वे इन दोनों स्रोतों से आयी हैं: संधियाँ (जैसे यूएन चार्टर) और रिवायती अंतर्राष्ट्रीय क़ानून (हस्तक्षेप-विरोधी और राष्ट्र प्रमुख की विशेषाधिकार सुरक्षा सहित), कई बार अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे, राष्ट्रों के आपसी मामले सुलझाने के लिए यूएन का सर्वोच्च न्यायालय) इनकी व्याख्या और प्रयोग करता है जिसके फैसलों को यह स्पष्ट करने में विशेष अधिकार प्राप्त है कि व्यवहार में अंतरराष्ट्रीय क़ानून क्या अपेक्षा करता है।
- धमकी या बल के प्रयोग का निषेध: दो ऐसी संधियाँ हैं जिनके तहत यूएस दूसरे देशों के ख़िलाफ़ बल का प्रयोग नहीं कर सकता:
- Tसबसे महत्त्वपूर्ण है 1945 का संयुक्त राष्ट्र चार्टर, इसका अनुच्छेद 2(4) कहता है कि सभी राष्ट्रों को दूसरे राष्ट्रों के ख़िलाफ़ ‘धमकी या बल प्रयोग’ करने से बचना चाहिए। इस नियम के चंद अपवाद हैं, जैसे अगर यूएन सुरक्षा परिषद यूएन चार्टर के अध्याय VII (अनुच्छेद 39-40) के तहत यह माने कि ‘शांति को ख़तरा है, शांति भंग हो रही है या कोई आक्रामक कार्रवाई की जा रही है’ और ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बरकरार रखने या उसकी रक्षा के लिए’ बल प्रयोग को स्वीकृति दे दे, या फिर कोई राष्ट्र अपनी रक्षा के लिए बल प्रयोग करे। चूँकि इनके अलावा कोई और अपवाद नहीं हैं इसलिए वेनेजुएला के ख़िलाफ़ यूएस की आक्रामकता साफ़तौर से यूएन चार्टर का उल्लंघन है, यानी राष्ट्रों के आपसी मामलों में सबसे बड़ी संधि का उल्लंघन।
- लैटिन अमेरिका में 1948 का अमेरिकी राष्ट्रों के संगठन का चार्टर (ओएएस) भी लागू है जिसके अनुच्छेद 21 में कहा गया है कि ‘किसी राष्ट्र की सीमाओं का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता’ और एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र पर ‘सैन्य क़ब्ज़ा’ या ‘बल प्रयोग’ की अनुमति नहीं है। ओएएस चार्टर यूएन चार्टर का अनुसरण करता है जिसका अनुच्छेद 103 स्पष्ट करता है कि जहाँ संधि दायित्वों में टकराव हो वहाँ सदस्यों के यूएन चार्टर के तहत दायित्व किसी भी अन्य अंतर्राष्ट्रीय समझौते के दायित्वों पर प्राथमिकता रखते हैं।
यूएस की इन हरकतों के ख़िलाफ़ यूएन और ओएएस में अब तक प्रस्ताव पारित हो जाने चाहिए थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इससे राष्ट्रों के पारस्परिक संबंधों की व्यवस्था की कमज़ोरी कम दिखती है और दुनिया में यूएस का एक माफ़िया की तरह बर्ताव करना ज़्यादा दिखता है।
Composición IV (कॉम्पज़िशन IV), ऑज़्वॉल्डो विगास, 1943
- राष्ट्र के आंतरिक या बाहरी मामलों में हस्तक्षेप की मनाही: यूएन चार्टर के अनुच्छेद 2(7) में हर राष्ट्र की संप्रभुता की प्रमुखता पर बल देते हुए साफ़ किया गया है कि यह चार्टर किसी भी सूरत में संयुक्त राष्ट्र को किसी राष्ट्र के ‘अहम घरेलू अधिकारक्षेत्र’ के मामलों में दख़ल देने का अधिकार नहीं देता (सिवाय अध्याय VII में दिए गए प्रावधानों के)। किसी राष्ट्र के मामलों में किसी दूसरे राष्ट्र द्वारा हस्तक्षेप की मनाही ओएएस चार्टर के अनुच्छेद 19 में स्पष्ट की गयी है। यह कहता है कि किसी भी राष्ट्र को किसी दूसरे राष्ट्र के आंतरिक और विदेशी मामलों में ‘किसी भी कारण से, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, दख़ल देने का अधिकार नहीं है’, और इसमें सैन्य हमला और राष्ट्र प्रमुख को क़ैद करने जैसे हर तरह के ‘हस्तक्षेप का प्रकार’ शामिल है।
यूएन चार्टर और ओएएस चार्टर दोनों संधियाँ है और रिवायती अंतर्राष्ट्रीय क़ानून इन्हें मज़बूत करते हैं जो स्वतंत्र रूप से हस्तक्षेप पर प्रतिबंध लगाते हैं। 1986 के निकारागुआ बनाम यूनाइटेड स्टेट्स मामले में – जो वाशिंगटन द्वारा कॉन्ट्रा युद्ध और निकारागुआ के बंदरगाहों में खनन के समर्थन को लेकर दायर किया गया था – अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने हस्तक्षेप न करने के रिवायती कानून सिद्धांत की पुष्टि की और बल प्रयोग तथा आत्मरक्षा (आवश्यक एवं आनुपातिक) के नियमों को लागू किया। वेनेजुएला सरकार को सत्ता से हटाने के अमेरिका के प्रत्यक्ष प्रयास, 2002 के असफल तख़्तापलट के प्रयास से लेकर 2026 में राष्ट्रपति मादुरो और सिलिया फ्लोरेंस के अपहरण तक, इन सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन हैं। इसी प्रकार, अमेरिका द्वारा सशस्त्र प्रयासों को संगठित करने में दी गई सहायता – जैसे ऑपरेशन गिडियन (2020), जिसमें अमेरिका ने वेनेजुएला सरकार पर हमला करने के लिए भाड़े के सैनिकों के लिए आर्थिक संसाधन दिए – भी इन सिद्धांतों का समान रूप से उल्लंघन है।
El derrame (रिसाव), रोलांडो पेन, 1997
- राष्ट्र प्रमुख के सुरक्षा के विशेषाधिकार का उल्लंघन: जब कोई राष्ट्र किसी विदेशी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष पर अंतर्राष्ट्रीय कानून के विपरीत जाकर – उन्हें गिरफ़्तार करके, अभियोग चलाकर, नज़रबंद करके या अन्य ज़बर्दस्ती अधिकार का प्रयोग करके – आपराधिक, नागरिक या प्रवर्तन अधिकार क्षेत्र का दावा करता है, तो यह राष्ट्राध्यक्ष सुरक्षा के विशेषाधिकार का उल्लंघन है। यह एक ऐसा नियम है जिसे यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है कि राज्य विदेशी अदालतों द्वारा एक-दूसरे के शीर्ष अधिकारियों को हिरासत में लिए बिना संबंध बनाए रख सकें। सीधे शब्दों में कहें: एक नियम के रूप में, कोई विदेशी घरेलू अदालत किसी वर्तमान राष्ट्राध्यक्ष को तब तक क़ानूनी तौर पर गिरफ़्तार नहीं कर सकती या मुक़दमा नहीं चला सकती, जब तक कि उस व्यक्ति के राज्य द्वारा उसे मिला सुरक्षा का विशेषाधिकार वापस न ले लिया जाए। कोई स्वतंत्र संधि मौजूद नहीं है, जो इस विशेषाधिकार को एक जगह संहिताबद्ध करती हो, लेकिन यह रिवायती अंतर्राष्ट्रीय कानून में सुस्थापित है और कई दस्तावेज़ों तथा निर्णयों में दिखता है। उदाहरण के लिए, विशेष अभियानों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (1969) कहता है कि एक राष्ट्राध्यक्ष जो किसी विशेष अभियान का नेतृत्व करता है, ‘वह अंतर्राष्ट्रीय कानून द्वारा राष्ट्राध्यक्षों को प्रदत्त सुविधाओं, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का… लाभ लेगा‘। राजनयिक संबंधों पर वियना संधि (1961) अलग से मान्यताप्राप्त राजनयिक एजेंटों के लिए राजनयिक सुरक्षा के विशेषाधिकार को संहिताबद्ध करती है, जो आधिकारिक प्रतिनिधियों की अनुल्लंघनीयता के व्यापक अंतर्राष्ट्रीय कानून सिद्धांत को दर्शाता है। सबसे महत्वपूर्ण रूप से, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो बनाम बेल्जियम (2002) – जिसे ‘गिरफ्तारी वारंट मामले‘ के नाम से जाना जाता है और बेल्जियम द्वारा कांगो के वर्तमान विदेश मंत्री के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय वारंट जारी करने के बाद दायर किया गया था – में माना कि वर्तमान विदेश मंत्री को अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत ‘आपराधिक अधिकार क्षेत्र से उन्मुक्ति‘ और ‘अनुल्लंघनीयता‘ प्राप्त थी, और बेल्जियम का गिरफ्तारी वारंट उन दायित्वों का उल्लंघन करता था।
अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में एक प्रमुख अपवाद है जो अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के अंतर्गत काम करता है, जो व्यक्तियों पर अभियोग चलाता है (आईसीजे की तरह राष्ट्रों पर नहीं)। आईसीसी के रोम अधिनियम के अनुच्छेद 27 के अनुसार ‘राष्ट्र या सरकार प्रमुख’ के रूप में कार्यरत होने से कोई अधिकारी इस अधिनियम के तहत निर्धारित ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं है और सुरक्षा के विशेषाधिकार ‘इस न्यायालय को अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले दायित्वों का पालन करने से रोक नहीं सकते’। अगर किसी देश के न्यायालय किसी व्यक्ति पर गंभीर अंतर्राष्ट्रीय अपराधों के लिए मुक़दमा नहीं चला पाते या चलाना नहीं चाहते तो रोम अधिनियम के अंतर्गत आईसीसी उस व्यक्ति पर मुक़दमा चला सकता है। इन अपराधों में शामिल है – जनसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामक अपराध। इसलिए पद पर विद्यमान राष्ट्र प्रमुखों के ख़िलाफ़ आईसीसी वारंट जारी कर सकता है। आईसीसी द्वारा इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहु के ख़िलाफ़ जो वारंट जारी किया गया उसके पीछे यही क़ानूनी समझ थी।
ट्रम्प के हिंसक हमले ने सिर्फ़ अंतर्राष्ट्रीय कानून का ही उल्लंघन नहीं किया है, बल्कि इन्हें लेकर यूएस के अंदरूनी क़ानून के तहत भी कुछ सवाल उठे हैं। 1973 का वॉर पॉवर्स रेज़लूशन के अंतर्गत यूएस राष्ट्रपति को यूएस सेना को किसी दूसरे राष्ट्र के साथ किसी तनाव की स्थिति में डालने के ‘हर मामले’ से पहले अमेरिकी कांग्रेस से सलाह लेनी होती है, यदि वे ऐसा न कर पाएँ तो अड़तालीस घंटे के अंदर-अंदर कांग्रेस को रिपोर्ट करना होता है, और अगर कांग्रेस से स्वीकृति नहीं मिलती तो छह दिनों के भीतर टकराव को ख़त्म करना होता है। वॉशिंगटन ने जितना अपमान अंतर्राष्ट्रीय क़ानून का किया है उतना ही देश के क़ानून का भी।
5 जनवरी को अपने ख़िलाफ़ न्यायालय में आरोप सुनाए जाने के दौरान मादुरो ने कहा ‘मैं एक युद्ध क़ैदी हूँ’। यह वक्तव बिलकुल सही है। मादुरो और फ़्लोरेस सिर्फ़ और सिर्फ़ राजनीतिक कारणों से क़ैद किए गए। यह राजनीतिक कारण था – वॉशिंगटन का वैश्विक दक्षिण के ख़िलाफ़ लंबे समय से जारी युद्ध।
मैं जेल में बंद मादुरो के बारे में सोच रहा हूँ। मादुरो – एक पूर्व बस चालक और मज़दूर संगठन कार्यकर्ता, एक शख़्स जो समाजवाद से अपने श्रमिक संगठन से जुड़े कार्यकर्ता पिता और कैथलिक माँ की वजह से जुड़ा, एक राष्ट्रपति जो राष्ट्रपति नहीं बनना चाहता था। मादुरो ने एक बार मुझसे कहा था ‘इतिहास ने मुझे इस राष्ट्रपति की कुर्सी पर किसी को खुश करने के लिए नहीं बल्कि अपने देश और समाजवाद की रक्षा के लिए बैठाया है’। मैं फ़्लोरेस के बारे में सोचता हूँ, एक नौजवान वकील के रूप में उन्होंने 1992 के विद्रोह के बाद हूगो शावेज़ का मुक़दमा लड़ने में मदद की और 1994 में उन्हें जेल से रिहा कराया। मैं उन्हें देख सकता हूँ, वे महान अलि परिमेरा के 1977 का वह गीत गुनगुना रहे हैं जो आगे चलकर चविस्मो (शावेज़ के विचारों पर चलने वाले) का गीत बन गया: ‘Los que mueren por la vida’ (जो ज़िंदगी के लिए मरते हैं):
जो मरते हैं ज़िंदगी के लिए
मृत नहीं कहलाते
और इस पल से ही
उनके लिए आँसू बहाना मना हैहर मीनार पर लगे घंटे को
ख़ामोश रहने दोचलो, कॉमरेड – कराख़ो* –
सुबह से मिलने के लिए
हमें सोए उल्लुओं की नहीं
चिल्लाते मुर्ग़ों की ज़रूरत हैवे हमारे लिए कोई ऐसा झंडा नहीं बनेंगे
जिसमें लिपटकर हम महफ़ूज़ रहें
और जो यह परचम लहरा नहीं कर सकता
उसे संघर्ष से बाहर हो जाना चाहिएयह पीछे हटने का वक़्त नहीं
न ही पुराने दिनों की याद में जीने कागीत गाओ, कॉमरेड –
अपनी आवाज़ को गोली का काम करने दो
कि जनता के हाथों का हथियार बनने से
कोई गीत बचने न पाएगीत गाओ, कॉमरेड…
गीत गाओ, कॉमरेड…
गीत गाओ, कॉमरेड…
अपने गीत को ख़ामोश न होने दोअगर तुम्हारे पास साधन नहीं
तब भी दिल तो है
जो एक ढोलक की ताल पर बजता है
जिसका रंग पुरानी शराब जैसा हैसंघर्ष का तुम्हारा क्वेका**
दक्षिणी हवा पर सवार आता हैगीत गाओ, कॉमरेड…
गीत गाओ, कॉमरेड…गाओ, गाओ, कॉमरेड –
अपनी आवाज़ को गोली का काम करने दो
कि जनता के हाथों का हथियार बनने से
कोई गीत बच न पाएगीत गाओ, कॉमरेड…
गीत गाओ, कॉमरेड…
गीत गाओ, कॉमरेड…
स्नेह सहित,
विजय
*(ग़ुस्सा, आश्चर्य आदि प्रकट करने का एक स्पैनिश शब्द, जिसे आक्रामक या अशिष्ट भी माना जाता है)
**(एक लैटिन अमेरिकी नृत्य)