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P.S. Jalaja (India), We Surely Can Change the World, 2021.

पी.एस. जलजा (भारत), हम निश्चित रूप से दुनिया को बदल सकते हैं, 2021.

 

प्यारे दोस्तों,

ट्राइकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।

यह साल मिला जुला रहा। कुछ जीत ख़ुशियाँ लेकर आईं तो कुछ हार बहुत ही विनाशकारी साबित हुई, कोविड-19 से लड़ने के लिए लोकतांत्रिक रवैया अपनाने में उत्तरी गोलार्ध के देशों की विफलता तथा जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरणों से लेकर टीके जैसे प्रमुख संसाधनों को सभी के लिए उपलब्ध कराने में नाकामी सबसे भयावह रही। दुख की बात है कि इस महामारी के अंत तक हम ग्रीक वर्णमाला के अक्षरों (डेल्टा, ओमिक्रोन) के नाम सीख चुके होंगे, जिनके नाम पर कोरोना के नये उभरते रूपों के नाम रखे गए हैं।

क्यूबा अपनी आबादी के साथ-साथ वेनेज़ुएला से लेकर वियतनाम तक के देशों की रक्षा के लिए अपने स्वदेशी टीकों का उपयोग करके उच्चतम टीकाकरण दरों के साथ दुनिया को नयी दिशा दे रहा है, चिकित्सा एकजुटता का क्यूबा का लंबा इतिहास रहा है। सबसे कम टीकाकरण दर वाले देश – वर्तमान में बुरुंडी, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, हैती, दक्षिण सूडान, चाड और यमन इस मामले में सबसे आगे हैं – दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में से हैं, ये विदेशी सहायता पर निर्भर हैं क्योंकि उनके संसाधन की निश्चित रूप से चोरी हो गई है, बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बहुत ही कम क़ीमतों पर इनका अधिग्रहण कर लिया गया है। 15 दिसंबर 2021 तक बुरुंडी के 1.2 करोड़ लोगों में से सिर्फ़ 0.04% का टीकाकरण हुआ था, टीकाकरण की वर्तमान दर से जनवरी 2111 तक केवल 70% लोगों को टीका लग पाएगा।

मई 2021 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने कहा कि ‘दुनिया वैक्सीन रंगभेद का सामना कर रही है’। तब से चीज़ें थोड़ी बदली हैं। नवंबर के अंत में, अफ़्रीकी संघ के वैक्सीन वितरण सह-अध्यक्ष डॉ. अयोदे अलकिजा ने दक्षिणी अफ़्रीका में ओमिक्रॉन के उद्भव के बारे में कहा, ‘अभी जो कुछ हो रहा है वह अपरिहार्य है। यह न्यायसंगत, अत्यावश्यक और त्वरित तरीक़े से टीकाकरण करने में दुनिया की विफलता का परिणाम है। दुनिया के उच्च आय वाले देशों द्वारा [वैक्सीन] जमाख़ोरी के परिणामस्वरूप ऐसा हुआ है, और स्पष्ट रूप से यह अस्वीकार्य है’। दिसंबर के मध्य में, घेब्रेयसस ने अलकिजा को कोविड-19 टूल एक्सेलेरेटर तक पहुँच बनाने के लिए WHO का विशेष दूत नियुक्त किया। उनका काम आसान नहीं है, और उनका लक्ष्य तभी पूरा होगा, जैसा कि वो कहती हैं, ‘मुंबई में एक जीवन उतना ही मायने रखता हो जितना कि ब्रसेल्स में, अगर साओ पाउलो में एक जीवन जितना मायने रखता हो जितना कि जिनेवा में, और यदि हरारे में जीवन उतना ही मायने रखता हो जितना कि वाशिंगटन डीसी में’।

 

Addis Gezehagn (Ethiopia), Floating City XVIII, 2020.

एडिस गेज़ेहगन (इथियोपिया), फ़्लोटिंग सिटी XVIII, 2020.

 

वैक्सीन रंगभेद चिकित्सा रंगभेद की एक व्यापक समस्या का एक हिस्सा है, हमारे समय के चार रंगभेदों में से एक है, अन्य हैं खाद्य रंगभेद, धन रंगभेद और शिक्षा रंगभेद। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन की एक नयी रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़्रीका में कुपोषित लोगों की संख्या में 2014 से 891 करोड़ की वृद्धि हुई है, जो 2020 में 2816 करोड़न तक पहुँच गई है। मानवता के बारे में डॉ. अलकिजा के प्रश्न पर विचार करना सार्थक है, विभिन्न मनुष्यों के मूल्य के बारे में: क्या हरारे में रहने वाले व्यक्ति के जीवन को वाशिंगटन डीसी में रहने वाले व्यक्ति के जीवन के समान महत्व दिया जा सकता है? क्या हम, एक व्यक्ति के रूप में, इन रंगभेदों को दूर कर सकते हैं और हमारे ग्रह के लोगों के सामने उपस्थित प्राथमिक समस्याओं को हल कर सकते हैं और उन बर्बर तरीक़ों को समाप्त कर सकते हैं जिनमें वर्तमान आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था मानव जाति और प्रकृति पर अत्याचार करती है?

ऐसा प्रश्न उन लोगों के लिए बहुत मासूम लगता है जो भूल गए हैं कि किसी चीज़ पर विश्वास करने का क्या अर्थ है – यदि स्वयं मानवता के विचार में नहीं, तो कम-से-कम बाध्यकारी संयुक्त राष्ट्र चार्टर (1945) और आंशिक रूप से बाध्यकारी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणापत्र (1948) पर ही विश्वास करना चाहिए। घोषणापत्र हमें व्यक्ति के रूप में एक-दूसरे की ‘अंतर्निहित गरिमा’ को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध होने का आह्वान करता है, एक ऐसा मानक जो पिछले कुछ वर्षों में सरकारों के प्रमुखों द्वारा अंतिम मसौदे पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से ध्वस्त हो गया है।

 

Nougat, The Sniper of Kaya, 2021, courtesy of BreakThrough News.

नौगट, द स्निपर ऑफ़ काया, 2021, ब्रेकथ्रू न्यूज़ के सौजन्य से.

 

इन रंगभेदों के बावजूद मानव जाति की कई उपलब्धियाँ हैं जिन्हें रेखांकित किया जाना चाहिए:

  1. चीन ने अत्यधिक ग़रीबी का उन्मूलन किया है, पिछले आठ वर्षों में लगभग 10 करोड़ लोगों ने ख़ुद को बदहाली से बाहर निकाला है। ‘स्टडीज़ इन सोशलिस्ट कंस्ट्रक्शन’ शृंखला में हमारा पहला अध्ययन, सर्व द पीपल: द इरैडिकेशन ऑफ़ एक्सट्रीम पॉवर्टी इन चाइना शीर्षक से प्रकाशित हुआ है, जिसमें बताया गया है कि यह उल्लेखनीय उपलब्धि कैसे हासिल की गई।
  2. भारतीय किसानों ने बहादुरी से उन तीन क़ानूनों को रद्द करने के लिए लड़ाई लड़ी, जो उनके काम करने की परिस्थितियों को ख़तरे में डालने वाला था, और – एक साल के संघर्ष के बाद – वे जीत गए। यह कई सालों में मज़दूरों की सबसे बड़ी जीत है। हमारे जून के डोज़ियर, भारत में किसान विद्रोह ने पिछले एक दशक में भारत में भूमि पर संघर्ष और किसानों के प्रतिरोध को सूचीबद्ध किया है।
  3. 1973 (चिली) से लेकर 2009 (होंडुरास) और उसके बाद 2019 (बोलीविया) तक होने वाले तख़्तापलट के इतिहास को पलटते हुए बोलीविया, चिली और होंडुरास में वामपंथी सरकारें सत्ता में आईं। एक साल पहले, जनवरी में प्रकाशित डोजियर, साँझ में वैश्विक मामलों पर अमेरिकी नियंत्रण के क्षरण और एक बहुध्रुवीय दुनिया के उद्भव पर विचार किया गया था। इन देशों में अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में संयुक्त राज्य की विफलता और हाइब्रिड युद्धों के माध्यम से क्यूबा क्रांति और वेनेज़ुएला की क्रांतिकारी प्रक्रिया को उखाड़ फेंकने में नाकाम रहना अमेरिकी गोलार्ध में लोगों के लिए बड़ी संभावना का संकेत है। रुझान बताते हैं कि 2022 में लूला दा सिल्वा ब्राज़ील में दक्षिणपंथ के किसी भी उम्मीदवार को हरा देंगे, और जायर बोल्सोनारो के शासन के अत्याचार की समाप्ति होगी। हमारा मई का डोजियर, ब्राज़ील के वामपंथियों के सामने उपस्थित चुनैतियाँ, में लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश की राजनीतिक दुविधाओं के बारे में पढ़ा जा सकता है।
  4. संयुक्त राज्य अमेरिका और फ़्रांस की बढ़ती सैन्य उपस्थिति के ख़िलाफ़ अफ़्रीकी महाद्वीप पर ग़ुस्से का लावा बुर्किना फ़ासो के पश्चिमी भाग में काया शहर में फूट पड़ा। जब नवंबर में एक फ़्रांसीसी सैन्य काफ़िला शहर के पास पहुँचा, तो प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने उसे रोक दिया। उस समय, फ़्रांस ने भीड़ पर नज़र रखने के लिए एक निगरानी ड्रोन लॉन्च किया था। अलिउ सावाडोगो (उम्र 13) ने अपने गुलेल से ड्रोन को मार गिराया, जीन अफ्रिके ने लिखा, ‘फ़्रांसीसी गोलियथ के ख़िलाफ़ एक बुर्किनाबे डेविड’। हमारा जुलाई डोजियर, संप्रभुता की रक्षा: अफ़्रीका में मौजूद संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन्य ठिकाने और अफ़्रीकी एकता का भविष्य, जो सोशलिस्ट मूवमेंट ऑफ़ घाना के शोध समूह को साथ मिलकर लिखा गया है, में महाद्वीप में पश्चिमी सैन्य उपस्थिति तथा उसके विस्तार को दिखाया गया है।
  5. हमने स्वास्थ्य कर्मियों से लेकर घरेलू कामगारों तक, दुनिया भर में सभी प्रकार के देखभाल कर्मियों द्वारा की जाने वाली हड़तालें देखी हैं। नवउदारवाद की क्रूरता और जिसे हम कोरोनाशॉक कहते हैं, उसने इन मज़दूरों पर गहरी चोट की है। लेकिन इन कार्यकर्ताओं ने झुकने से इनकार कर दिया, अपनी गरिमा को त्यागने से इनकार कर दिया। हमारा मार्च महीने का डोजियर, संकट को उजागर करना: कोरोनावायरस के समय में देखभाल कार्य इन श्रमिकों पर पड़ने वाले भार का विश्लेषण करता है तथा उनके संघर्षों के लिए एक खिड़की खोलता है।

 

Harrison Forman (US), Afghanistan, men surrounding storyteller in K abul market, 1953.

हैरिसन फ़ॉरमैन (यूएस), अफ़ग़ानिस्तान, काबुल बाजार में कथावाचक के आसपास इकट्ठा लोग, 1953.

 

बेशक, यह एक संपूर्ण सूची नहीं है। ये केवल प्रगति के कुछ मानक हैं। सभी प्रकार की प्रगति के बारे में स्पष्ट रूप से नहीं कहा जासकता। बीस वर्षों के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका को अंततः अफ़ग़ानिस्तान से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि वह तालिबान से युद्ध हार गया। इस युद्ध से संयुक्त राज्य अमेरिका अपना कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया, और फिर भी इसने देश के करीब 3.9 करोड़ लोगों के सामने भुखमरी का संकट पैदा कर दिया। संयुक्त राज्य अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान को अपने 9.5 अरब डॉलर के बाहरी भंडार तक पहुँचने से रोक दिया है जो अमेरिकी बैंकों में है, और साथ ही इसने अफ़ग़ानिस्तान की सरकार को संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में अपना स्थान लेने से भी रोक रखा है। विदेशी सहायता की समाप्ति के परिणामस्वरूप, जो पिछले साल अफ़ग़ानिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद का 43% था, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम का आकलन है कि इस वर्ष देश की जीडीपी में 20% और उसके बाद के वर्षों में 30% की गिरावट आएगी। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का अनुमान है कि 2022 तक देश की प्रति व्यक्ति आय 2012 के स्तर से लगभग आधी हो सकती है। यह अनुमान है कि अफ़ग़ानिस्तान की 97% आबादी ग़रीबी रेखा से नीचे चली जाएगी, इस सर्दी में बड़े पैमाने पर भुखमरी की वास्तविक संभावना है। वखान कॉरिडोर में जान की क़ीमत उतनी नहीं है, जितनी कि लंदन में है। मनुष्य की ‘अंतर्निहित गरिमा’ – जैसा कि संयुक्त राष्ट्र की घोषणा में कहा गया है – को बरक़रार नहीं रखा गया है।

यह केवल अफ़ग़ानिस्तान का मामला नहीं है। नयी जारी विश्व असमानता रिपोर्ट 2022 से पता चलता है कि दुनिया के सबसे ग़रीब आधे लोगों के पास कुल निजी संपत्ति का केवल 2% (व्यापार और वित्तीय संपत्ति, ऋण, अचल संपत्ति का शुद्ध) है, जबकि सबसे अमीर 10% के पास कुल निजी संपत्ति का 76% स्वामित्व है। लिंग असमानता इस असमानता में और वृद्धि करता है, क्योंकि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को श्रम आय का बमुश्किल 35% प्राप्त होता है, जबकि पुरुषों को 65% प्राप्त होता है (1990 के बाद आँकड़ों में थोड़ा सुधार हुआ है, तब महिलाओं का हिस्सा 31% था)। यह असमानता वर्गीय आधार पर और लिंग तथा राष्ट्रीयता के पदानुक्रम के साथ लोगों को प्रदान की जाने वाली विभेदक गरिमा को मापने का एक और तरीक़ा है।

 

 

1959 में, ईरानी कम्युनिस्ट कवि सियावश कसराई ने अपना एक गीत, अराश-ए कमानगीर लिखा था। अपने देश को आज़ाद कराने के लिए वीर धनुर्धर अराश द्वारा लड़े गए प्राचीन युद्ध की लोकप्रिय पौराणिक कथाओं का उपयोग करते हुए, कसराई अपने समय के साम्राज्यवाद-विरोधी संघर्षों को दर्शाते हैं। लेकिन कविता केवल संघर्षों के बारे में नहीं है, क्योंकि हम संभावनाओं के बारे में भी सोचते हैं:

मैंने तुमसे कहा था कि जीवन सुंदर है।

कहा और अनकहा, यहाँ बहुत कुछ है।

साफ़ आसमान;

सुनहरा सूरज;

फूलों के बाग़;

असीम मैदान;

 

बर्फ़ से झाँकते फूल;

साफ़ पानी में नाचती मछली का कोमल झूला;

पहाड़ पर बरसती धूल की महक;

चाँदनी के वसंत में गेहूँ के खेतों की नींद;

आना, जाना, दौड़ना;

प्यार करना;

मानव जाति के लिए विलाप करने के लिए;

और भीड़ की ख़ुशियों में हाथ बँटाने के लिए।

2022 की हार्दिक क्रांतिकारी शुभकामनाएँ,

विजय