न्यूज़लेटर

अक्टूबर / 2026

चीन की वैश्विक पहल दुनिया को क्या दे सकती हैं: बयालीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

युद्ध, ऋण, कॉर्पोरेट शक्ति और तकनीकी निर्भरता के बीच, पाँच चीनी प्रस्ताव शांति और संप्रभुता से जुड़े लंबे समय से दबाए गए प्रश्न को फिर से खोलते हैं।
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युद्धविराम के बावजूद फ़िलिस्तीन पर इज़राइल की हिंसा जारी: इकतालीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

फ़िलिस्तीन पर हमला बमबारी तक सीमित नहीं। बुनियादी ढाँचे का विनाश, फ़िलिस्तीनी धन पर इज़राइली नियंत्रण और रंगभेदी व्यवस्था में पश्चिमी कॉर्पोरेट की मिलीभगत – इसका हिस्सा हैं।
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खनिज हड़पने की ट्रम्प की नई चाल: चालीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

महत्त्वपूर्ण खनिजों पर क़ब्ज़े की साम्राज्यवादी होड़ बढ़ी है। सैन्य और औद्योगिक ज़रूरतों के बहाने ग्लोबल साउथ के देशों को पश्चिमी पूँजी पर निर्भर बनाया जा रहा है।
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अन्य न्यूज़लेटर

युवा एक भविष्य चाहते हैं: उनतालीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

युवा आंदोलनों के पीछे एक कड़वा सच है: मौजूदा आर्थिक व्यवस्था पूँजी की रक्षा करते हुए युवाओं से गरिमामय रोज़गार और बेहतर भविष्य का सपना छीन लेती है।
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आधुनिकीकरण का अर्थ पूँजीवाद नहीं है: अड़तीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

वैश्विक दक्षिण में विकास पूँजीवादी पश्चिम के नक़्शेकदम पर चलकर नहीं आएगा। इसके लिए संप्रभुता, समाजवादी योजना और सामाजिक संबंधों में परिवर्तन की ज़रूरत है।
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हम सब ही यहाँ कहीं और से आए हुए हैं: सैंतीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

पूँजीवाद मुनाफ़े के लिए आप्रवासी श्रमिकों का इस्तेमाल करता है; नव-उदारवादी नीतियों से आए संकट से ध्यान भटकाने के लिए इन्हीं के ख़िलाफ़ माहौल भी तैयार करता है।
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वैश्विक दक्षिण को एक औद्योगिक नीति की ज़रूरत क्यों है: छत्तीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

पूँजीवाद वैश्विक दक्षिण को कच्चा माल निकालने और सस्ते निर्यात तक सीमित रखता है। लोकतांत्रिक योजना से निर्भरता टूटेगी और संसाधन सामूहिक आर्थिक शक्ति का रूप लेंगे।
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हम अपनी क्रांतिकारी परंपराओं की जड़ों तक पहुँचते हैं: पैंतीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

साम्राज्यवाद अगर ज्ञान, तकनीक और कला को अधीनता के औज़ार बना सकता है, तो उत्पीड़ित जनता इन्हें अपने हाथ में लेकर मुक्ति के हथियारों में बदल सकती है।
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दास-प्रथा की बुनियाद पर विकसित हुआ पूँजीवाद: चौंतीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

आधुनिक बैंकिंग और औद्योगिक पूँजीवाद वाली पश्चिमी प्रगति के शांतिपूर्ण लगने वाले ऐतिहासिक आविष्कारों की क़ीमत ग़ुलामों ने अपने ख़ून से चुकाई है।
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फ़िदेल से हमने क्या पाया: तैंतीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

फ़िदेल की विरासत हमें सिखाती है कि उपनिवेशवादी लूट से मुक्ति के लिए उत्पादन क्षमता और मानवीय गरिमा ज़रूरी है।
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पहले बनती है फिर प्रकट होती है सामाजिक शक्ति : बत्तीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

सामाजिक बदलाव और गरिमा को युग का सर्वमान्य सिद्धांत बनाने के लिए श्रमिक वर्ग की धैर्यपूर्ण, संगठित क्षमता ही सामाजिक शक्ति है।
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सुर्ख़ियों से ग़ायब होते ही ग़ज़ा पर ख़ामोश हुई दुनिया: इकतीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

ग़ज़ा के नरसंहार की ख़बरों न आना, इस हिंसा का अंत नहीं, बल्कि इसकी यह निरंतरता ही दुनिया को इसकी तरह से उदासीन बना रही है।
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अमेरिकी डॉलर को अलविदा: तीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

डॉलर तटस्थ मुद्रा नहीं बल्कि साम्राज्यवादी सत्ता का एक साधन है जो वैश्विक दक्षिण को अपनी ही अधीनता का खर्च उठाने को विवश करता है।
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वैश्विक दक्षिण से विकास के नए सिद्धांत की परिकल्पना: उनतीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

आईएमएफ़ के पुराने सिद्धांतों सहित वैश्विक उत्तर के विकास के प्रयास असफल हो चुके हैं। अब दक्षिण के अनुभवों पर आधारित नए सिद्धांतों की ज़रूरत है।
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कैसे विश्व खाद्य अर्थव्यवस्था बच्चों की हत्या कर रही है: अट्ठाईसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

खाद्यजनित बीमारियों के कुल मामलों में लगभग एक-तिहाई पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के होते हैं। यह मुनाफ़ा केंद्रित खाद्य अर्थव्यवस्था का परिणाम है।
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