पूँजीवाद वैश्विक दक्षिण को कच्चा माल निकालने और सस्ते निर्यात तक सीमित रखता है। लोकतांत्रिक योजना से निर्भरता टूटेगी और संसाधन सामूहिक आर्थिक शक्ति का रूप लेंगे।
पूर्वी एशिया एक गहरे विरोधाभास से गुज़र रहा है: यह क्षेत्र वैश्विक विकास का इंजन है, लेकिन यूएस साम्राज्यवाद इसे नए शीत युद्ध की रणभूमि बनाना चाहता है।