फ़िलिस्तीन पर हमला बमबारी तक सीमित नहीं। बुनियादी ढाँचे का विनाश, फ़िलिस्तीनी धन पर इज़राइली नियंत्रण और रंगभेदी व्यवस्था में पश्चिमी कॉर्पोरेट की मिलीभगत – इसका हिस्सा हैं।
महत्त्वपूर्ण खनिजों पर क़ब्ज़े की साम्राज्यवादी होड़ बढ़ी है। सैन्य और औद्योगिक ज़रूरतों के बहाने ग्लोबल साउथ के देशों को पश्चिमी पूँजी पर निर्भर बनाया जा रहा है।
वैश्विक दक्षिण में विकास पूँजीवादी पश्चिम के नक़्शेकदम पर चलकर नहीं आएगा। इसके लिए संप्रभुता, समाजवादी योजना और सामाजिक संबंधों में परिवर्तन की ज़रूरत है।
पूँजीवाद मुनाफ़े के लिए आप्रवासी श्रमिकों का इस्तेमाल करता है; नव-उदारवादी नीतियों से आए संकट से ध्यान भटकाने के लिए इन्हीं के ख़िलाफ़ माहौल भी तैयार करता है।
पूँजीवाद वैश्विक दक्षिण को कच्चा माल निकालने और सस्ते निर्यात तक सीमित रखता है। लोकतांत्रिक योजना से निर्भरता टूटेगी और संसाधन सामूहिक आर्थिक शक्ति का रूप लेंगे।