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जुलाई / 2024

एक शांतिमय या पुरसुकून दुनिया बनाना ही एकमात्र यथार्थवादी काम है: अट्ठाईसवाँ न्यूज़लेटर (2024)

इस्ला ग्रांडे में एफ्रो-कोलंबियाई निवासी एक सतत बिजली प्लांट की ज़रूरत पर बहस कर रहे हैं। इनकी यह कोशिश राष्ट्रपति पेट्रो के सौर्य ऊर्जा या सोलर पावर को बढ़ावा देने में भी दिखती है, जिसका उद्देश्य है सतत विकास के विस्तृत क्षेत्रीय लक्ष्यों को पाने के लिए काम करना। विकास और जलवायु अनुकूलन के लिए धन की ज़रूरत है - वो धन जो युद्ध पर खर्च किया जा रहा है। दुनिया का सैन्य खर्च 3 ट्रिल्यन डॉलर सालाना के पास पहुँच चुका है।
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कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में युद्ध होगा खत्म: सत्ताइसवाँ न्यूज़लेटर

कांगो में चल रहे मौजूदा टकराव को समझने के लिए पढ़ें यह न्यूज़लेटर, जिसमें पिछली सदी से अफ्रीका के इस भाग में जारीसंपदाओं की चोरी, और साम्राज्यवाद व उपनिवेशवाद की प्रक्रियाओं, तथा आज के इलेक्ट्रॉनिक युग के लिए बेहद अहम हो चुके कच्चे माल को हड़पने की होड़ का विश्लेषण किया गया है।
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पुरालेख

परमाणु युद्ध कभी मामूली नहीं होते: छब्बीसवाँ न्यूज़लेटर (2024)

यूएस और नाटो की तरफ से हाल ही में जो घोषणाएँ हुईं हैं, उससे यूक्रेन में लड़ाई भयावह रूप ले सकती है और परिस्थिति क्यूबाई मिसाइल संकट से भी ज़्यादा ख़तरनाक बन सकती है।
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क्या डॉलर की सत्ता अंत की ओर बढ़ रही है?: पच्चीसवाँ न्यूज़लेटर (2024)

जून के महीने की शुरुआत में एक अफ़वाह फैली कि सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पेट्रोडॉलर समझौता ख़त्म हो गया है। इस झुठी अफवाह ने वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर अमेरिकी प्रभुत्व को लेकर दुनिया की आशंका को रेखांकित किया। अभी दुनियाभर में डी-डॉलरीकरण के ऊपर जीवंत बहस चल रही है। इन बहसों का मुद्दा ये है कि क्या ब्रिक्स इस प्रक्रिया का सूत्रधार हो सकता है। हालांकि डी-डॉलरीकरण की संभावना को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन दुनिया डॉलर-वॉल स्ट्रीट की दादागिरी को खत्म करके विकल्पों के तलाश की जरूरत को महसूस कर रही है।
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समझौते और डर से नहीं आएगा लोकतंत्र: चौबीसवाँ न्यूज़लेटर (2024) 

दुनिया के 64  देशों और यूरोपीय यूनियन में इस साल के अंत में चुनाव होने जा रहे है। इन चुनावों में धन, बल तथा निरर्थक आरोपों-प्रत्यारोपों के भ्रष्ट साए तले एक सच्चे लोकतंत्र की तलाश जारी है।
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उनकी नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था दरअसल माफ़िया राज है: तेईसवां न्यूज़लेटर (2024)

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की अवहेलना करते हुए, इज़रायल की ग़ज़ा पर बमबारी जारी है। संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह, इज़रायल भी अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन करने से इनकार करता है। यह ‘नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था’ के पाखंड को उजागर करता है।
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ये पीड़ा के गीत हैं, युद्ध के नहीं : 21 वां न्यूज़लेटर (2024)

अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने हाल ही में इज़राइल, ताइवान, यूक्रेन और अमेरिका के लिए आवंटित 95.3 अरब डॉलर की सैन्य फंडिंग का जश्न मनाने के लिए कीव का दौरा किया। यानी ग़ज़ा में इज़रायली नरसंहार का समर्थन जारी रहेगा, 'रूस को कमजोर देखने' के लिए नाटो के विस्तार के प्रयास में यूक्रेन का इस्तेमाल जारी रहेगा, और नए शीत युद्ध के तहत चीन को रोकने के प्रयासों में ताइवान का इस्तेमाल किया जाएगा। हमारा नया डोसियर अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति के संदर्भ में इन घटनाक्रमों के पीछे की रूपरेखा और उद्देश्यों को उजागर करता है।
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माई हार्ट मेक्स माई हेड स्विम: 20वां न्यूज़लेटर (2024)

रंगभेद, कब्ज़ा और नरसंहार गाजा की स्थिति को मुख्य रूप से परिभाषित करते हैं। लेकिन इज़रायल और वैश्विक उत्तर में उसके सहयोगी निराधार दावा करते हैं कि इन शब्दों का उपयोग यहूदी-विरोधी भावना के चलते किया जा रहा है।
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अफ़्रीका में लोग कहते हैं, ‘फ्रांस, बाहर निकलो!’: 19वां न्यूज़लेटर (2024)

फ़्रांस से गिनी की आज़ादी के बाद गिनी के राष्ट्रपति अहमद सेकोउ टूरे फ्रांस के राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल से भिड़ गए, जो कि टूरे को स्वतंत्रता के अभियान से पीछे हटने के लिए मजबूर कर रहे थे। फ्रांस को अफ्रीकी स्वतंत्रता बर्दाश्त नहीं थी, लेकिन अफ्रीका के लोगों के लिए फ्रांस का वर्चस्व बर्दाश्त से बाहर था। अफ्रीकी संप्रभुता के लिए वह उत्साह आज भी बरकरार है। सेनेगल से लेकर नाइजर तक तब भी 'फ्रांस, बाहर निकलो' का नारा लगाया जाता था, और आज भी लगाया जाता है। इस संघर्ष के अंतर्गत हाल में हुए घटनाक्रमों को बेहतर ढंग से समझने के लिए हम साहेल में संप्रभुता के संघर्ष पर नो कोल्ड वॉर और वेस्ट अफ्रीका पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा दी गई जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं।
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पाखंड बर्दाश्त नहीं करेंगे छात्र: अठारहवाँ न्यूज़लेटर (2024)

फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ इज़रायली नरसंहार को उत्तरी गोलार्ध की सरकारों का पूर्ण समर्थन मिल रहा है लेकिन वहाँ के नागरिक लगातार प्रतिरोध कर रहे हैं। इसमें आश्चर्य की बात नहीं कि ये प्रतिरोध अमेरिका में शुरू हुए हैं, जहां लोग अमेरिकी सरकार द्वारा इज़रायली सरकार को ब्लैंक चेक देने का विरोध कर रहे हैं। फ़िलिस्तीनियों के साथ एकजुटता से प्रेरित होकर, और दमन का सामना करते हुए, छात्र सड़कों पर कैम्प लगा कर बैठे हैं।
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ब्राज़ील के भूमिहीन मज़दूर चालीस साल से मानवता के निर्माण के लिए संघर्ष कर रहे हैं: 16वां न्यूज़लेटर (2024)

ब्राज़ील के भूमिहीन श्रमिक आंदोलन (एमएसटी) से जुड़े भूमिहीन श्रमिकों ने अक्टूबर और दिसंबर 2023 के बीच ग़ज़ा में फ़िलिस्तीनियों को भेजने के लिए लगभग 13 टन खाद्य सामग्री इकट्ठा की थी। भोजन एकत्र करना फ़िलिस्तीनी लोगों के साथ एमएसटी की एकजुटता कार्रवाई का केवल एक पहलू है। दूसरा समान रूप से महत्वपूर्ण पहलू ग़ज़ा में इज़रायल के नरसंहार के संबंध में ब्राज़ील में आम सहमति बनाना और फ़िलिस्तीनियों के संघर्ष के साथ अपना संबंध गहरा करना है। 
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प्रेम बिना जी रहे हैं हज़ारों लोग, पानी बिना कोई नहीं जी सकता: 14वां न्यूज़लेटर (2024)

पांच वर्ष से कम उम्र के एक हजार से अधिक बच्चे, हर दिन, अपर्याप्त पानी, और स्वच्छता की कमी से जुड़ी बीमारियों से मर रहे हैं। हर दिन कम से कम 9.5 बिलियन लीटर पानी दुनिया के गोल्फ कोर्सों में इस्तेमाल होता है, जबकि इतने पानी से WHO मानक के अनुसार प्रतिदिन 470 करोड़ लोगों की पानी की न्यूनतम ज़रूरतों को पूरा किया जा सकता है। इस बीच, ग़ज़ा में इज़रायल पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। पानी तक पहुँच रोक कर और बुनियाद सुविधाओं को नष्ट कर फ़िलिस्तीनियों को पानी से वंचित कर रहा है। यही पूँजीवादी व्यवस्था के मूल्य हैं। 
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फ़िलिस्तीन के लोग फ़िलिस्तीन की धरती पर ही रहेंगे: 13वां न्यूज़लेटर (2024)

ट्रम्प के राष्ट्रपति काल में वरिष्ठ सलाहकार रहे, जेरेड कुशनर, ने हाल में 'ग़ज़ा की तटवर्ती संपत्ति' के बारे में बात करते हुए कहा कि यह 'बहुत मूल्यवान' हो सकती है। 'अगर मैं इज़राइल होता', उन्होंने कहा, 'मैं बस नेगेव [रेगिस्तान] में बुलडोजर से कुछ ढहा देता [और] लोगों को [ग़ज़ा से] वहां ले जाने की कोशिश करता'। नेगेव लंबे समय से तनाव की जगह रही है; जिसकी शुरुआत 1948 के नक्बा से हुई और 30 मार्च  (जिसे अब भूमि दिवस के रूप में मनाया जाता है) 1976 की आम हड़ताल के बाद इसमें नया मोड़ आया। यदि इतिहास की मानी जाए, तो ऐसा नहीं होगा कि फ़िलिस्तीनी यहाँ से चले जाएंगे। वे लड़ेंगे। वे डटे रहेंगे।
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महिलाओं की मुक्ति का संघर्ष हमेशा सार्थक रहेगा: 12वां न्यूज़लेटर (2024)

8 मार्च हमेशा से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस नहीं रहा, और न ही ऐसे अन्य दिवस हमेशा से मनाए जा रहे हैं। यह विचार सोशलिस्ट इंटरनेशनल से उभरा, जहां क्लारा ज़ेटकिन, एलेक्जेंड्रा कोल्लंताई व अन्य क्रांतिकारी महिला नेताओं ने सामाजिक धन के निर्माण में कामकाजी महिलाओं व घरेलू श्रम की भूमिका को पहचानने का संघर्ष किया। कम्युनिस्ट महिलाओं के प्रयासों के परिणामस्वरूप, 8 मार्च आदिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप जाना जाने लगा। इस वर्ष, हम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (हालांकि शायद अंतर्राष्ट्रीय कामकाजी महिला माह मनाया जाना बेहतर होगा) के अवसर पर डोसियर नं 74 'Interrupted Emancipation: Women and Work in East Germany' प्रकाशित कर रहे हैं।
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