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जून / 2026

पूर्वी एशिया में एक नया संकट जड़ पकड़ रहा है: पच्चीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

पूर्वी एशिया एक गहरे विरोधाभास से गुज़र रहा है: यह क्षेत्र वैश्विक विकास का इंजन है, लेकिन यूएस साम्राज्यवाद इसे नए शीत युद्ध की रणभूमि बनाना चाहता है।
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दुनिया को एक जीवंत वामपंथ की ज़रूरत है: चौबीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

पतनशील साम्राज्यवाद अपने बचाव के लिए हमले तीखे कर रहा है, ऐसे में मज़दूर वर्ग का संगठित होना मानवता की रक्षा के लिए अनिवार्य है।
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हमारे सपनों के नए एशिया का निर्माण करो: तेइसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

एशिया में सच्ची संप्रभुता सिर्फ़ आर्थिक प्रगति से नहीं आएगी; साम्राज्यवाद और नवउदारवाद के ख़िलाफ़ एक क्षेत्रीय मंच बनाने की ज़रूरत है।
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अन्य न्यूज़लेटर

हम अपने क़ातिलों की मेज़बानी नहीं करेंगे: बाईसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

दोहन के आधुनिक ढाँचे के पीछे पुरानी उपनिवेशवादी लूट की व्यवस्था ही छिपी है। अफ़्रीका में संप्रभुता और असली आज़ादी के संघर्ष की नींव उपनिवेशवाद-विरोधी विरासत है।
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समाजवाद को फलने में समय लगता है: इक्कीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

पूँजीवादी व्यवस्था जल्दी-जल्दी होने वाले चुनावों को तरजीह देती है, लेकिन गरिमामय भविष्य के निर्माण में सामाजिक शक्तियों को लंबे समय, संघर्ष और संगठन की ज़रूरत पड़ती है।
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भविष्य समाजवाद का है – यह संभव है और ज़रूरी भी: बीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी तरह विलुप्त हो जाने का ख़तरा झेल रहा द्वीप राष्ट्र तुवालू अब दुनिया का पहला डिजिटल राष्ट्र बनने जा रहा है।
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दुनिया में एक अरब से भी ज़्यादा लोग विकलांग हैं: उन्नीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

विकलांग लोग समाज में शरणार्थी नहीं, बल्कि इसका हिस्सा हैं। इनके साथ होने वाले अन्याय दिखाते हैं कि समाज इंसानी गरिमा से ज़्यादा मुनाफ़े को तरजीह देता है।
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सबसे मज़बूत लोगों का लोकतंत्र हमेशा अच्छा होता है: अठारहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

अगर 1987 में संकारा की हत्या न हुई होती तो बुर्किना फ़ासो और साहेल क्षेत्र आज बहुत अलग होते।
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फ़िलहाल के लिए, सभ्यताओं के बीच वार्ता: सत्रहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

ईरान का पश्चिम के सामने यूँ डटे रहना औपनिवेशिक शासन झेल चुके देशों के लिए प्रेरणादायक है। उसमें यह आत्मविश्वास आया कहाँ से?
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पेट्रोडॉलर और ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध पर प्रारंभिक विचार: सोलहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

ईरान के ख़िलाफ़ अवैध अमेरिकी-इज़राइली जंग तेल-डॉलर-वॉल स्ट्रीट गठजोड़ को उजागर कर रहा है, जिसके परिणाम व्यापक होंगे।
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स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़, महान समंदर का दरवाज़ा: पंद्रहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

ईरान के ख़िलाफ़ यूएस-इज़राइली युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था नए संकट में फँसने जा रही है, जिसका सबसे बुरा असर ग़रीब देशों पर पड़ने वाला है।
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अंतहीन जंग के विरुद्ध: चौदहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

‘नो कोल्ड वॉर’ अभियान ने अपने हालिया बयान में यूएस के आक्रामक इतिहास की पड़ताल करते हुए कहा है कि अंतहीन युद्धों को रोकना ज़रूरी है।
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तबाही की कगार पर सेनेगल: तेरहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

दशकों के उपनिवेशवाद और भ्रष्टाचार से त्रस्त सेनेगल के सामने भी अन्य देशों की तरह एक दुविधा है: ऋण के बोझ तले संप्रभु विकास कैसे हो।
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क्यूबा डरता नहीं: बारहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

अवैधानिक घेरेबंदी से पैदा हुए तेल संकट से जूझती क्यूबा सरकार यूएस से वार्ता को तैयार, लेकिन संप्रभुता और गरिमा के सिद्धांतों पर अटल।
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चरम दक्षिणपंथ ने महिलाओं के विरुद्ध छेड़ी जंग: ग्यारहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

हाल के वर्षों में दक्षिण अमेरिका के चरम दक्षिणपंथ ने महिलाओं और लैंगिक-यौन अल्पसंख्यकों के अधिकारों के ख़िलाफ़ एक अभियान शुरू कर दिया है।
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