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क्यूबा डरता नहीं: बारहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

अवैधानिक घेरेबंदी से पैदा हुए तेल संकट से जूझती क्यूबा सरकार यूएस से वार्ता को तैयार, लेकिन संप्रभुता और गरिमा के सिद्धांतों पर अटल।

शीर्षकहीन, एंटोनियो सेगुई (अर्जेंटीना), 1965। तेल चित्र (कैनवास पर), 200 x 249 cm. 

प्यारे दोस्तो,

ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।

13 मार्च 2026 को क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियास-कानेल बेरमूडेज़ ने राजधानी हवाना में एक प्रेस-वार्ता की। संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) ने दशकों से क्यूबा की अवैधानिक घेरेबंदी की हुई है जिसे ट्रम्प ने 2026 के शुरुआती दिनों में और भी सख़्त कर दिया जिससे इस छोटे से टापू देश में कच्चे तेल की आपूर्ति लगभग ख़त्म हो चुकी है। इससे देश में भयानक ईंधन और बिजली का संकट पैदा हो गया है। 29 जनवरी को ट्रम्प ने एक कार्यकारी आदेश जारी किया जो झूठों का पुलिंदा है – इसमें दावा किया गया कि क्यूबा ‘हिज़बुल्लाह और हमास जैसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों का स्वागत करता है’ – इस आदेश में चेतावनी दी गई कि अगर कोई देश क्यूबा को तेल भेजने की कोशिश करेगा तो उस पर टैरिफ़ लगाए जाएँगे।

क्यूबा अपनी ज़रूरत का लगभग 40% तेल का उत्पादन ख़ुद करता है और बाक़ी का आयात करता है – ज़्यादातर मेक्सिको और वेनेज़ुएला से। वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा किए जाने के बाद से वेनेज़ुएला को मजबूरन क्यूबा को तेल भेजना बंद करना पड़ा, जबकि मेक्सिको ने यूएस की धमकियों के चलते बंद कर दिया। जनवरी के पहले हफ़्ते के बाद से क्यूबा को तेल नहीं मिला है। फ़रवरी की शुरुआत में क्यूबा के उप-प्रधानमंत्री ऑस्कर पेरेज़-ओलिवा फ्रागा ने कहा कि क्यूबा की सरकार बचा हुआ तेल अनिवार्य सेवाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ और भोजन तथा पीने के पानी की सप्लाई के लिए इस्तेमाल करेगी। इस पृष्ठभूमि में डियास-कानेल ने घोषणा की कि क्यूबा और यूएस ने ‘एक बेहद संवेदनशील प्रक्रिया’ की शुरुआत करते हुए वार्ता आरंभ की है जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय समस्याओं का हल निकालना है और ‘दोनों देशों की जनता की भलाई के लिए ठोस कदम’ उठाए जा रहे हैं।

प्रेसवार्ता के कुछ दिन पहले इंटरनेशनल पीपल्स असेंबली का एक प्रतिनिधिमंडल डियास-कानेल से मिला जिन्होंने हमें बताया कि क्यूबा में संकट बहुत गहरा चुका है लेकिन उनकी सरकार क्यूबा की जनता की कठिनाइयों को कम करने की हर संभव कोशिश कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि क्यूबा की क्रांति संप्रभुता और गरिमा के अपने समाजवादी आदर्शों को छोड़ेगी नहीं। डियास-कानेल जिस स्पष्ट विश्वास से बोल रहे थे उससे हमरा ढाँढस बंधा और इसके बाद हमने हवाना भर में जितने भी लोगों से बात की उन सभी ने यही बात कही (तेल आपूर्ति पर लगाए प्रतिबंधों के कारण हम राजधानी से बाहर नहीं जा सके)।

क्यूबा इस ला कैपिटल (‘क्यूबा राजधानी है’), रोबेर्टो मट्टा (चिली), 1963। मिट्टी और प्लास्टर ऑन मेसोनाइट (भित्ति चित्र), 188 x 340 सेमी। कासा दे लास आमेरिकास के प्रवेश द्वार पर स्थित।

क्यूबा पर ट्रम्प का यह नया हमला 7 फ़रवरी 1962 को शुरू हुए यूएस के ग़ैर-क़ानूनी प्रतिबंधों की ही एक कड़ी है। तब के यूएस राष्ट्रपति जॉन एफ़ केनेडी ने फॉरेन असिस्टन्स एक्ट 1961 की धारा 620(ए) के तहत घोषणा 3447 पर हस्ताक्षर कर दिए, इसे जुलाई 1963 में ट्रेडिंग विद् द एनिमी एक्ट 1917 के तहत और भी कड़ा कर दिया गया। केनेडी के इस कदम ने 1960 में लगाए गए व्यापार प्रतिबंधों का विस्तार कर इन्हें यूएस और क्यूबा के बीच लगभग सभी तरह के व्यापारिक और वित्तीय संबंधों पर लागू कर दिया। वक़्त के साथ-साथ इन प्रतिबंधों का इन दोनों देशों की सीमाओं के बाहर भी विस्तार हो गया, ख़ासतौर से 1991 के बाद: 1992 के टोरिसेली अधिनियम ने यूएस कंपनियों की विदेशी सहायक कंपनियों पर क्यूबा के साथ व्यापार करने पर रोक लगा दी और ऐसा करने पर क्यूबा के साथ व्यापार के लिए इस्तेमाल में आए जहाज़ों पर 180 दिन के प्रतिबंध का प्रावधान कर दिया, 1996 के हेल्म्स-बर्टन अधिनियम ने इसे ग़ैर-क़ानूनी ढंग से आगे बढ़ाया और दूसरे देशों तथा विदेशी कंपनियों पर भी लागू कर दिया।

आज ही की तरह उस समय भी यह नीति स्पष्ट तौर से क्यूबा को कमज़ोर करने के लिए बनाई गई थी, एक ऐसा देश जो पहले यूरोप और फिर 1898 के बाद से यूएस के अधीन रहा था, वह संप्रभुता की राह खोज रहा था। यूएस ने क्यूबा पर प्रतिबंध इसलिए लगाए ताकि उसे अमेरिकी नियंत्रण से बाहर निकलने और तीसरी दुनिया के अन्य देशों के लिए एक उदाहरण बनने की सज़ा दी जाए। शुरू से ही इन प्रतिबंधों के पीछे की मंशा कूटनीति के दायरों से बाहर जाने की ही रही: यूएस सरकार के अंदरूनी दस्तावेज़ों से पता चलता है कि क्यूबा में राजनीतिक परिवर्तन लाने के मक़सद से ‘आर्थिक असंतोष और कठिनाइयाँ’ पैदा करने की एक स्पष्ट रणनीति थी। समय के साथ-साथ यह घेरेबंदी और भी पेचीदा और सख़्त होती चली गई। सोवियत संघ के विघटन के बाद क्यूबा ने अपना प्रमुख व्यापारिक सहयोगी खो दिया जिसके बाद क्यूबा में ‘स्पेशल पीरियड’ (क्यूबा के लिए विशेष दौर) आया। इस दौरान भी जहाँ दबाव घटना चाहिए था यूएस ने अपनी नीतियाँ और कड़ी कर दीं। दोनों देशों की सीमाओं के बाहर जाकर इस तरह सख़्त नीतियाँ लागू करना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों और अन्य संप्रभु देशों के अधिकारों का हनन है।

हुआनितो लगुना, तिथि अनुपलब्ध, एंटोनियो बेर्नी (अर्जेंटीना)। पेंट की गई लकड़ी और धातु कोलाज (त्रिपतिक), 220 x 300 cm.

अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के तहत क्यूबा पर यूएस की घेरेबंदी मोटे तौर पर ग़ैर-क़ानूनी मानी गई है क्योंकि यह राष्ट्रीय संप्रभुता, हस्तक्षेप विरोधी और अन्य देशों के वैधानिक व्यापार के अधिकार के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है। ये सिद्धांत संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था और ख़ासतौर से 1945 के इसके चार्टर में स्पष्टता से दिए गए हैं, जो राज्यों की संप्रभु समानता की पुष्टि करते हैं, उनकी क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी को प्रतिबंधित करते हैं, और उन मामलों में हस्तक्षेप को निषिद्ध करते हैं जो मूलतः उनके आंतरिक अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। चीज़ें और स्पष्ट करने के लिए ज़रूरी है कि उन प्रमुख सिद्धांतों और नियमों का ज़िक़्र किया जाए जिन्हें 1962 के बाद से यूएस ने तोड़ा है:

  • 1945 के संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(1), 2(4) और 2(7)  राष्ट्रों की संप्रभुता की पुष्टि करते हैं, क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक आज़ादी के विरुद्ध धमकी या बल प्रयोग का निषेध करते हैं और आंतरिक मामलों में दख़ल पर रोक लगाते हैं।
  • 1970 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध और सहयोग के लिए घोषणा में कहा गया कि कोई भी देश किसी अन्य देश के संप्रभुता के अधिकार को कमज़ोर करने के लिए उसकी सरकार के ख़िलाफ़ आर्थिक, राजनीतिक या अन्य कोई भी दबाव डालने वाला कदम नहीं उठा सकता।
  • नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध (1966 में अपनाया गया और 1976 में लागू हुआ) और आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध (1966 में अपनाया गया और 1976 में लागू हुआ) दोनों ही सभी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देते हैं। इस अधिकार में अपनी आर्थिक व्यवस्थाओं पर उनका नियंत्रण भी शामिल है।

संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की इस स्पष्ट संधियों के अलावा और इससे भी पुराने अंतर्राष्ट्रीय क़ानून की परंपराएँ हैं जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की स्वतंत्रता की रक्षा करती हैं तथा संबंधित देशों की सीमाओं के बाहर किसी तीसरे देश पर अधिकार क्षेत्र स्थापित करने का निषेध करते हैं। क्यूबा की घेरेबंदी इसलिए समान संप्रभुता के सिद्धांत का उल्लंघन है क्योंकि यह क्यूबा की आंतरिक राजनीति और आर्थिक प्रणाली को संचालित करने की कोशिश है। यह स्पष्ट तौर से आर्थिक समस्याएँ खड़ी करना चाहती है और इसका मक़सद अवैधानिक हस्तक्षेप और दबाव बनाना है। यूएस के प्रतिबंधों का दूसरे देशों पर भी लागू किया जाना उन देशों और उनकी जनता के संप्रभुता के अधिकार का हनन है। इस घेरेबंदी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंज़ूरी भी नहीं जो इसके ग़ैर-क़ानूनी, एकतरफ़ा और बेजा दबाव बनाने की सच्चाई को और भी उजागर करता है।

सिया (‘कुर्सी’), एंटोनियो मार्टोरेल (प्यूर्टो रिको), तिथि अनुपलब्ध, संस्करण अज्ञात। वुडकट (लकड़ी की छपाई)। 100 x 62 cm.

1992 के बाद से हर साल (सिवाय 2020 के, जब कोविड की वजह से वोटिंग नहीं हो पाई) संयुक्त राष्ट्र महासभा ने क्यूबा की घेरेबंदी के ख़िलाफ़ भारी मत से वोट किया है, इसे यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के विरुद्ध बताया है। इन प्रस्तावों में ज़ोर देकर कहा गया है कि यह नीति क्यूबा के आत्म-निर्णय के अधिकार का उल्लंघन है और राष्ट्रों के बीच सामान्य आर्थिक संबंधों में अड़चन पैदा करती है।

यूएन महासभा के प्रस्ताव क़ानूनी तौर पर बाध्य नहीं लेकिन इनकी निरंतरता और लगभग पूर्ण बहुमत यह साबित करते हैं कि यूएस के इन क़दमों की अवैधानिकता पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय लगभग एकमत है। अक्टूबर 2025 में जब महासभा में वोट हुआ तो 193 में से 165 सदस्य राष्ट्रों ने इस घेरेबंदी को ख़त्म करने के पक्ष में वोट दिया। इनमें दुनिया के कुछ सबसे घनी आबादी वाले देश शामिल थे जैसे ब्राज़ील, चीन, नाईजीरिया, भारत, इंडोनेशिया और पाकिस्तान। जिन देशों ने घेरेबंदी को ख़त्म किए जाने का समर्थन किया उन्हें मिलाकर देखा जाए तो वे दुनिया की 92% आबादी है। हर लिहाज़ से दुनिया का बहुत बड़ा हिस्सा इस ग़ैर-क़ानूनी घेरेबंदी के ख़िलाफ़ है।

शीर्षकहीन (अधूरा), वियोलेटा पारा (चिली), 1966। बोरे के कपड़े पर कढ़ाई, 136 x 200 cm.

हवाना के इन्स्टिट्यूट ऑफ़ न्यूरोलॉजी एंड न्यूरोसर्जरी की एक नर्स ने मुझे बताया कि उन्हें घर से काम तक पहुँचने में दो घंटे से ज़्यादा लगते हैं, लेकिन वे इस परेशानी को क्यूबाई क्रांति के तहत अपने मिशन का एक हिस्सा मानती हैं। अपने मरीज़ों और क्यूबा क्रांति की प्रक्रिया के प्रति अस्पताल में काम करने वालों की प्रतिबद्धता के बारे में उनसे सुनकर मेरी आँखें भर आईं। तेल आपूर्ति पर लगे प्रतिबंधों की वजह से बिजली आती-जाती रहती है और इस बीच सर्जन और नर्सें पेचीदा सर्जरी करने को लेकर परेशान रहते हैं। उनके मरीज़ों में से कुछ मिर्गी या दिमाग़ के ट्यूमर के शिकार हैं – लेकिन उन्हें इलाज के लिए इंतज़ार करना होगा।

अस्पताल के निदेशक डॉ. ओरेस्तेस लोपेज़ पिलोतो मुझे मुख्य वार्ड में लेकर गए। उन्होंने मुझसे कहा ‘मैं ओरिएंते [पूर्वी क्यूबा में] के दक्षिणी हिस्से से आता हूँ। मेरा परिवार मज़दूरी और किसानी करता है, अश्वेत लोग जो खेत जोतते हैं। मैं क्रांति की वजह से ही एक डॉक्टर और सर्जन बन पाया हूँ। और इसीलिए मैं देश के एक प्रमुख मेडिकल सेंटर में हूँ’। उन्होंने ठीक मेरी आँखों में देखते हुए कहा ‘ऐसे लोग भी हैं जो क्रांति के ख़िलाफ़ हैं। लेकिन उसका साथ देने वाले मुझ जैसे लोग कहीं ज़्यादा हैं। और हम डरते हैं’।

स्नेह सहित,

विजय 

पुनश्चः इस न्यूज़लेटर में शामिल कलाकृतियाँ डोसियर 56 Ten Theses on Marxism and Decolonisation (सितंबर 2022) से ली गईं हैं, जो क्यूबा के कासा डे लास अमेरिका (Casa de las Américas) के सहयोग से तैयार किया गया था। ये कलाकृतियाँ उनके “हैदी संतामारिया हमारे अमेरिका की कला” (Haydée Santamaría Art of Our America) संग्रह का हिस्सा हैं।