English Español Português Chinese

Laila Shawa (Palestine), The Hands of Fatima, 1989

‌लैला शावा (फ़िलिस्तीन), फ़ातिमा के हाथ, 1989.

 

प्यारे दोस्तों,

ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।

अंतर्राष्ट्रीय क़ानून की अवहेलना करते हुए इज़रायल की विशाल युद्ध मशीनरी अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्र (ओपीटी) पर हमला कर रही है। ओपीटी एक अधिकृत क्षेत्र है, और संयुक्त राष्ट्र संघ किसी भी कब्ज़ेदार-इज़रायल- को उसके द्वारा क़ब्ज़ा की गई ज़मीन के स्वरूप को बदलने की अनुमति नहीं देता। लेकिन, इज़रायल को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता; वो यरूशलेम के शेख़ जर्राह इलाक़े से परिवारों को बेदख़ल करने की कोशिश कर रहा है। पहले अल-अक़्सा मस्जिद के अंदर इज़रायली सीमा सैनिक घुस गए और फिर हवाई बमबारी होने लगी। इन सब के चलते कितने लोग घायल हुए हैं, और कितनी मौतें हुई हैं, उसकी गिनती तो माहौल शांत होने के बाद ही होगी।

ख़ास बात ये है कि, अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के इस उल्लंघन के सामने फ़िलिस्तीनी लोग झुके नहीं। उन्होंने यरुशलेम में और वेस्ट बैंक के किनारे, गाज़ा में और इज़रायल के साथ लगने वाले हिस्सों में इस हमले का विरोध किया। इज़रायल की तरफ़ से उन पर गोली चलाए जाने की धमकी को ख़ारिज करते हुए, हज़ारों लोगों ने जॉर्डन-फ़िलिस्तीन सीमा और लेबनान-फ़िलिस्तीन सीमा तक मार्च किया। ग़ाज़ा से, कई दलों ने इज़रायल पर यरुशलम में अपनी हिंसा बंद करने के लिए दबाव बनाने के लिए रॉकेट दाग़े। ग़ाज़ा से रॉकेट ओपीटी क्षेत्र में इज़रायल की हिंसक और अवैध गतिविधियों के बाद छोड़े गए थे; मई 2021 की घटनाएँ इन रॉकेटों के हमले के बाद से शुरू नहीं हुईं थीं।

पिछले पंद्रह सालों में, इज़रायल 2006, 2008, 2009, 2010, 2011, 2014, 2018 और 2019 में ग़ाज़ा पर बमबारी कर चुका है। इस प्रत्यक्ष हिंसा के अलावा, इज़रायल ने न केवल ग़ाज़ा बल्कि पूरे ओपीटी क्षेत्र के ख़िलाफ़ ऐसी अप्रत्यक्ष शीत हिंसा की नीति अपना रखी है जिसका उद्देश्य है फ़िलिस्तीनियों को इतना हतोत्साहित करना कि वे ओपीटी क्षेत्र छोड़कर चले जाएँ। इज़रायल एक-देश समाधान (फ़िलिस्तीनियों और यहूदियों का एक लोकतांत्रिक देश) या दो-देश समाधान (इज़रायल और फ़िलिस्तीन दो देश) से इनकार करता है, और इसके बजाय तीन-देश समाधान चाहता है (जिसके तहत फ़िलिस्तीनियों को मिस्र, जॉर्डन और लेबनान भेजा जाएगा)। यह समाधान एक जाति को समाप्त कर देने की बात करता है। 2021 की बमबारी विशेष रूप से क्रूर है, इसमें प्रेस और शरणार्थी शिविरों की जगह बनी इमारतों पर भी बमबारी हुई है। शतेह (ग़ाज़ा) में, 15 मई को हुई बमबारी में कई लोग मारे गए थे। अबू हताब परिवार ने दस सदस्य खो दिए, इनमें से आठ बच्चे थे। फ़िलिस्तीनियों को ख़त्म करने के लिए इस तरह की हिंसा का इस्तेमाल करना ही इज़रायली अपार्थैड परियोजना को परिभाषित करता है; रोजर्स वाटर्स इस हिंसा को ‘बुनियादी अवज्ञा’ कहते हैं।

 

Juhaina Habibi Kandalaft (Palestine), Jaffa, 2015.

जुहैना हबीबी कंदालाफ्त (फ़िलिस्तीन), जाफ़ा, 2015.

 

अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के स्पष्ट उल्लंघन और इज़रायली बम विस्फोटों द्वारा की जा रही भीषण हिंसा को देखते हुए, व्यापक रूप से यह उम्मीद की जा रही थी कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद युद्धविराम का आह्वान करेगी। लेकिन राष्ट्रपति जो बाइडेन की अमेरिकी सरकार ने परिषद के अन्य सदस्यों को सूचित किया है कि वह उस तरह के किसी भी प्रस्ताव के लिए मतदान नहीं करेगी। अकेले अमेरिका ने पहले बिगड़ती स्थिति पर परिषद का बयान जारी नहीं होने दिया। अमेरिका ने इससे पहले शुक्रवार को -नॉर्वे, ट्यूनीशिया और चीन द्वारा प्रस्तावित- एक खुला सत्र आयोजित करने का भी विरोध किया, जो अंततः रविवार को आयोजित किया गया। इस प्रकार से इज़रायल के साथ खड़े रहने के लिए इज़रायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राज्य अमेरिका और चौबीस अन्य देशों को धन्यवाद दिया। इन अन्य देशों में ब्राज़ील भी शामिल है, जिसके राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ भयानक बल प्रयोग करने के इज़रायल के ‘अधिकार’ का समर्थन किया है। बोलसोनारो का यह बयान आने से कुछ दिन पहले रियो डी जनेरियो में जकारेज़िन्हो इलाक़े के लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई हुई थी, जिसमें पच्चीस लोग मारे गए थे। जकारेज़िन्हो और गाज़ा में हुई हिंसा में गुणात्मक नहीं केवल मात्रात्मक अंतर है।

 

 

15 मई को, ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान और नो कोल्ड वॉर संगठन ने ‘चीन, अमेरिका और ब्राज़ील की स्वतंत्र विदेश नीति बनाने की कोशिश’ विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया था। पूर्व राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ़ ने बताया कि कैसे उनके राष्ट्रपतिकाल (2011-2016) में -और उनसे पहले लूला दा सिल्वा (2003-2011) के शासनकाल के दौरान- वर्कर्स पार्टी ने विस्तारित G20 (2008) और ब्रिक्स परियोजना (2009) जैसे बहुध्रुवीय संस्थानों को स्थापित करने की प्रक्रिया का नेतृत्व किया। ये मंच निश्चित तौर पर एकदम सही नहीं हैं, लेकिन इनका उद्देश्य ऐसे प्लेटफ़ॉर्म तैयार करना था जो पूरी तरह से संयुक्त राज्य अमेरिका के अधीन नहीं थे। इन दोनों में से कोई भी मंच इस उद्देश्य पर खरा नहीं उतर पाया; रूसेफ़ ने कहा, ‘असमान संबंध बहुध्रुवीयता के बराबर नहीं होते’। G20 में अभी भी पश्चिमी शक्तियों का वर्चस्व है और ब्रिक्स परियोजना ब्राज़ील व भारत में आए दक्षिणपंथी बदलाव से कमज़ोर हुई है। उन्होंने कहा, ‘ब्रिक्स के बी और आई में समस्याएँ उत्पन्न हो गईं हैं । ‘बी’ में बोलसोनारो की वजह से।’ आर्थिक सुधार के लिए बहुध्रुवीयता की परियोजना पर लौटने की रणनीतिक आवश्यकता के बारे में रूसेफ़ ने समझाया कि, ‘हमारी वापसी अनिवार्य रूप से राजनीतिक होनी चाहिए’।

 

Gabriela Tornai (@gabrielatornai_) / Design Ativista, Comida, direito do povo! (‘The people’s right to food’

गैब्रिएला तोर्नई (@gabrielatornai_)/ डिज़ाइन एटिविस्टा, ‘जनता का भोजन का अधिकार’। 2021.

 

लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते, ब्राज़ील को बहुध्रुवीय संस्थानों के निर्माण में और संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों के साम्राज्यवादी रवैये को नियंत्रण में रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय क़ानून की संभावना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। ब्राज़ील को इस भूमिका को निभाने के लिए, बोलसोनारो और दक्षिणपंथ की ख़िलाफ़त करने वाले राजनीतिक गुट को मज़बूत होना होगा, और ख़ुद को 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में विजयी चुनावी गठबंधन में बदलना होगा। यदि पलासियो दे प्लानाल्टो में वामपंथ जीत जाता है, तब ही ब्राज़ील एक बार फिर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में कोई भूमिका निभा सकेगा।

ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान से मई में जारी हुआ डोज़ियर, ‘ब्राज़ील के वामपंथियों के सामने उपस्थित चुनौतियाँ’, इस विषय पर गहराई से चर्चा करता है। ब्राज़ील के वामपंथियों की समस्याओं और संभावनाओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए, साओ पाउलो की टीम ने ब्राज़ील के वामपंथियों में से पाँच नेताओं का इंटर्व्यू लिया: वर्कर्स पार्टी के अध्यक्ष ग्लीसी हॉफ़मैन; भूमिहीन श्रमिक आंदोलन (एमएसटी) के राष्ट्रीय बोर्ड की सदस्य केली माफ़ोर्ट; नेशनल यूनियन ऑफ़ स्टूडेंट्स की उपाध्यक्ष व लोकप्रिय युवा विद्रोह (लेवेंटे पॉपुलर दा जुवेंटुडे) की सदस्य, एलीडा ऐलेना; यूनिफ़ाइड वर्कर्स सेंट्रल के राष्ट्रीय कार्यकारी बोर्ड की सदस्य जंदिरा उहारा; सोशलिज़्म एंड फ़्रीडम पार्टी (पीएसओएल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जूलियानो मेडिरोस; और पीएसओएल के राष्ट्रीय बोर्ड के सदस्य वेलेरियो आर्करी। इन नेताओं के साथ बातचीत करने का मक़सद था, ब्राज़ील के वामपंथियों के द्वारा चुने गए रास्तों व वामपंथियों के संगठित वर्गों और उनके समर्थकों की एकता को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों के बारे में विस्तार से जानना। इस डोज़ियर में एक व्यापक बोलसोनारो-विरोधी मोर्चा या संकीर्ण वाम मोर्चा बनाने की बहस से लेकर लूला को झूठे भ्रष्टाचार के आरोपों से अभी हाल ही में रिहाई मिलने व अगले राष्ट्रपति चुनाव में लड़ सकने के लिए इजाज़त मिलने तथा चुनाव पर इससे पड़ने वाले प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई है।

 

Cristiano Siqueira (@crisvector) / Design Ativista, Atenção, novo sentido (‘Attention: new direction’), 2019.

क्रिस्टियानो सिक़ैरा (@crisvector)/ डिज़ाइन एटिविस्ता, ‘ध्यान दें: नयी दिशा’, 2019

 

हाल ही में जारी हुए सर्वेक्षणों के अनुसार लूला पहले दौर में बोलसोनारो के 23% की तुलना में 41% के साथ आगे हैं; दूसरे दौर के सभी सर्वेक्षणों में, लूला अपने विरोधियों को हरा चुके हैं (उदाहरण के लिए, बोल्सनारो के 32% के मुक़ाबले उन्हें 55% वोट मिलेंगे)। एमएसटी के नेता केली माफ़ोर्ट का कहना है कि ‘लूला फ़ैक्टर ब्राज़ील के वामपंथ पर ज़बरदस्त प्रभाव डालता है। वर्तमान स्थिति में तात्कालिक आवश्यकता यह है कि वो ब्राज़ील की समस्याओं को हल करने में एक नेता की भूमिका में बने रहें, लेकिन [उनकी उपस्थिति] कार्यकर्ताओं को आधारभूत निर्माण कार्य करने, एकजुटता कार्यों का विस्तार करने और फ़ासीवादी बोलसोनारोवाद [जो कि मज़दूर वर्ग में फैल रहा है] का सामना करने के लिए प्रेरित भी करती है’। बोलसोनारोवाद को जड़ से ख़त्म करने के लिए ब्राज़ील को महामारी के दौरान बोलसोनारो के आपराधिक व्यवहार का हिसाब भी लेना होगा; बोलसोनारो पर हेग के अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में मानवता के ख़िलाफ़ अपराध करने का आरोप लगाया जा चुका है। बोलसोनारो द्वारा अपनाई गई नरसंहार की नीतियों का प्रमाण जून 2020 में कायापो के चीफ़ रौनी मेटुक्टायर ने सामने लाया था, जिन्होंने कहा था, ‘राष्ट्रपति बोलसोनारो वायरस का फ़ायदा उठाना चाहते हैं; वो कह रहे हैं कि इंडियन नस्ल को लोगों को मरना होगा’।

माफ़ोर्ट तथा डोज़ियर के लिए इंटर्व्यू देने वाले अन्य सभी नेताओं ने प्रमुख वर्गों में आधार बनाने की आवश्यकता के बारे में बात की। उन्होंने ज़ोर दिया कि चुनाव जीतना मौलिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन ब्राज़ील के लिए केवल राष्ट्रपति पद जीतने से बढ़कर एक नयी परियोजना चलाने के लिए, मज़दूर वर्ग और किसानों की ताक़त का निर्माण करना आवश्यक है। इस नयी परियोजना की रूपरेखा में ब्राज़ील में महामारी के बाद के परिदृश्य और ब्राज़ील के लिए एक स्वतंत्र, अंतर्राष्ट्रीय विदेश नीति जैसे महत्व के कार्यक्रम शामिल होंगे।

 

Letícia Ribeiro (@telurica.x), photography by Giovanni Marrozzini / Design Ativista, Guardiãs (‘Guardians’), 2019.

लेटिसिया रिबीरो (@telurica.x), जियोवानी मार्रोज़िनी के दववर ली गई तस्वीर/ डिज़ाइन एटिविस्टा, अभिभावक, 2019.

 

पिछले साल से, संयुक्त राज्य अमेरिका फ़िलिस्तीनियों की वैध आकांक्षाओं को दरकिनार कर अपनी राजनीतिक श्रेष्ठता का इस्तेमाल कर कई अरब राजशाहियों (जैसे मोरक्को और संयुक्त अरब अमीरात) को इज़रायल को मान्यता देने के लिए मजबूर कर चुका है। यदि विश्व मंच पर अमेरिका को चुनौती नहीं दी जाती है तो फ़िलिस्तीनी अधिकारों को दरकिनार करने की यह प्रक्रिया जारी रहेगी। वास्तविक बहुध्रुवीयता ही अमेरिका को फ़िलिस्तीनियों, यमनियों, सहरावियों व अन्यों के ख़िलाफ़ अपने बल का उपयोग करने से रोक सकेगी। ब्राज़ील और भारत जैसे देशों में -अमेरिकी हितों के अधीन- शासक वर्गों की हार, फ़िलिस्तीन से लेकर कोलंबिया तक दुनिया के लोगों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है।

 

 

2014 में, जब इससे पहले इज़रायल ने ग़ाज़ा पर इस स्तर की बमबारी की थी, तब इराक़ी कवि सिनान एंटून ने परिवारों को अपने घरों से निकलकर संयुक्त राष्ट्र संघ के स्कूलों, जिन पर भी बम गिराए गए थे,  की ओर जाते देखा। उन्होंने एक बच्चे और उसके दादा (सिदु) के बीच बातचीत पर आधारित एक कविता लिखी थी। वे जाफ़ा (जो कि अब इज़रायल में है) के बारे में बात कर रहे हैं और फ़िलिस्तीनियों के लौटने के अधिकार के बारे में सोच रहे हैं, जिसकी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 194 (1948) में गारंटी दी गई है।

क्या हम वापस जाफ़ा जा रहे हैं, सिदू?
हम नहीं जा सकते
क्यों?
हम मर चुके हैं
तो क्या हम स्वर्ग में हैं, सिदू?
हम फ़िलिस्तीन में हैं, हबीबी
और फ़िलिस्तीन स्वर्ग है
और नरक भी।
अब हम क्या करेंगे?
हम इंतज़ार करेंगे
इंतज़ार किसका?
दूसरों का
….
उनके लौटने का

स्नेह-सहित,

विजय।