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Kael Abello, Utopix (Venezuela), Batalla de Carabobo (‘Battle of Carabobo’), 2021.

काएल एबेलो, यूटोपिक्स (वेनेज़ुएला), काराबोबो की लड़ाई, 2021.

 

प्यारे दोस्तों,

ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन। इस सप्ताह की ख़बर काराबोबो, वेनेज़ुएला से।

दो सौ साल पहले, 24 जून 1821 को, सिमोन बोलिवर की सेना ने काराकास, वेनेज़ुएला से कुछ सौ किलोमीटर पश्चिम में स्थित काराबोबो की लड़ाई में स्पैनिश राजभक्तों को बुरी तरह हराया था। पाँच दिन बाद, विजयी बोलिवर ने काराकास में प्रवेश किया; कार्टाजेना और प्यूर्टो कैबेलो के क़िलों पर इस मुक्तिदाता की सेनाओं ने क़ब्ज़ा कर लिया, और स्पेन के लिए सत्ता में वापसी करना असंभव बना दिया। कुकुटा में, एक नये संविधान का मसौदा तैयार करने और बोलिवर को राष्ट्रपति के रूप में चुनने के लिए एक कांग्रेस बुलाई गई।

बोलिवर, जिन्हें ग्रैन कोलंबिया गणराज्य (आज के कोलंबिया, वेनेज़ुएला, पनामा और इक्वाडोर) के प्रमुख के रूप में चुना गया, वहीं तक रुकने वाले नहीं थे। अपने घोड़े पर सवार होकर वो दक्षिण में क्विटो की ओर बढ़े, जहाँ स्पेन की सेनाएँ अब भी मौजूद थीं, और अंततः 24 मई 1822 को पिचिंचा की लड़ाई में स्पेन की सेना की हार हुई। फिर भी स्पेन को उस हिस्से से पूरी तरह बाहर निकालने में दो साल और लगे, लेकिन ये होना निश्चित था। काराबोबो की लड़ाई ने स्पेनिश राजशाही की साम्राज्यवादी उत्साह को ठंडा कर दिया था।

स्पेनिश राजशाही लैटिन अमेरिका पर अपनी पकड़ खो चुकी थी, लेकिन अब नये प्रकार के ख़तरे सामने आए। 2 दिसंबर 1823 को अमेरिकी राष्ट्रपति जेम्स मोनरो ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि लैटिन अमेरिका पर अब पुरानी यूरोपीय शक्तियों का अधिकार नहीं रहा। लेकिन मोनरो सिद्धांत का मतलब यह नहीं था कि ग्रान कोलंबिया सहित लैटिन अमेरिका के विभिन्न हिस्से संप्रभु हो जाएँ। मोनरो सिद्धांत का उद्देश्य था कि संयुक्त राज्य अमेरिका दक्षिणी अमेरिका के प्रति उस तरह का व्यवहार कर सकता है जैसा पुरानी शाही शक्तियाँ करती थीं। यह प्रवृत्ति अमेरिकी सैन्य प्रौद्योगिकी में सुधार होने के साथ-साथ अधिक-से-अधिक स्पष्ट होती चली गई। मोनरो सिद्धांत के उद्देश्यों के बारे में स्पष्टता दो तरह से मिली। सबसे पहले, संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यवहार के माध्यम से, जिसके सशस्त्र बलों ने पेरू (1835-36) से लेकर ग्वाटेमाला (1885) तक और क्यूबा से लेकर प्यूर्टो रिको (1898) तक पूरे महाद्वीप में सीधे हस्तक्षेप किया। दूसरा, अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूज़वेल्ट के 1904 के सिद्धांत के माध्यम से, जिसमें -रूज़वेल्ट के शब्दों में- गोलार्ध में एक ‘अंतर्राष्ट्रीय पुलिस शक्ति’ के रूप में कार्य करने का अमेरिका का अधिकार शामिल था।

César Mosquera, Utopix (Venezuela), Pueblos originarios (‘Indigenous Peoples’), 2021.

सीज़र मॉस्केरा, यूटोपिक्स (वेनेज़ुएला), ‘स्वदेशी लोग’, 2021.

बोलिवर इस नये ख़तरे की प्रकृति को समझ रहे थे। ब्रिटिश चार्ज डी’एफ़ेयर्ज़ पैट्रिक कैंपबेल को 1829 में लिखे एक पत्र में बोलिवर ने लिखा है कि ऐसा लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ‘स्वतंत्रता के नाम पर लैटिन अमिरिका को अनंत दुखों से पीड़ित करने के लिए विधि द्वारा पहले से ही चुना जा चुका है’। यही कारण है कि उन्होंने राजनीतिक एकता का एक मंच बनाने के लिए 1826 में पनामा में एक कांग्रेस का आह्वान किया। दुर्भाग्यवश, नये राज्यों में से कुछ ही पनामा आए। क्षेत्रीय एकता एक सपना बन कर रह गया, पर एक ऐसा सपना जिसे समय-समय पर हक़ीक़त बनाने वाले मिलते रहे हैं।

इक्कीसवीं सदी में, ह्यूगो शावेज़ ने लैटिन अमेरिका में क्षेत्रीय एकता की परियोजना का काम अपने ज़िम्मे ले लिया। वेनेज़ुएला और लैटिन अमेरिका की क्रांतिकारी प्रक्रियाओं को उन्होंने बोलिवेरियन क्रांति का नाम दिया था। शावेज़ ने कहा था कि, ‘1810 और 1830 की अवधि के बीच के इतिहास में हम जो देखते हैं वह दक्षिण अमेरिका के लिए एक राष्ट्रीय परियोजना की रूपरेखा है’। इसी परियोजना को शावेज़ ने वेनेज़ुएला के अंदर और इस क्षेत्र में बोलिवेरियन अलायंस फ़ॉर पीपुल्स ऑफ़ आवर अमेरिका (ALBA) और यूनियन ऑफ़ साउथ अमेरिकन नेशंस (UNASUR) के माध्यम से विकसित किया था, जिनकी स्थापना 2004 में हुई।

1998 में शावेज़ की पहली चुनावी जीत के बाद से, संयुक्त राज्य अमेरिका बोलिवेरियन प्रक्रिया को पटरी से उतारने का प्रयास करता रहा है। अमेरिकी नीति से मोनरो की दुर्गंध आती है, जबकि वेनेज़ुएला के प्रतिरोध को काराबोबो से प्रेरणा मिलती है। वेनेज़ुएला के ख़िलाफ़ अमेरिकी प्रतिबंध, जिनका एकमात्र उद्देश्य है बोलिवेरियनवाद को नष्ट करना, महामारी के बावजूद भी जारी है। पिछले साल, अमेरिकी ट्रेज़री विभाग के दबाव के कारण अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वेनेज़ुएला को अपने स्वयं के फ़ंड्ज़ और महामारी-संबंधित अन्य आपातकालीन फ़ंड्ज़ का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी। अप्रैल और मई 2021 के बीच, वेनेज़ुएला ने स्विस बैंक यूबीएस को कोविड-19 टीके ख़रीदने के लिए कोवैक्स तंत्र को 10 मिलियन डॉलर का भुगतान करने के लिए अधिकृत किया। 7 जून को, कोवैक्स ने वेनेज़ुएला की सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया कि यूबीएस ने भुगतान रोक दिया है। बैंक के ऊपर अमेरिकी नीति का भारी दबाव था।

 

Valentina Aguirre, Utopix (Venezuela), Llaneros, 2021.

वैलेंटीना एगुइरे, यूटोपिक्स (वेनेज़ुएला), मैदानों पर रहने वाले, 2021.

वेल्स में हुई जी-7 की बैठक में, संयुक्त राज्य अमेरिका से लेकर जर्मनी तक की सात सरकारों ने टीकों के प्रावधान के प्रति तीखी भाषा इस्तेमाल करने पर सहमति व्यक्त की। दुनिया भर में सौ करोड़ टीके बाँटने का वादा बिना किसी विशेष विवरण के किया गया था; यह सर्वविदित है कि जी-7 की बैठकों में किए गए वादों को शायद ही कभी पूरा किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सौ करोड़ टीकों के बारे में छपी हेडलाइनों पर सवाल करते हुए कहा था कि ‘हमें इससे ज़्यादा की ज़रूरत है’। ‘हमें एक वैश्विक टीकाकरण योजना की आवश्यकता है’, जिसके लिए टीकों का उत्पादन बढ़ाने और ‘वैश्विक टीकाकरण परियोजना को डिज़ाइन करने और उसके कार्यान्वयन की गारंटी के लिए एक आपातकालीन कार्य बल’ की आवश्यकता होगी।

इस दिशा में, एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका की तीन महत्वपूर्ण आवाज़ों — के के शैलजा (पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, केरल, भारत), अन्यांग ‘न्योंगो (किसुमू काउंटी, केन्या के गवर्नर), और रोजेलियो मायटा (विदेश मंत्री, बोलीविया) — ने मिलकर वैक्सीन अंतर्राष्ट्रीयतावाद के बारे में लिखा है। उनके तीन प्रस्ताव हैं:

  1. टीकों पर बौद्धिक संपदा पेटेंट हटाए जाएँ।
  2. टीके बनाने के तरीक़े के बारे में ज्ञान साझा किया जाए।
  3. बौद्धिक संपदा अधिकारों को ख़त्म करने के लिए सामूहिक अवज्ञा पर ध्यान दिया जाए।

तीसरे प्रस्ताव को समझने के लिए, उनके ही शब्दों को पढ़ना ज़रूरी है, जिनमें से काराबोबो की भावना की ख़ुशबू आती है:

बौद्धिक संपदा सुरक्षा की अवहेलना करने के लिए कुछ प्रावधान पहले से मौजूद हैं, उदाहरण के लिए, विश्व व्यापार संगठन की 2001 की दोहा घोषणा। फिर भी देश कुछ सरकारों के प्रतिबंधों और बड़ी फ़ार्मा कंपनियों के प्रतिशोध के डर के कारण ऐसा करने से हिचकिचाते हैं। हम इस बात पर विचार करेंगे कि हम सामूहिक रूप से बौद्धिक संपदा सुरक्षा की अवहेलना करने के लिए राष्ट्रीय क़ानून कैसे पेश कर सकते हैं, ताकि वर्तमान में चल रहे एकाधिकार फ़ार्मास्युटिकल मॉडल के सामने एक विश्वसनीय ख़तरा प्रस्तुत किया जा सके।

सामूहिक अवज्ञा के प्रस्ताव में दो प्रमुख तत्व हैं। एक, यदि कोई देश हर चीज़ से पहले बड़ी फ़ार्मा कंपनियों को फ़ायदा पहुँचाने वाले बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार-संबंधित पहलुओं (ट्रिप्स) को तोड़ने की कोशिश करे तो ‘कुछ सरकारें’ उसके ख़िलाफ़ जिस संगदिली से प्रतिबंध लगा देंगी, इस प्रस्ताव में उसका अभिज्ञान स्पष्ट है। दूसरा, यह प्रस्ताव दक्षिणी गोलार्ध के देशों को ज्ञान पर वर्चस्व बनाकर बैठी बड़ी फ़ार्मा कंपनियों को घेरने के लिए अपने देशों के भीतर क़ानूनी साधनों को खोजने का साहसिक सुझाव देता है। इस अंतिम सुझाव में यथार्थवाद का संकेत है। यह कहीं अधिक बेहतर और प्रभावशाली होगा कि दक्षिण के देश -विशेष रूप से वे पच्चीस देश जो स्वास्थ्य देखभाल की तुलना में ऋण सेवा पर अधिक ख़र्च करते हैं- एक साथ मिलकर वैक्सीन अंतर्राष्ट्रीयतावाद के हक़ में एक गुट बना लें।

लेकिन इस प्रकार की व्यापक क्षेत्रीय एकजुटता आज आसानी से उपलब्ध नहीं है, क्योंकि क्षेत्रीय और वैश्विक मंच -जिसमें 60 साल पुराना गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनयेएम) भी शामिल है- काफ़ी कमज़ोर हो गए हैं। क्षेत्रीय एकजुटता को मज़बूत करना ही शावेज़ और बोलिवेरियन आंदोलन का कार्यक्रम था।

César Mosquera, Utopix (Venezuela), Ejército de Zamora (‘Zamora Army’), 2021

सीज़र मॉस्केरा, यूटोपिक्स (वेनेज़ुएला), ज़मोरा सेना, 2021.

शावेज़ का मानना था, क्षेत्रीय एकजुटता वैश्विक निगमों और राष्ट्रीय अभिजात वर्ग के हितों को आगे बढ़ाने के लिए सामान्य बाज़ारों और संस्थानों का एक मंच भर नहीं हो सकती। उदाहरण के लिए, जैसी क्षेत्रीय एकजुटता यूरोपीय संघ को परिभाषित करती है। न ही संस्कृति की विचारधारा द्वारा सीमित क्षेत्रीय एकजुटता -जैसी की हमें अखिल अरबवाद और अखिल एशियाईवाद के रूप में देखने को मिलती है- को विकसित करना पर्याप्त है।

वैश्विक निगमों की अपार शक्ति को चुनौती देना ज़रूरी हो गया है, लेकिन ये चुनौती आज के संदर्भ में कोई एक देश नहीं खड़ी कर सकते, क्योंकि ऐसे अकेले देश के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं और अन्य ख़तरे खड़े किए जा सकते हैं। आज ज़रूरत है एक व्यापक मंच की, पूरे-पूरे महाद्वीपों या दुनिया के उन हिस्सों के बीच एकजुटता की जो जी-7 या इस या उस वैश्विक निगम की मनमानियों को मानने से इनकार करते हैं। इस प्रकार के क्षेत्रवाद का अर्थ केवल किसी एक महाद्वीप के देशों की एकता नहीं है; इसके लिए आवश्यक है कि कम-से-कम कुछ प्रमुख देशों में राज्य सत्ता मज़दूर वर्ग और किसानों के हाथों में हो। केवल जनता की ताक़त द्वारा समर्थित सरकारें ही ‘कुछ सरकारों’ के रोब और उनकी शक्ति को चुनौती देने की हिम्मत कर सकेंगी। शैलजा, न्योंगो और मायटा ने सोच-समझकर ये बातें कही हैं।

Daniel Duque, Utopix (Venezuela), Comunas socialistas (‘Socialist Communes’), 2021.

डैनियल ड्यूक, यूटोपिक्स (वेनेज़ुएला), समाजवादी कम्यून, 2021.

 

जब बोलिवर अपने अंतिम दिनों में (आज के कोलंबिया में स्थित) सैंटा मार्टा में अपनी मृत्युशय्या पर थे, उनका डॉक्टर उन्हें फ़्रांसीसी समाचार पत्र पढ़कर सुनाता था। उन समाचार पत्रों में उन्हें एक गीत मिला, जिसे 1830 की जुलाई क्रांति के क्रांतिकारी पेरिस पर क़ब्ज़ा करने के लिए होटल डी विले में प्रवेश करते समय गा रहे थे:

अमेरिका, हमें ख़ुश करने के लिए,

देखता है दूर से हमें।

गणराज्यों की आग लौ जिसके लिए

जलाया था बोलिवर ने।

वेनेज़ुएला के कम्यून्स में, कोलंबिया की गलियों में, भारत में किसानों के विद्रोह में और दक्षिण अफ़्रीका की झोंपड़पट्टियों में काराबोबो की यादों की गरमाहट बरक़रार है।

स्नेह-सहित,

विजय।