कितना अच्छा होगा कि मेक्सिको एक ख़ुशनुमा जगह बन जाए: सैंतीसवाँ न्यूज़लेटर (2025)
दशकों के नवउदारवाद के बाद, मेक्सिको क्रांति के वादों के साथ क्या मोरेना का चौथा परिवर्तन काल देश की गरिमा और संप्रभुता बहाल कर सकता है?
प्यारे दोस्तो,
ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।
मैं ग्रैजुएशन करने के दौरान एक बार सिर्फ़ फ़्रीडरिक काट्ज़ (1927-2010) को सुनने के लिए उनकी क्लास में बैठा था। काट्ज़ (1927-2010) मेक्सिको के अपनी पीढ़ी के सबसे बेहतरीन इतिहासकारों में से थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान काट्स के पिता लियो पत्रकार थे और बर्लिन में नाज़ी विरोधी आंदोलन में शामिल थे, बाद में वे ज़रूरत पड़ने पर फ़्रांस से हथियार छिपाकर स्पैनिश रिपब्लिक लेकर गए। जब नाज़ियों ने फ़्रांस पर आक्रमण किया तो लियो और उनकी पत्नी ब्रोनिया राइन (दोनों यहूदी कम्युनिस्ट) भागकर मेक्सिको चले गए जहाँ राष्ट्रपति लाज़ारो कार्डेनास की सरकार ने फ़ासीवाद से बचकर आए या स्पैनिश रिपब्लिक के लिए लड़ने वाले लोगों के लिए अपने देश के दरवाज़े खोल दिए थे।
फ़्रीडरिक काट्ज़ मेक्सिको में ही पले-बढ़े। अपने देश के प्रति उनके भीतर गहरा लगाव था। मेक्सिको क्रांति पर अपने सेमिनार में, वह जनरल पोर्फिरियो डियाज़ (1876-1911) की सैन्य तानाशाही, पोर्फिरियाटो को उखाड़ फेंकने वाले आम लोगों के बारे में अद्भुत किस्सों से हमें मंत्रमुग्ध कर देते थे। मेरे पसंदीदा किस्सों में से एक उस दिन का था जब एमिलियानो जापाटा की एजरसिटो लिबर्टाडोर डेल सुर (दक्षिण की मुक्ति सेना) पंचो विला की डिवीजन डेल नोर्ते (उत्तरी डिवीजन) के साथ मेक्सिको सिटी में दाखिल हुई। दोनों लोग जोकालो में स्थित नेशनल पैलेस गए जो उन्हें अजीब लगा। वे दोनों मोरेलोस (जापाटा के लिए) और डुरांगो (विला के लिए) के अपने ग्रामीण इलाक़ों में लौटकर कृषि क्रांति जारी रखना चाहते थे। काट्ज़ हंसते हुए कहते, ‘मैं भी उनके साथ वापस गाँव लौट जाता‘।
प्रोफ़ेसर काट्ज़ ने ही मुझे जॉन रीड की इन्सर्जेंट मेक्सिको (1914) [बाग़ी मेक्सिको] की पहली प्रति दी थी। यह क़िताब क्रांति की रिपोर्टिंग के सबसे बेहतरीन नमूनों में से एक है, इससे बेहतर क़िताब अगर कोई होगी तो वह भी 1919 में बोल्शेविक क्रांति पर लिखी रीड की ही क़िताब ‘दस दिन जब दुनिया हिल उठी’ ही कही जाएगी। रीड जपाटा और विला दोनों ही इलाक़ों में कुछ वक़्त रहे और अपनी क़िताब में मेक्सिको के लिए पंचो विला के एक खूबसूरत सपने पर एक अध्याय लिखा:
हम सेना को काम देंगे। सारे गणराज्य में हम सैन्य कॉलोनियाँ बसाएँगे जिनमें पुराने क्रांतिकारी रहेंगे। राज्य उन्हें खेती के लिए और बड़े उद्योग लगाने के लिए संसाधन देगा ताकि वे काम कर सकें। हफ़्ते में तीन दिन वे जीतोड़ मेहनत से काम करेंगे, क्योंकि ईमानदारी से अपना काम करना संघर्ष से भी ज़्यादा ज़रूरी है, और सिर्फ़ ईमानदारी से काम करके ही एक अच्छा नागरिक बना जा सकता है। बाक़ी के तीन दिन उन्हें सेना के आदेश मिलेंगे और वे लोगों को लड़ना सिखाएँगे। फिर जब पैट्रीया [मेक्सिको सिटी स्थित लोकप्रसिद्ध स्मारक] पर चढ़ाई की जाएगी तो हमें बस मेक्सिको सिटी के महल से टेलीफ़ोन घुमाने की देर है और आधे दिन में मेक्सिको की जनता अपने खेतों और फ़ैक्टरियों से निकलकर हथियारों से लैस और संगठित होकर अपने बच्चों और घरों की रक्षा के लिए आ जाएगी।
मेरी इच्छा है कि मैं अपने जिन कॉमरेड से इतना प्यार करता हूँ उनके बीच उन सैन्य कॉलोनियों में रहूँ, मेरे कॉमरेड जिनके साथ मैंने एक लंबे अरसे तक इतने कष्ट झेले हैं। मैं चाहता हूँ कि सरकार एक चमड़े की फ़ैक्टरी लगाए जहाँ हम अच्छी काठियाँ और लग़ाम बनाएँ क्योंकि ये मुझे आता है, बाक़ी के वक़्त मैं अपने छोटे से खेत में काम करने, मवेशी पालने और मक्का उगाने में बिताना चाहूँगा। मुझे लगता है कि मेक्सिको को एक ख़ुशनुमा जगह बनाने में मदद करना एक अच्छा काम होगा।
यह कितना अद्भुत सपना है।
मेक्सिको ने 1821 में स्पेन से आज़ादी हासिल की। तब से ही यह संघर्ष कर रहा है, पहले-पहल स्पेन के उत्तर-उपनिवेशवादी व्यवस्था से अलग होने का संघर्ष जिसने इसे सिर्फ़ सस्ता कच्चा माल निर्यातक बनाए रखा था, और फिर संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) द्वारा संचालित साम्राज्यवादी व्यवस्था से संघर्ष, जिसके नव-उदारवादी चंगुल में अंतर्राष्ट्रीय श्रम विभाजन में अपनी गौण भूमिका के कारण यह आज तक फँसा हुआ है। 2017 में मेक्सिको सिटी की सरकार के पूर्व प्रमुख और दो बार (2006 और 2012) राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रह चुके, अंद्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर – जिन्हें AMLO के नाम से भी जाना जाता है – की 2018 ला सालिदा: डेकाडेंसिया वाई रेनासिमिएंटो डी मेक्सिको (2018 द एग्जिट: मेक्सिको का पतन और पुनर्जन्म) नाम से एक क़िताब छपी। यह क़िताब 2018 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए AMLO के सफल प्रचार का दस्तावेज़ी आधार बनी। जिससे साबित हुआ कि इसमें दिए गए उनके राष्ट्रीय पुनरुत्थान आंदोलन (Movimiento de Regeneración Nacional, Morena) का विचार मेक्सिको को अपने चौथे परिवर्तन काल (4T) की ओर लेकर जाएगा। AMLO के मुताबिक़ इससे पहले के तीन परिवर्तन काल थे, स्वतंत्रता की लड़ाई (1810-1821), सुधारों की लड़ाई (1858-1861) और मेक्सिको क्रांति (1910-1917)। उनके मुताबिक़ मेक्सिको के लिए ऐसा राष्ट्रपति शासन बेकार होगा जिसमें सिर्फ़ सतही सुधार किए जाएँगे, क्योंकि देश को ज़रूरत है आमूलचूल परिवर्तन की है।
AMLO ने अपना अजेंडा मेक्सिको के इतिहास के सबसे नाटकीय दौर के आधार पर तैयार किया। उनका मानना था कि दशकों तक यूएस के वर्चस्व में रहने, मेक्सिको के अमीर वर्ग के शासन के फैलाए भ्रष्टाचार और 1917 के संविधान की रक्षा करने की नौकरशाही में ख़त्म हो चुकी राजनीतिक इच्छाशक्ति के चलते मेक्सिको क्रांति के वादे लगभग भुलाए जा चुके थे।
ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान ने Mexico and the Fourth Transformation (सितंबर 2025) [मेक्सिको और परिवर्तन की चौथी लहर] नाम से डोसियर न. 92 निकाला है। इसका शोधकार्य और लेखन किया है स्टेफ़नी वेदरबी ब्रीटो (इंटरनेशनल पीपल्स असेम्ब्ली से जुड़ीं) और अलीना ड्वार्टे (मोरेना के नेशनल इंस्टिट्यूट फ़ॉर पॉलिटिकल एजुकेशन से जुड़ीं) ने मिलकर। मेरे ख़याल से यह पहला दस्तावेज़ है जो मोरेना आंदोलन को उसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रखता है और 4T की सामाजिक प्रक्रिया को समझाता है। इसमें बताया गया है कि कैसे मोरेना आंदोलन के नायकों ने तीस साल की कड़ी मेहनत से कुआउतेमोक कार्डेनस के मेक्सिको की राजनीति को सुधारने के लंबे प्रयासों और उनके पिता लज़ारो कार्डेनस के राष्ट्रपति शासन (1934-1940) के वादों के बीच से एक राजनीतिक कार्यक्रम गढ़ा। AMLO और मौजूदा राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम से पहले आए चौंसठ राष्ट्रपतियों में से लज़ारो कार्डेनस सबसे ज़्यादा वामपंथी सोच रखने वाले राष्ट्रपति थे। कार्डेनिस्मो के नाम से जानी जाने वाली इन नीतियों में शामिल है: यूएस के दख़ल से आज़ादी, मेक्सिको के संसाधनों पर नियंत्रण (इसमें 1938 में तेल का राष्ट्रीयकरण भी शामिल है), कृषि सुधार (इसमें शामिल हैं ज़मींदारों की सत्ता को कमज़ोर करने के लिए ग्रामीण स्कूलों की स्थापना और एजीदोस के नाम से कृषि उत्पादन में एक समावेशी पारिवारिक इकाई की शुरुआत), और सामाजिक विकास (शिक्षा को व्यापक जनता तक पहुँचाकर, मज़दूर संगठनों को समर्थन देकर, और मेक्सिको के मूलनिवासियों की संस्कृतियों को सम्मान देकर)। मोरेना का 4T कॉर्डेनिस्मो के संप्रभुता और गरिमा के सिद्धांतों पर आधारित है, इसे इक्कीसवीं सदी के मुताबिक़ ढाल दिया गया है। यह डोसियर उन लोगों के लिए पढ़ने और पढ़ाने के लिए एक बेहतरीन दस्तावेज़ है जो मेक्सिको के सफ़र को जानना चाहते हैं: एक सफ़र जो ईश्वर से दूर और यूनाइटेड स्टेट्स के काफ़ी क़रीब रहा (¡Pobre México! Tan lejos de Dios, y tan cerca de los Estados Unidos) – यह अल्फ़ाज़ पोर्फ़िरीयो डीआज़ के हैं जिन्हें मेक्सिको क्रांति के बाद सत्ता से हटाया गया था।
मेक्सिको के चारों परिवर्तन कालों में बेहतरीन कला और संस्कृतियों का निर्माण हुआ और 4T भी इससे अलग नहीं। इस डोसियर में शामिल कलाकृतियाँ Los Nadies भित्तिचित्र शृंखला से ली गई हैं, ये मेक्सिको के ओक्साका स्थित Colectivo Subterráneos की रचनाएँ हैं। इसकी स्थापना 2021 में हुई थी ताकि कला का लोकतांत्रीकरण किया जा सके जिससे वह सामाजिक बदलाव का माध्यम बने। यह कलेक्टिव मेक्सिको की ग्राफ़िक परंपरा से प्रेरणा लेता है – Taller de Gráfica Popular (पीपल्स ग्राफ़िक शॉप) से लेकर मेक्सिको के भित्तिचित्रों की परंपरा तक, और साथ ही 2006 के ओक्साका के पॉप्युलर टीचर्स मूवमेंट से भी। एदुआर्दो गलेआनो की इसी नाम की कविता से प्रेरित, इस श्रृंखला में ऐसे प्रिंट और भित्तिचित्र शामिल हैं जो उन स्वदेशी और मेस्टिज़ो लोगों को उजागर करते हैं जिन्हें औपनिवेशिक शासन और आधुनिक पूंजीवादी दौर में भुला दिया गया था। यह श्रृंखला हाशिए पर रखे गए लोगों के प्रति ऐतिहासिक ऋण को सबके सामने रखती है और उन आवाज़ों को मजबूती देती है जो परिवर्तनशील मेक्सिको में न्याय की मांग कर रही हैं।
जहाँ नए आंदोलन नए प्रकार की कला का सृजन करते हैं, वहीं कुछ ऐसे कलाकार भी हैं जिनका काम इन आंदोलनों को आवाज़ देता है। कवि एनरिक मार्केज़ हारामिलो (जन्म 1950) ने एक तीखी, अतियथार्थवादी शैली विकसित की जो उनके जीवनकाल में मैक्सिको को हिला देने वाले विद्रोहों और क्रमिक सरकारों में नौकरशाही में रचे-बसे भ्रष्टाचार को दर्शाती थी। 1996 में, उन्होंने “ब्रेवे डिक्शनारियो पारा मेक्सिकानोस फ्यूरियोसोस” (मेक्सिको की क्रोधित जनता के लिए संक्षिप्त शब्दकोश) लिखा, जिसमें उस आबादी के मन की बात थी जो नवउदारवादी हमले में जी रही थी। उनकी यही व्यंग्यात्मक भावना 2012 में लौटी, जब उन्होंने मेक्सिको सिटी में “कुम्ब्रे मुंडियल डे इंडिग्नाडोस, डिसिडेंट्स ई इंसुरजेंट्स” (क्रोधितों, असंतुष्टों और विद्रोहियों का शिखर सम्मेलन) आयोजित किया। असंतुष्ट और क्रोधित धाराओं के इस गठबंधन ने मिलकर 2018 में AMLO को जिताया। इसलिए हारामिलो की सबसे आशावादी कविताओं में से एक – ‘बार्को ए ला डेरिवा‘ (भटकती हुई नाव) को याद करना चाहिए, जो उनके 1982 के संग्रह “एन एल कैन्यो डेल मुंडो क्यू रिकैन्या उयुयुय” (जिसका मोटे तौर पर अनुवाद है: दुनिया का वह नाला जो हाय हाय करता है) का हिस्सा है:
हमें इस जहाज़ को बचाना होगा,
इसके नाविकों,
इसके सामान सहित।
बचा लो इसे, तुम, तुम जो जानते हो
शांत करना, उपद्रव
इंजनों का और लहरों की दहाड़ें
अपनी उँगली के स्पर्श भर से,
अपनी हँसी के मरहम से।
इस अल्हड़ जहाज़ को भटकने मत देना
डूबने मत देना।
इसे तुम सँभाल लो,
रास्ता दिखाओ इसे
कि पहुँचे ये अपने सीले घाट तक,
और फिर देखना ये कैसे शांत करता है
इस भूखी आग़ को
जो मुझे खाए डालती है।
स्नेह सहित,
विजय