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चरम दक्षिणपंथ और ऐसा क्या कर सकता है जो अब तक नहीं हुआ?: पैंतीसवाँ न्यूज़लेटर (2025)

वैश्विक उत्तर के उदारवादियों और सामाजिक जनतंत्रवादियों की निष्क्रियता और सहभागिता ने दुनियाभर में ख़ास क़िस्म के चरम दक्षिणपंथ के विकास की ज़मीन तैयार की है।

महमूद अजौर, उम्र नौ साल, समर अबु एलौफ (फ़िलिस्तीन), 2025

प्यारे दोस्तो,

ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।

समर अबु एलौफ ने ऊपर दी गई तस्वीर के लिए साल 2025 का वर्ल्ड प्रेस फ़ोटो पुरस्कार जीता। 12 अगस्त को वे अपने इंस्टाग्राम पर लिखती हैं कि उनके बेटे के क़रीबी दोस्त समी शुकूर को उस वक़्त मार गिराया गया जब वह अपने और अपने परिवार के लिए खाने का बंदोबस्त करने बाहर गया था। समर ने समी के ग्रैजुएट होने पर उनकी तस्वीर ली थी, यह अक्टूबर 2023 में शुरू हुए मौजूदा जनसंहार से ठीक पहले की बात है। फ़िलिस्तीन में हलवा और तहिनी बनाने वाली सबसे मशहूर कंपनी समी के परिवार की ही है। बक़ौल समर इनका स्वाद ग़ज़ा के सबसे बेहतरीन में से एक’ है। वे आगे लिखती हैं कि समी गोलियों की घातक बारिश में मारा गया, इस हमले की आवाज़ ही दिल दहला देने वाली थीहम लोग सिर्फ़ कोई आंकड़ा नहीं हैं; हम सबकी अपनी-अपनी एक कहानी है 

हम अब साल 2025 के आख़िरी तिमाही में प्रवेश करने वाले हैं, जल्द ही एक नया साल आ जाएगा। लेकिन यह भी एक प्रलय का अंदेशा ही लगता है। जिधर देखो उधर से ही सत्ता के गलियारों में ख़ास क़िस्म के चरम दक्षिणपंथ की बू आ रही है, इसके नेता ही इस प्रलय पर सवार हैं। इनमें से किसी भी नेता के पास हमारे सामने पसरे किसी संकट का उपाय नहीं; बल्कि ये तो आग़ में घी डालने का काम कर रहे हैं। ये जलवायु परिवर्तन को ही नकार रहे हैं और साथ ही इंसानों के गरिमामय जीवन की ज़रूरत को भी। ये नेता समाज कल्याण पर सरकारी ख़र्च में बेजा कटौती करना चाहते हैं और युद्ध को बढ़ावा दे रहे हैं। ये तर्कहीनता और सामाजिक घुटन को बढ़ावा दे रहे हैं। 

दुनियाभर में विवेकशील लोग दक्षिणपंथ के उभार और विभिन्न समाजों के बड़े हिस्सों में इसके प्रति आकर्षण को लेकर काफ़ी स्तब्ध हैं। ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान में हमने दक्षिणपंथ के इस उभार का अध्ययन किया है। हमने जाँच की कि इसके राजनीतिक आधार की जड़ें कहाँ है और पाया कि वे: समाज में फैल रह एकाकीपन में हैं, ऐसे संस्थानों और समूहों के उभार में हैं जिनकी राजनीति इसकी राजनीति से मिलती है – जैसे धार्मिक समूहों और असंगठित अर्थव्यवस्थाओं के नए स्वरूप – और श्रमिक वर्ग तथा किसानों के वर्गीय संगठनों के कमज़ोर होने में हैं। हमारे विश्लेषण के नतीजे का एक हिस्सा यह भी बताता है कि सामाजिक जनवादियों और उदारवादियों ने राजनीतिक विघटन के कारण जो नवउदारवादी, समाज कल्याण में बजट कटौती की नीतियाँ अपनायीं, उन्होंने ही चरम दक्षिणपंथ के विकास की ज़मीन तैयार की। जब तक वे इस सच्चाई को मान नहीं लेते और अपनी नवउदारवाद-पूर्व नीतियों को फिर से नहीं अपनाते, तब तक यह सोचना कठिन है कि सामाजिक लोकतांत्रिक और उदारवादी ताक़तें विशेष किस्म की अतिदक्षिणपंथी राजनीति के ख़िलाफ़ संघर्ष में हमारी मज़बूत साथी बन पाएँगी।

पूरी दुनिया में सामाजिक जनवादी और उदारवादी उन नीतियों को फिर से अपनाने में असफल रहे हैं, साथ ही उदारवादी, ख़ासतौर से वैश्विक उत्तर के, इज़राइल द्वारा फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार को अपना समर्थन भी दे रहे हैं। इन सबसे परेशान होकर मैंने उन लोगों के नाम एक ख़तलिखा है जो अब भी इन सामाजिक शक्तियों के प्रति प्रतिबद्ध हैं, यह ख़त नीचे दिया गया है। यह उन सामाजिक जनवादियों और उदारवादियों के नाम लिखा गया है जो ऐसे राजनीतिक दलों में बैठे हैं जो अपने नाम को शर्मसार करते हैं – लेबर (यूके में), ग्रीन (जर्मनी में), डेमोक्रैटस (यूएस में) और लिबरल (जापान में)।

ब्रेक्जिट के नतीजे, लोबसांग डर्नी (चिली), 2019

आपने राज्य की वह सीमित तटस्थभूमिका भी त्याग दी है, जो पूँजीपतियों और मज़दूरों के बीच वर्ग-संघर्ष में कभी मौजूद थी। अब राज्य पर कुलीन वर्ग (ओलिगार्की) का नियंत्रण है, जहाँ नियम-क़ायदे न्यूनतम कर दिए गए हैं और मज़दूरों के अधिकार लगभग शून्य पर पहुँचा दिए गए हैं।

कुलीनतंत्र ने समाज में आग लगा दी है, फ़ैक्टरी चलाने के पुराने तरीक़ों को बर्बाद कर दिया, सस्ते श्रम वाले देशों में मशीनें भेज दीं और सट्टाबाज़ार की मदद से फ़ैक्टरी की ज़मीनों से मुनाफ़ा कमाया और आप देखते रहे। अब इन बंजर ज़मीन पर कोई रोज़गार नहीं बचा, बची हैं तो कुलीनतंत्र के मनमुताबिक़ नौकरियाँ और उबरकृत (uberised) नौकरियाँ जो आपस में निम्नस्तरीय सेवाएँ प्रदान करती हैं।

आपने भ्रष्ट राज्य से आग्रह किया कि वह कर में कटौती करे और बढ़ती बेरोज़गारी तथा ग़रीबी के दौर में सामाजिक सुविधाओं को कम करे। व्यक्तिवाद और निजी आकांक्षाओं की आग में ग़रीबों की मदद करने वाले पुराने उदार मूल्य जलकर ख़ाक हो गए, जो धन समाज कल्याण के लिए इस्तेमाल होता था अब उन वित्तीय बाज़ारों में उड़नछू हो गया है जहाँ कुलीनवर्ग के लोग दुनिया का पहला खरबपति बनने की होड़ में लगे हैं। जो पैसा पहले करों के ज़रिए समाज में लौट आता था, अब सट्टेबाज़ी जैसे धन बाज़ारों में अटका हुआ है जहाँ अमीरों की खुशी और चमक-दमक ग़रीबों की चीख़ों और पीड़ा को छिपा देती है।

हवाईअड्डे के रास्ते में, अनुरेंद्र जगदेव (मलेशिया), 2017

आपने राज्य को हथियारों के कारोबारियों और उनके युद्धों के साथ नापाक़ रिश्ते बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। हथियार समाज के प्रति प्रतिबद्धता के दुश्मन हैं, वे उन सब वादों को तोड़ देते हैं जो आधुनिक राज्यों ने अपने नागरिकों से किए थे। लोग सड़कों पर अपना पेट भरने के लिए भीख माँगने के लिए मजबूर हैं और उन्हीं सड़कों पर बनी ऊँची इमारतों में जनता द्वारा कमाए गए धन और हथियार कंपनियों के बीच घिनौने समझौते किए जाते हैं। किसी समाज का मूल्य, उन संविधानों में नहीं जिन्हें खोखला किया जा चुका है, बल्कि उन बजटों में हैं जो हथियारों के पक्ष में इतना झुक चुके हैं कि समाज कल्याण के लिए कुछ भी नहीं बचा है।

आपने क्रूरता की एक संस्कृति के विकास को अनुमति दी है – पुलिस द्वारा नागरिकों के खिलाफ राक्षसी व्यवहार, ग़ुस्सैल मर्दों द्वारा महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा, और भूखे पेट की   चीख के जवाब में भुखमरी का शिकारी कुत्ते जैसा हमला। यह सब अब सामान्य है – आधुनिक सभ्यता की प्रकृति बन चुका है। आपने इसे प्रोत्साहित किया है। आपने इसे अधिकृत किया है। आपने अपनी सामाजिक मानसिकताओं के पीछे छिपकर, इस या उस व्यवहार पर अपने उदारवादी रवैये के पीछे छिपकर, कभी प्राइड परेड में या कभी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की सैर में शामिल होकर दिखावा किया है। लेकिन आपको न तो उस समलैंगिक पुरुष की परवाह है जो एचआईवी/एड्स से मर रहा है और दवाओं तक नहीं पहुँच पा रहा, और न ही उस औरत की, जिसके लिए कोई शरण नहीं है जहाँ वह अपने बच्चों के साथ जा सके जब उसका घर उसके लिए असहनीय हो गया है।

अल-सवाबेर के विध्वंस पर, दाना अल-राशिद (कुवैत), 2020

आपका उदारवाद ढह चुका है। अब उदार दार्शनिक नहीं बचे जो सिर्फ़ विश्लेषक हों, अकादमिक बहसों में फँसी उनकी नैतिकता दुनिया के लिए अप्रासंगिक हो चुकी है। आपके विचारक सिर्फ़ टेलीविज़न के लिए बने हैं, उनके चेहरों पर जो मुखौटे हैं उनमें से अब तर्किकता के बाहर आने का कोई रास्ता नहीं बचा। आपका उदारवाद सिर्फ़ एक विज्ञापन है, दर्शन नहीं। 

पारंपरिक फ़ासीवादी संस्कृति एक मृत संस्कृति थी। वह ऐसी संस्कृति थी जिसका गर्व काल्पनिक था पर हिंसा वास्तविक। वह अपने से पहले की उदार संस्कृति से पलायन थी, इससे पहले की संस्कृति श्रमिक वर्ग और किसानों की संस्कृति थी, जो दशकों के संघर्ष और संस्थानों के निर्माण से मज़बूत हुई थी। इसके विपरीत, ख़ास क़िस्म के चरम दक्षिणपंथ की संस्कृति नवउदारवादी संस्कृति का ही एक रूप है। इसके पास अपनी कोई संस्कृति नहीं है बस दूसरी संस्कृति की प्रतिछवि है, नवउदारवादी फंतासियों और आकांक्षाओं की खंडित छवि, यह केवल आकाँक्षा का अतिरंजित रूप है। ट्रम्प हिट्लर नहीं है, बल्कि वे तो द सिलेब्रिटी अप्रेंटिस (अमेरिकी रीऐलिटी शो) के होस्ट थे, जिसका मूल वाक्य ही था यू आर फ़ायर्ड!’ (आपको बर्खास्त किया जाता है!)

ख़ास क़िस्म के चरम दक्षिणपंथ का केंद्र यानी वैश्विक उत्तर पतन और ख़तरे का केंद्र है। यहाँ से कोई नया दर्शन नहीं निकल रहा। यहाँ कोई बुद्धिजीवी वर्ग नहीं जो इसका नेतृत्व कर सके, अर्न्स्ट क्रिएक, मार्टिन हाइडेगर या कार्ल श्मिट जैसे नाज़ी बुद्धिजीवी तक नहीं हैं यहाँ। यह ख़तरनाक इसलिए है कि इसके पास ऐसी सैन्य शक्ति है जो दुनिया को बर्बाद कर सकती है: दुनिया का लगभग 80% सैन्य खर्च वैश्विक उत्तर और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगी करते हैं, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के पास 900 से ज़्यादा सैन्य अड्डे हैं, इनमें से कई यूरोप की ज़मीन पर हैं।

शीर्षकहीन, फ़्रान्सिस्को विडाल जूनियर (अंगोला), 1996

वैश्विक उत्तर के उदारवादियों और सामाजिक जनवादियों का नेतृत्व सिर्फ़ एक छलावा है। हमें अपने भीतर से ही अपना नेतृत्व करने वालों को ढूँढना होगा, अपनी परंपराओं और आंदोलनों के भीतर ही यह खोज करनी होगी। हम अपनी संस्कृतियों में फिर से जान फूँकने की लड़ाई लड़ रहे हैं, अपनी सिद्धांतों और दर्शनों को मज़बूत करने की लड़ाई, अपने विचारकों के काम में अपने मतों का आधार खोजने की लड़ाई। यह किसी भी चुनावी जंग से ज़्यादा बड़ा संघर्ष है। झूठे राष्ट्रीय गौरव को छोड़कर हमें अपना आत्मविश्वास मज़बूत करना होगा और वैश्विक उत्तर से उनके दाग़दार उदारवाद के साथ आने वाले विचारों को नकारना होगा। चरम दक्षिणपंथ डरावना है, लेकिन इससे भी ख़तरनाक हैं वे प्रौद्योगिकीवादी उदारवादी और युद्ध भड़काने वाले ग्रीन्स (जर्मनी की ग्रीन पार्टी से जुड़े) जो मानवता की ज़रूरतों के बनिस्बत सेनाओं और क़र्ज़ चुकाने पर ज़्यादा ख़र्च करना पसंद करते हैं।

स्नेह सहित,

विजय