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विभाजन की त्रासदी और हिंदी सिनेमा (भाग-2)

सांप्रदायिक-फासीवादी सत्ता के दबाव के कारण एक बार फिर विभाजन और भारत-पाकिस्तान संबंधों को नए नज़रिए से देखने का सिलसिला शुरू हुआ है।
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अन्य न्यूज़लेटर

विभाजन की त्रासदी और हिंदी सिनेमा (भाग-1)

विभाजन की टीस आज भी भारतीय समाज में बनी हुई है। इसलिए कला-साहित्य में यह विषय बार-बार लौटता है। पढ़िए विभाजन पर सिनेमाई नज़रिए का विश्लेषण।
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अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य में शंघाई सहयोग संगठन की भूमिका

इस सम्मेलन के सभी सदस्य देशों ने एक स्वर से ईरान पर हमले की निंदा की, उन मुल्कों ने भी जिनके अमेरिका से बेहतर रिश्ते रहे हैं।
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बुनियादी मुद्दों की अनदेखी का नतीजा है जेन-ज़ी आंदोलन

जागरूक युवाओं ने सड़क पर उतरकर ज़ाहिर कर दिया कि संचार के साधन भले ही बदल जाएँ, किंतु जनता के बुनियादी मुद्दे हमेशा प्रासंगिक बने रहते हैं।
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अति निम्न मज़दूरी पर काम करते हैं ज़्यादातर प्रवासी श्रमिक

गाँवों में भुखमरी से पीड़ित अनेक कामगार शहर आते हैं और यहाँ किसी भी शर्त पर मज़दूरी करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
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सड़कों पर उतरा युवा आक्रोश: जेन ज़ी दरअसल एक वर्ग-संघर्ष है

बेरोज़गारी और परीक्षा घोटालों से जूझ रहे भारतीय युवा अब दमन की परवाह किए बिना अपने हक़ और गरिमा की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।
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पहले खाद की किल्लत और अब मानसून की बेरुख़ी 

कम वर्षा तथा अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए खाद संकट से पैदावार में कमी आ सकती है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ेंगी।
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ग्रामीण ग़रीबी से शहरी बेबसी तक

नोएडा के मज़दूर प्रायः बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के गाँवों के भूमिहीन परिवारों से आते हैं। इनमें से ज़्यादातर ने कम उम्र में ही मज़दूरी शुरू की।
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श्रम बेचने का अमानवीय ठौर है नोएडा

उत्पादन प्रक्रिया का ज़रूरी हिस्सा होने के बावजूद मज़दूर न बचत कर पा रहे हैं, न ही आवास जैसी मूलभूत ज़रूरत पूरी कर पा रहे हैं।
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