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ग्रामीण ग़रीबी से शहरी बेबसी तक

नोएडा के मज़दूर प्रायः बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के गाँवों के भूमिहीन परिवारों से आते हैं। इनमें से ज़्यादातर ने कम उम्र में ही मज़दूरी शुरू की।
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श्रम बेचने का अमानवीय ठौर है नोएडा: नोएडा इंडस्ट्रियल एरिया के मज़दूरों की सर्वे रिपोर्ट

उत्पादन प्रक्रिया का ज़रूरी हिस्सा होने के बावजूद मज़दूर न बचत कर पा रहे हैं, न ही आवास जैसी मूलभूत ज़रूरत पूरी कर पा रहे हैं।
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ईरान पर हमलाः साम्राज्यवाद का घिनौना चेहरा

यूएस-इजराइल के मंसूबों को ध्वस्त करने के लिए वैश्विक दक्षिण के देशों को बीसवीं सदी के साम्राज्यवाद विरोधी सिद्धांतों के साथ आगे आना होगा।
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संकट के दौर में संस्कृति का आईना : फिल्म ‘अस्सी’ क्यों है ज़रूरी?

बढ़ती असहिष्णुता और हिंसा के बीच ‘अस्सी’ सिर्फ यौन अपराध की कहानी नहीं, बल्कि उस समाज का आईना है जो खुद से सवाल पूछने से बचता रहा है।
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सूक्ष्म वित्त का दुष्चक्र और केरल की सहकारी मिसाल

केरल ने भारत का सबसे बड़ा सहकारी बैंकिंग नेटवर्क बनाते हुए गरीबी खत्म की है। इसका उदाहरण साबित करता है कि बिना शोषण के वित्तीय समावेशन संभव है।
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प्रदूषण के लिए किसानों को ज़िम्मेदार ठहराना कितना सही?

दिल्ली और पूरे इलाके में ज़हरीली हवा का प्रमुख कारण मौसमी नहीं, बल्कि पूरे साल सक्रिय रहने वाले कारक हैं। इस फ़ेहरिस्त में सबसे ऊपर मोटर वाहन आते हैं।
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