न्यूज़लेटर / पैन अफ्रीका Region

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हम अपने क़ातिलों की मेज़बानी नहीं करेंगे: बाईसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

दोहन के आधुनिक ढाँचे के पीछे पुरानी उपनिवेशवादी लूट की व्यवस्था ही छिपी है। अफ़्रीका में संप्रभुता और असली आज़ादी के संघर्ष की नींव उपनिवेशवाद-विरोधी विरासत है।
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सबसे मज़बूत लोगों का लोकतंत्र हमेशा अच्छा होता है: अठारहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

अगर 1987 में संकारा की हत्या न हुई होती तो बुर्किना फ़ासो और साहेल क्षेत्र आज बहुत अलग होते।
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तबाही की कगार पर सेनेगल: तेरहवाँ न्यूज़लेटर (2026)

दशकों के उपनिवेशवाद और भ्रष्टाचार से त्रस्त सेनेगल के सामने भी अन्य देशों की तरह एक दुविधा है: ऋण के बोझ तले संप्रभु विकास कैसे हो।
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पहले जंग ख़त्म करेंगे, फिर दोबारा फ़ैक्टरियाँ शुरू करेंगे: इक्यावनवाँ न्यूज़लेटर (2025)

वैश्विक दक्षिण के लिए औद्योगीकरण प्राथमिकता है लेकिन ऋण, कॉर्पोरेट वर्चस्व, युद्धों और प्रतिबंधों ने इन देशों को निर्भरता और अल्पविकास के चंगुल में फँसाए रखा है।
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सूडान की जनता को शांति की ओर बढ़ने दो: छियालीसवाँ न्यूज़लेटर (2025)

विदेशी ताक़तों के समर्थन से चल रहा एसएएफ़ और आरएसएफ़ का ख़ूनी युद्ध सूडानी लोगों के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है।
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आईएमएफ़ की लूट रुकेगी, तभी आज़ाद होगा अफ़्रीका: इकतालीसवाँ न्यूज़लेटर (2025)

सेनेगल जैसे देशों में आईएमएफ़ गलत तरीक़े से कर्ज़ देने और झूठे हिसाब-किताब में लिप्त रहा है, ताकि देश की आज़ादी कमजोर हो और बड़ी विदेशी कंपनियों को फ़ायदा मिले।
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साहेल में थॉमस संकारा की विरासत अब भी ज़िंदा है: तैंतीसवाँ न्यूज़लेटर (2025)

आज़ादी के बाद से ही बुर्किना फ़ासो नवउपनिवेशवादी अल्पविकास के चंगुल में फँसा है – क्या ट्राओरे की सरकार थॉमस संकारा के नक़्शेकदम पर चलकर यहाँ बदलाव ला पाएगी?
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बेहतर दुनिया के लिए संघर्ष में शहीद हुए युवा क्रांतिकारियों के नाम: बत्तीसवाँ न्यूज़लेटर (2025)

फ़्रांत्ज़ फ़ैनन और पैट्रिस लुमुम्बा जैसे क्रांतिकारियों ने अल्पायु में ही जान गंवा देने के बावजूद  उपनिवेशवाद-विरोधी और राष्ट्रीय मुक्ति संघर्षों में अमूल्य योगदान दिया।
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आईएमएफ ने रोका अफ्रीका के विकास का रास्ता : इक्कीसवाँ न्यूज़लेटर (2025)

पहले अफ्रीका को औपनिवेशिक ताक़तों ने लूटा और अब यह आईएमएफ द्वारा सरकारी ख़र्च में कटौती का दबाव, भारी क़र्ज़ और अल्पविकास का दंश झेल रहा है।
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हमारी दुनिया को ख़ूनख़राबे ने जकड़ रखा है: बीसवाँ न्यूज़लेटर (2025)

सूडान के गृहयुद्ध में 150,000 लोग मारे जा चुके हैं। इस भुला दिए गए युद्ध के राजनीतिक कारणों की पहचान कर के ही इसे ख़त्म करने के उपाय किए जा सकते हैं।
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अफ्रीकी लेखिका ऐंड्री ब्लौइन हमारे जैसी क्रांतिकारी हैं: चौदहवाँ न्यूज़लेटर (2025)

अफ्रीका में लेखन, प्रकाशन एवं राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों में महिलाओं की भागीदारी की समृद्ध परंपरा है। इस मशाल को आगे बढ़ाने की वर्तमान कोशिशों के बारे में जानें।
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आख़िर कब तक अफ्रीकी महिलाओं को पानी लाने के लिए मीलों चलना पड़ेगा: ग्यारहवाँ न्यूज़लेटर (2025)

अंतर्राष्ट्रीय कामकाजी महिला दिवस के महीने में आइए जानते हैं कि क़र्ज़-कटौती के राज और जलवायु परिवर्तन का वैश्विक दक्षिण की महिला किसानों पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता है।
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