दोहन के आधुनिक ढाँचे के पीछे पुरानी उपनिवेशवादी लूट की व्यवस्था ही छिपी है। अफ़्रीका में संप्रभुता और असली आज़ादी के संघर्ष की नींव उपनिवेशवाद-विरोधी विरासत है।
वैश्विक दक्षिण के लिए औद्योगीकरण प्राथमिकता है लेकिन ऋण, कॉर्पोरेट वर्चस्व, युद्धों और प्रतिबंधों ने इन देशों को निर्भरता और अल्पविकास के चंगुल में फँसाए रखा है।
सेनेगल जैसे देशों में आईएमएफ़ गलत तरीक़े से कर्ज़ देने और झूठे हिसाब-किताब में लिप्त रहा है, ताकि देश की आज़ादी कमजोर हो और बड़ी विदेशी कंपनियों को फ़ायदा मिले।
आज़ादी के बाद से ही बुर्किना फ़ासो नवउपनिवेशवादी अल्पविकास के चंगुल में फँसा है – क्या ट्राओरे की सरकार थॉमस संकारा के नक़्शेकदम पर चलकर यहाँ बदलाव ला पाएगी?
फ़्रांत्ज़ फ़ैनन और पैट्रिस लुमुम्बा जैसे क्रांतिकारियों ने अल्पायु में ही जान गंवा देने के बावजूद उपनिवेशवाद-विरोधी और राष्ट्रीय मुक्ति संघर्षों में अमूल्य योगदान दिया।
अफ्रीका में लेखन, प्रकाशन एवं राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों में महिलाओं की भागीदारी की समृद्ध परंपरा है। इस मशाल को आगे बढ़ाने की वर्तमान कोशिशों के बारे में जानें।
अंतर्राष्ट्रीय कामकाजी महिला दिवस के महीने में आइए जानते हैं कि क़र्ज़-कटौती के राज और जलवायु परिवर्तन का वैश्विक दक्षिण की महिला किसानों पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता है।