वैश्विक दक्षिण आईएमएफ के शिकंजे में फंसा है। इसमें सुधार की कोशिशों को वैश्विक उत्तर नाकाम कर रहा है, इसलिए ग़रीब मुल्क ब्रिक्स जैसे संस्थान बना रहे हैं।
यह डोसियर तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष की विशाल सांस्कृतिक विरासत का ब्यौरा पेश करता है और इस बात पर रोशनी डालता है कि कैसे गीतों और नाटकों ने जनता को उपनिवेशवाद, राजशाही और जमींदारी के खिलाफ…
Tricontinental: Institute for Social Research seeks to build a bridge between academic production and political and social movements to promote critical thinking and stimulate debates and research with an emancipatory perspective.
भविष्य का मतलब कैलेंडर में कोई आने वाली तारीख़ नहीं है। यह संघर्ष है, मानवता को पूँजीवाद की जकड़ से छुड़ाने का और उस राह चलने का जहाँ समस्याएँ सचमुच हल होंगी।
1955 में वैश्विक दक्षिण के तत्कालीन नेता इंडोनेशिया के बांडुंग में राष्ट्रीय स्वतंत्रता और सहयोग की भावना लेकर एक सम्मेलन में इकट्ठा हुए। आज सत्तर साल बाद क्या यह भावना बची है?
शक्तिशाली जन आंदोलनों और वाम सरकारों के समर्थन से, केरल का सहकारी आंदोलन हजारों संस्थाओं में फला। ये सभी संस्थाएँ पूंजीवाद से परे एक संभावित भविष्य की प्रयोगशालाएँ हैं।