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युद्धविराम के बावजूद फ़िलिस्तीन पर इज़राइल की हिंसा जारी: इकतालीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)

फ़िलिस्तीन पर हमला बमबारी तक सीमित नहीं। बुनियादी ढाँचे का विनाश, फ़िलिस्तीनी धन पर इज़राइली नियंत्रण और रंगभेदी व्यवस्था में पश्चिमी कॉर्पोरेट की मिलीभगत – इसका हिस्सा हैं।

हमले के साये में, अबेद अब्दी (फ़िलिस्तीन), 2024

प्यारे दोस्तो,

ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।

इज़राइल की जनसंहारक बमबारी ने ग़ज़ा में अपशिष्ट जलनिकासी व्यवस्था को तबाह कर दिया है। 2023 से अब तक यहाँ के 90% जल और सफ़ाई आधारभूत ढाँचे को या तो बर्बाद कर दिया गया है या उसे भारी नुक़सान पहुँचाया है। हर रोज़, 45,000 क्यूबिक मीटर अनुपचारित सीवेज भूमध्य सागर में छोड़ा जा रहा है, जबकि 15,000 क्यूबिक मीटर सीवेज ज़मीन में जा रहा है। सफ़ाई प्रणाली की इस तबाही की वजह से ग़ज़ा में चूहों आदि की भरमार हो गई है, ऐसे में हर तीन में से दो बच्चे विस्थापितों के कैम्प में इन ख़तरनाक जीवों के बीच रह रहे हैं। सितंबर 2026 में शैवाल के अत्यधिक बढ़ जाने की वजह से इज़राइल के पाँच अलवणीकरण प्लांट (समुद्री खारे पानी को पीने योग्य बनाने की प्रकिया) में फ़िल्टर प्रणाली बंद हो गई थी। तब इज़राइल के पर्यावरणीय समूह Zalul ने चेतावनी दी थी कि ग़ज़ा से आ रहा अपशिष्ट सीवेज इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है।

जो बोओगे वही काटोगे।

अंग-विच्छेदन की शून्यता का अध्ययन, मजदल नतील (फ़िलिस्तीन), 2025

सीज़फ़ायर से घर दोबारा नहीं बसाए जा सकते। ग़ज़ा में फ़िलिस्तीनी अब भी इज़राइल के सामूहिक हत्याओं और तबाही के अभियान से फैलाई जा रही बर्बादी के बीच रहने को मजबूर हैं। सीज़फ़ायर को अमल में आने के एक साल बाद भी हज़ारों लोग फटे-पुराने टेंटों, अस्थाई शिविरों और नष्ट हो चुकी इमारतों में रह रहे हैं। व्यापक लड़ाई के रुकने के बावजूद वे बुनियादी हालात नहीं सुधरे हैं जिनमें लोग गरिमामय जीवन जी सकते हैं।

ग़ज़ा में हुई तबाही को केवल आँकड़ों से नहीं समझा जा सकता, हालाँकि आँकड़ों से यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इज़राइल और उसके सहयोगियों ने किस स्तर पर तबाही फैलाई है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की एक हालिया रिपोर्ट में पाया गया कि ग़ज़ा की 92% आर्थिक संस्थान बर्बाद कर दिए गए हैं या उन्हें भारी नुक़सान पहुँचा। 2025 में, यहाँ की वास्तविक प्रति-व्यक्ति जीडीपी 212 अमेरिकी डॉलर थी, 2022 के पहले से ही निम्न स्तर का महज़ 17%, और ग़ज़ा की रोज़गार-योग्य आबादी का 90% से अधिक लोगों के पास काम नहीं था। मई 2026 तक, ग़ज़ा में पुनर्निर्माण की अनुमानित 71.5 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत के मुकाबले केवल 17 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता जताई गई थी, और प्रतिबद्ध धनराशि का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही वितरित किया गया था। लग रहा है कि कुछ समय तक ग़ज़ा खंडहर ही बना रहेगा।

मेरा घर, मेरी ज़मीन, जुहैना हबीबी कंदलफ्त (फ़िलिस्तीन),  2015

ग़ज़ा में दो साल से ज़्यादा से तंबुओं में रह रहे परिवार बताते हैं कि वे इतनी छोटी जगह पर रहते हैं कि उनके जीवन का हर पहलू, यानी आपसी बातचीत से लेकर खाना पकाना, सोना और नहाना तक में निजता का नामोनिशान नहीं रहा है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) द्वारा 500 से अधिक विस्थापन स्थलों की मानचित्रण प्रक्रिया में पाया गया कि उनमें से केवल लगभग आधे ही महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थान के 500 मीटर के भीतर थे। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय के अनुसार, जुलाई 2026 के अंत तक, ऐसे 17 स्थान धन की कमी के कारण और दो अन्य सुरक्षा कारणों से बंद थे। मनोसामाजिक विशेषज्ञ अबीर अल-शुराफा ने अल-अरबी अल-जदीद को बताया कि ‘पास-पास लगे तंबू लोगों के जीवन को दूसरों के सामने बेपर्दा कर देते हैं और ऐसी परिस्थितियाँ बनाते हैं जो टोह लेने, पारिवारिक मामलों में हस्तक्षेप, और बातचीत को सुनने को प्रोत्साहित करती हैं। परिवारों के बीच अब जो कई समस्याएँ हैं, वे सीधे इस थोपी गई वास्तविकता से जुड़ी हैं। निजता का अभाव बच्चों के पालन-पोषण और पति-पत्नी के बीच संबंधों को प्रभावित करता है और पारिवारिक विवादों तथा तलाक की दर में वृद्धि में योगदान दे सकता है, क्योंकि जो कभी घर के भीतर होता था, अब एक खुले स्थान में होता है जहाँ दूसरे उसे सुन सकते हैं।’

UNFPA ने बताया कि अप्रैल और जून 2026 के बीच, दस केस-प्रबंधन साझेदारों द्वारा दर्ज लैंगिक हिंसा के मामले पिछली तिमाही की तुलना में 27% बढ़ गए। हिंसा के तीन सबसे अधिक रिपोर्ट किए गए रूप – संसाधनों से वंचित करना, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक हिंसा, और शारीरिक हमला – प्रत्येक रिपोर्ट किए गए मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा थे, जबकि जबरन और बाल विवाह 2.6% थे। इन आँकड़ों को ग़ज़ा पर इज़राइल के हमले से उत्पन्न भौतिक परिस्थितियों से अलग नहीं किया जा सकता। घरों, संपत्ति और आजीविका का विनाश, तथा विस्थापन के चलते परिवार और सामाजिक समर्थन का टूटना, महिलाओं को भोजन, पानी, आश्रय और आय के लिए सहायता एजेंसियों और अपने परिवारों के पुरुषों पर अधिक निर्भर बना दिया है।

वसंत का शोक, हया काबनेह (फ़िलिस्तीन), 2024

इस बीच, क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में इज़राइली सेना फ़िलिस्तीनियों के घरों को ढहा रही है और ज़ायोनी बाशिंदे फ़िलिस्तीनी समुदायों को उस ज़मीन से बेदख़ल कर रहे हैं, जहाँ उनकी पीढ़ियाँ रहती आई हैं। यह विस्थापन कोई आकस्मिक घटना नहीं है।

जनवरी और फ़रवरी 2025 में इज़राइली बल जेनिन, नूर शम्स और तुलकरम में फ़िलिस्तीनी शरणार्थी कैम्पों में  घुस गए और वहाँ रहने वालों को जबरन हटाया, सैकड़ों घर, सड़कें और अन्य नागरिक सेवाओं को नष्ट कर दिया। इसमें विस्थापित लगभग 33,000 फ़िलिस्तीनी अब भी लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं।

फ़रवरी 2026 में, वर्षों तक हमलों और उत्पीड़न का सामना करने के बाद, इज़राइली बाशिंदों ने क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में अल-लुब्बान अश-शरक़िया के उत्तर में स्थित अल-वादी अश-शमाली से एक बेदुइन पशुपालक समुदाय के 45 सदस्यों को जबरन बाहर निकाल दिया। इस निष्कासन के बाद उस घाटी में अब फ़िलिस्तीनी नहीं रह गए हैं, जिससे इज़राइलियों को चरागाह भूमि पर अपना नियंत्रण बढ़ाने का मौका मिला और लगभग 2,000 दुनम के आसपास के कृषि भूमि, जिसमें जैतून के बाग़ भी शामिल हैं, के लिए ख़तरा पैदा हुआ। यरुशलम के पास E1 क्षेत्र में हज़ारों अवैध बस्ती इकाइयों के निर्माण की इज़राइली योजनाओं के साथ मिलकर यह ज़ब्ती एक भावी फ़िलिस्तीनी राज्य के क्षेत्रीय आधार को कमज़ोर करती है।

शीर्षकहीन, इस्माइल फ़तह (इराक़), 1994

इस सब में उस आर्थिक शिकंजे की चर्चा कम होती है, जो इज़राइल अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्र पर कसता है। UNCTAD रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली सरकार ने जनवरी 2019 और मार्च 2026 के बीच फ़िलिस्तीनी राजस्व में से 3.67 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक काट लिए या रोक लिए। फ़िलिस्तीनी निर्भरता ख़ुद मुद्रा तक फैली हुई है। फ़िलिस्तीनियों द्वारा अर्जित आय का अधिकांश हिस्सा इज़राइली शेकेल में फ़िलिस्तीनी बैंकों में जमा होता है। लेकिन इज़राइल यह निर्धारित करता है कि वे बैंक कितनी भौतिक नकदी इज़राइल की बैंकिंग प्रणाली में वापस कर सकते हैं। फ़िलिस्तीन आर्थिक नीति अनुसंधान संस्थान (MAS) के आँकड़ों से पता चलता है कि 2021 और 2024 के बीच, स्वीकृत हस्तांतरण उस नकदी की मात्रा के साथ तालमेल नहीं रख पाए, जिसे वापस भेजने की आवश्यकता थी। इससे पैदा हुआ अधिशेष बैंक तिजोरियों को ऐसे धन से भर देता है, जिसे आसानी से उधार नहीं दिया जा सकता या भुगतान निपटाने के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता, जिसके कारण कुछ बैंक नई शेकेल जमा करने को प्रतिबंधित कर देते हैं। MAS अध्ययन आईएमएफ के एक अनुमान का हवाला देता है कि इस अधिशेष को रखने की लागत ने फ़िलिस्तीनी बैंकों के मुनाफ़े को लगभग 20% तक कम कर दिया।

फ़िलिस्तीनी बैंक तिजोरियों में इस नकदी को क़ैद कर देना केवल नोटों का एक अंबार लगा देना नहीं है। आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान इज़राइली बैंकों के साथ एक कार्यशील संपर्ककर्ता बैंकिंग संपर्क पर निर्भर करता है। इस प्रणाली के टूटने से बिजली, ईंधन, और पानी के आयात में बाधा पैदा हो सकती है। अगस्त 2026 में, इज़राइल ने 4.5 अरब शेकेल की चौथी तिमाही की शिपमेंट को समय से पहले भेजने पर सहमति जताई, जिससे फ़ौरी दबाव कुछ कम हुआ। लेकिन विवेकाधीन शिपमेंट उस व्यवस्था को समाप्त नहीं कर देतीं, जिसमें इज़राइल यह तय करता है कि फ़िलिस्तीनी बैंक उस मुद्रा में भुगतान प्रॉसेस कर सकते हैं या नहीं, जिस पर फ़िलिस्तीनी अर्थव्यवस्था का अधिकांश हिस्सा निर्भर है। MAS का तर्क है कि इलेक्ट्रॉनिक भुगतान नकदी के संचय को धीमा कर सकते हैं, लेकिन वे उस संरचनात्मक बाधा को दूर नहीं कर सकते।

शीर्षकहीन, इस्माइल शम्मौत (फ़िलिस्तीन), 1994

इज़राइल इस रंगभेद, गला घोंटने, और अधिग्रहण की नीति का एकमात्र लाभार्थी नहीं है। 25 सितंबर 2026 को, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्र, जिसमें पूर्वी यरुशलम भी शामिल है, में इज़राइली बस्तियों से जुड़ी निर्दिष्ट गतिविधियों में शामिल उद्यमों के अपने डेटाबेस को अद्यतन (अपडेट) किया। अद्यतन सूची में फ्रांस (एजिस और एजिस रेल), जर्मनी (हाइडलबर्ग मटेरियल्स एजी), नीदरलैंड (बुकिंग.कॉम), और संयुक्त राज्य अमेरिका (एयरबीएनबी, बुकिंग होल्डिंग्स, एक्सपीडिया ग्रुप, और ट्रिपएडवाइज़र) में स्थित कंपनियाँ शामिल हैं। रिपोर्ट उन गतिविधियों की पहचान करती है, जैसे कि बस्तियों को बनाए रखने वाली सेवाएँ और भूमि या अन्य प्राकृतिक संसाधनों का व्यावसायिक दोहन। यह प्रत्येक फर्म के बारे में आपराधिक निष्कर्ष निकालने के बजाय, कॉर्पोरेट भागीदारी के विभिन्न रूपों का आकलन करती है, जिसमें योगदान और प्रत्यक्ष संबंध शामिल हैं।

ये परिचित नाम हैं क्योंकि बसावट वाणिज्य सामान्य उपभोक्ता और व्यापारिक आधारभूत ढाँचे में समाहित है: छुट्टियों के लिए दिया गया एक विज्ञापन, एक परिवहन सेवा, एक खदान उत्पाद। डेटाबेस स्पष्ट रूप से बसावट-संबंधी गतिविधियों तक सीमित है: यह न तो क़ब्ज़े से लाभ कमाने वाली प्रत्येक कंपनी की गणना है और न ही उन कंपनियों की अंतिम जाँच जिनका वह नाम लेता है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय राष्ट्रों से अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत व्यवसायों को विनियमित करने का आग्रह करता है और कंपनियों से अपील करता है कि वे प्रतिकूल मानवाधिकार प्रभावों को रोकें या उनका समाधान करें। पश्चिमी सरकारों के लिए प्रश्न साफ़ है: क्या वे अपने यहाँ पंजीकृत कंपनियों को उन सेवाओं और भौतिक संपर्कों को जारी रखने देंगी, जो बसावटों को सक्षम बनाते हैं?

दर्द, फ़तेह मौदर्रेस (सीरिया), 1961

यह न्यूज़लेटर लिखते समय, मुझे समकालीन फ़िलिस्तीनी कविता के एक संकलन में पत्रकार और कवि मुस्तफ़ा अबू स्नेनेह की ‘नब्लूस स्ट्रीट‘ मिली। यह कविता रंगभेद, नरसंहार, और अधिग्रहण के प्रति आक्रोश से सराबोर है। साधारण जीवन इन बदसूरत परिघटनाओं से संघर्ष करता है।

वह एक बेज़बान इक़बाल था।
मुझे याद आता है बसावटों के अँधेरे में डूबता सूरज,
बंदूकधारी सिपाही सूर्यास्त को पीटते हुए
जब तक कि वो बेहोश नहीं हुआ।

प्यार में घायल एक लड़का निज़ार क़ब्बानी की कविताएँ चुराता हुआ
और द स्नो कम्ज़ थ्रू द विंडो* से प्रेम-पत्र।
मैं अब भी प्रेम-पाश में फँसा लड़का हूँ
सूरज कब का डूब चुका है
मेरा पहला इक़बाल-ए-इश्क़ हुआ था
क़ब्ज़े की बंदूकों के जाल के बीच।

मैं भी तुम्हारे साथ नब्लूस स्ट्रीट पर चलना चाहता हूँ और हन्ना मीना का उपन्यास ‘द स्नो कम्स थ्रू द विंडो‘ (1969) पढ़ना चाहता हूँ। सीरिया में जन्मी मीना एक नाई के रूप में काम करते थे और सड़कों पर कम्युनिस्ट अखबार ‘सौत अल-शाब‘ (जनता की आवाज़) बाँटते थे। उनका उपन्यास फ़य्याद नामक एक वामपंथी लेखक की कहानी कहता है, जो राजनीतिक उत्पीड़न से बचने के लिए लेबनान भाग जाता है। यह एक संवेदनशील व्यक्ति की कहानी है, जो निजी भय से सामूहिक संघर्ष की ओर बढ़ता है। कविता में सैनिक सूर्यास्त को पीटते हैं, लेकिन अगले दिन सूरज उगता है और आकाश को रौशन कर देता है।

स्नेह सहित,

विजय