एक नए पश्चिमी एशिया के लिए संघर्ष: चौवालीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)
ईरान और अंसार अल्लाह की चुनौतियों के बीच पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय ताक़तें नई सुरक्षा व्यवस्थाएँ बना रही हैं। सवाल है, इनसे किसके हितों की रक्षा होगी?
कला और संगीत, अब्दुल हलीम रदवी (सऊदी अरब), 1989
प्यारे दोस्तो,
ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के दशकों में, पुरानी औपनिवेशिक ताक़तों, ब्रिटेन और फ़्रांस के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका (यूएस) ने भूमध्य सागर से लेकर हिंदू कुश तक पश्चिमी एशिया पर प्रभुत्व जमा लिया। जैसे-जैसे यह क्षेत्र आधुनिक औद्योगिक दौर के प्रमुख ईंधन – तेल और प्राकृतिक गैस – के मुख्य उत्पादक के तौर पर उभरा, यूएस ने यहाँ सैन्य अड्डों का जाल बिछाया। अपने नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर यूएस ने यह सुनिश्चित किया कि यहाँ एक भी ऐसा शासन जड़ें न जमा पाए जो तेल प्रणाली पर अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता का दावा करे जिससे यूएस की सत्ता को चुनौती मिले (इसका एक शुरुआती और स्पष्ट उदाहरण है 1953 में ईरान में मोहम्मद मोसादेग की सरकार का जबरन तख़्तापलट, जिससे पहले उनकी सरकार ने एंग्लो-ईरानियन ऑयल कंपनी कंपनी का राष्ट्रीयकरण किया था)।
साठ और सत्तर के दशक में, कुवैत, क़तर, ट्रूशियल रियासतें (अब संयुक्त अरब अमीरात) और यमन सहित इस क्षेत्र में ब्रिटिश शक्ति घटी, जबकि यूएस ने यहाँ के तेल मार्गों पर पश्चिमी नियंत्रण बरक़रार रखने के लिए अपनी सैन्य भूमिका का विस्तार किया। इज़राइल अपनी स्थापना के समय से ही पश्चिमी एशिया में पश्चिमी ताक़तों के लिए काम किया करता आया है, इसलिए यह यूएस-नीत ढाँचे का एक अहम अंग बन गया। लेकिन आज इज़राइल भारी तनाव में है क्योंकि इस साल ईरान ने इज़राइल और यूएस के हमलों का जिस तरह सामना किया है उससे इसके अस्तित्व पर सवालिया निशान लग गया है।
यमन, एम.एफ़. हुसैन (भारत), 2008
इस पृष्ठभूमि में, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने इस साल अगस्त में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए और यूएस के सीधे दख़ल के बग़ैर एक क्षेत्रीय सुरक्षा मंच के निर्माण के लिए अहम क़दम उठाया। ईरान द्वारा यूएस सैन्य अड्डों पर हुए हमलों से पूरे खाड़ी क्षेत्र में एक बहस शुरू हुई कि क्या यह अड्डे मेज़बान देशों को सुरक्षा देते हैं या उन्हें निशाना बना देते हैं, और इस सबके बीच यह समझौता हुआ। अब जब यूएस सैनिक आधिकारिक रूप से इराक़ से जा चुके हैं, तो इस समझौते के प्रावधान दूसरे देशों को भी शामिल करने की संभावना पैदा करते हैं, इसमें इराक़ और अरब प्रायद्वीप के अन्य छोटे देश हो भी सकते हैं।
इसी दौरान, अंसार अल्लाह—जो यमन की राजधानी सना और देश के उत्तरी तथा पश्चिमी हिस्सों के बड़े भूभाग पर नियंत्रण रखता है—ने लाल सागर के तट पर कई अहम ठिकानों पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश की, ताकि इस तरह वह लाल सागर में भी वैसी ही रणनीतिक स्थिति बना सके, जैसी ईरान की होर्मुज़ जलडमरूमध्य में है। सितंबर में इस संगठन के सैन्य बलों ने मोखा और मय्यून द्वीप पर क़ब्ज़ा कर लिया, जिससे इसे लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश मार्ग यानी बाब अल-मंदब के आस-पास के अहम स्थानों का रणनीतिक नियंत्रण हासिल हो गया। अब बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से होकर गुज़रने पर कोई भी इस संगठन की मिसाइलों और ड्रोनों का निशाना बन सकता है। इसके जवाब में, सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने डॉन ऑफ़ यमन ऑपरेशन के तहत यमन में अंसार अल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए एक सौ लड़ाकू विमान तैनात कर दिए हैं। ऐसा करके इन्होंने 2015 में इस संगठन के ख़िलाफ़ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई का एक दफ़ा फिर आग़ाज़ किया है।
अगर अंसार अल्लाह बाब अल-मंदब में आवाजाही को बाधित करता है, और दूसरी तरफ़ ईरान और ओमान में बातचीत के बावजूद होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों का आना-जाना भी बंद है, तो अरब प्रायद्वीप का तेल व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा। साथ ही स्वेज़ नहर के ज़रिए यूरोप और एशिया के बीच का सबसे छोटा समुद्री मार्ग भी बंद हो जाएगा।
स्वर्ण युग, डाहलिया बाशेर (सूडान), 2025
इस बीच, लाल सागर और अफ्रीका के हॉर्न (अफ्रीका के पूर्वी छोर) के पूरे इलाके में संयुक्त अरब अमीरात बंदरगाहों के विकास और सैन्य ढाँचे के विस्तार, करीबी राजनीतिक संबंधों, सशस्त्र गुटों को समर्थन देने और क्षेत्रीय व्यापार तथा संसाधनों के नेटवर्क तक पहुँच बनाने के ज़रिये अपनी रणनीतिक पकड़ मज़बूत कर रहा है। साल 2015 में यूएई ने असाब (इरिट्रीया) में एक बंदरगाह और क़रीबी हवाईपट्टी का विस्तार करके एक सैन्य अड्डा स्थापित किया, यहीं से अमीरात के जहाज़ ने यमन पर हमला किया था। इसके अगले साल, दुबई सरकार की बंदरगाह और लजिस्टिक्स कंपनी DP World ने सोमालीलैंड (एक स्वशासित क्षेत्र जिसने 1991 में सोमालिया से ख़ुद को आज़ाद घोषित कर दिया था) के बर्बेरा में एक बंदरगाह हासिल कर लिया। हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में अमीराती मौजूदगी युद्ध से बहुत क़रीबी से जुड़ी हुई है, क्योंकि अमीरात सूडान के गृहयुद्ध में रैपिड सपोर्ट फ़ोर्सिस (RSF) को समर्थन दे रहा है और लिबियन नेशनल आर्मी ऑफ़ जेनरल ख़लीफ़ा हफ़्तार को भी (जो बदले में RSF को लजिस्टिकल मदद पहुँचा रहा है)। इन हथियारबंद गुटों के साथ यूएई के रिश्तों के तार क्षेत्रीय सोना व्यापार से मिलते हैं, जिसके ज़रिए RSF और अन्य सैन्य गुटों से जुड़ा सोना अमीरात के बाज़ारों तक पहुँचता है।
क्षेत्रीय स्तर पर, यूएस इज़राइल और अपने अरब मित्र देशों के बीच सहयोग के ज़रिए एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचा खड़ा करना चाहता है, जिसमें यूएई एक बेहद अहम कड़ी है। 2015 में इज़राइल ने अबु धाबी स्थित अंतरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेन्सी के मुख्यालय में अपना दूतावास खोलने की घोषणा की, यूएई में इसकी पहली आधिकारिक उपस्थिति। सितंबर 2020 में अब्राहम अकार्ड्स के ज़रिए इज़राइल और यूएई के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए और इसके दो साल बाद इन्होंने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर हस्ताक्षर किया। यह नज़दीकी अमेरिका की उस रणनीतिक योजना का हिस्सा थी, जिसके तहत दोनों देशों को वॉशिंगटन के साथ मिलकर क्षेत्रीय रणनीति तैयार करनी थी। इसके पीछे का राजनीतिक तर्क यह था कि इज़राइल को उसके परिवेश के साथ मिलाया जाए और फ़िलिस्तीन को अकेला कर दिया जाए। हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका, ख़ासतौर से सोमालीलैंड, में उनके हित बहुत ज़्यादा आपस में मिलने लगे हैं। 2025 में इज़राइल इकलौता यूएन सदस्य राष्ट्र बना जिसने सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के तौर पर स्वीकृति दी। हालाँकि यूएई ने इसे देश के तौर पर मान्यता नहीं दी लेकिन ख़बरों के मुताबिक़ यह अर्जेंटीना, एस्वातीनी और डोमिनिकन गणराज्य को इज़राइल के नक़्शेकदम पर चलने के लिए मना रहा था। अगर यह मान्यता दे दी जाती है तो सोमालिया में तनाव बढ़ जाएगा। लेकिन यह संबंध जिस यूएस-नीत सुरक्षा व्यवस्था पर टिका था वह आज थोड़ी डगमगाई हुई लग रही है, इसलिए इज़राइल अपने अब्राहम अकॉर्ड्स सहयोगी यूएई पर ज़्यादा निर्भर होता दिखाई पड़ रहा है। इस निर्भरता की भी अपनी सीमाएँ हैं: भले ही यह संबंध इज़राइल को आर्थिक पहुँच और राजनयिक प्रासंगिकता देता हो लेकिन इज़राइल के ज़्यादा क़रीब जाने की एक राजनीतिक क़ीमत है जो यूएई के नेताओं को चुकानी पड़ सकती है।
अल दायन, अलमाहा जरल्ला (संयुक्त अरब अमीरात), 2022
यह बढ़ती अस्थिरता दर्शाती है कि इस क्षेत्र में यूएस सैन्य प्रभुत्व का वह पुराना ढाँचा कमज़ोर हुआ है जो इज़राइल को अपनी नस्लभेदी सत्ता बरकरार रखने और फ़िलिस्तीनियों का जनसंहार करने की खुली छूट देता है। यूएस की ताक़त को अब अजेय नहीं माना जा सकता। अफगानिस्तान और इराक में अमेरिका आखिरकार अपने मकसद में नाकाम रहा। लीबिया को अमेरिका, फ्रांस और उनके खाड़ी के अरब सहयोगियों ने तबाह कर दिया। अब ईरान में भी अमेरिका को रणनीतिक हार का सामना करना पड़ा है। ये सभी घटनाएँ एक ही तरह के पैटर्न की ओर इशारा करती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका देशों को बर्बाद कर सकता है, लेकिन वह उन पर नियंत्रण नहीं स्थापित कर सकता। सवाल उठता है कि अगर इज़राइल के प्रमुख सहयोगी (यूएस) और अन्य छोटे सहयोगियों (यूरोपीय देश) इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को घटा लें तो इनके बिना इज़राइल क्या करेगा? वेनेज़ुएला में तेल पर प्रभुत्व सुनिश्चित करके और तेल तथा दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ्स) सहित ब्राज़ील के विशाल रणनीतिक संसाधनों पर नियंत्रण की कोशिश से यूएस ने पश्चिम एशिया में तेल पर प्रभुत्व खोने की स्थिति में अपना बचाव करने की कोशिश की है। बचाव का यह प्रयास ट्रम्प को ऐसी लड़ाइयों को जारी रखने से रोकेगा जिन्हें जीता नहीं जा सकता।
यूएस की सुरक्षा की गारंटी में व्यापक अविश्वास के बढ़ने का सबसे साफ़ उदाहरण शायद इराक़ में देखा जा सकता है। वॉशिंगटन ने इस साल 30 सितंबर को घोषणा की कि इसकी सेना पूरी तरह इराक़ से हट चुकी है, यह 2024 में बग़दाद में समय-सीमा पर हुए समझौते के तहत हुआ। बग़दाद में मनाए गए जश्न में संप्रभुता का एक दमदार दावा साफ़ दिखाई देता है। लेकिन इन जश्नों को पीछे हटने के विवादित अर्थ को अस्पष्ट नहीं करना चाहिए। प्रमुख अर्धसैनिक समूहों में से एक, कताइब हिज़्बुल्लाह ने पूरी तरह पीछे हटने के आधिकारिक दावों को चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि यूएस विमान अब भी इराकी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर रहे थे। 2003 के अवैध आक्रमण और उसके परिणामों से तबाह हुए देश के लिए, यह वापसी एक अपरिहार्य ऐतिहासिक महत्त्व लिए हुए है। इससे यह धारणा कमज़ोर पड़ती है कि इराक की सुरक्षा व्यवस्था चलाने के लिए अमेरिकी सैनिकों की वहाँ हमेशा मौजूदगी ज़रूरी है।
अच्छाई और बुराई, एक अमूर्तन, जवाद सलीम (इराक), लगभग 1951
इन सभी घटनाक्रमों को एक साथ देखें, तो पश्चिम एशिया और लाल सागर के पूरे इलाके में ताकत और सुरक्षा के समीकरणों में बड़े बदलाव होते दिखाई देते हैं। यूएस-इज़राइल के हमलों के सामने ईरान का डटे रहना और इराक़ से यूएस सेनाओं का पूरी तरह हट जाना यूएस की सैन्य शक्ति की सीमाओं को दर्शाता है। जबकि मक्का समझौता और क्षेत्रीय सहयोगियों में बदलाव दिखाते हैं कि सरकारें अपने हितों की रक्षा के अन्य रास्ते खोज रही हैं। फिर भी अब तक हमारे सामने यूएस मुक्त पश्चिमी एशिया तैयार नहीं हुआ है। वॉशिंगटन, सैन्य सहयोग, हथियारों, ख़ुफ़िया जानकारियों, और सैन्य तैनातियों के ज़रिए अब भी प्रभाव बनाए हुए है। एक देश से उसके निकल जाने को पूरे क्षेत्र से हट जाना मान लेने की ग़लती नहीं करनी चाहिए। और न ही ये नए समझौते अनिवार्य रूप से यूएस के ख़िलाफ़ हैं: इनमें से कुछ यूएस के साथ मौजूदा रिश्तों के साथ बने हैं, जबकि कुछ उससे अलग हैं। जो चीज़ बेशक बदली है वह है एक स्थिर और पर्याप्त सुरक्षा गारंटी के तौर पर यूएस की शक्ति में विश्वास।
प्रगतिशील ताकतों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि क्षेत्र में उभरती नई व्यवस्था किसकी सुरक्षा करती है। अगर सुरक्षा का नया ढाँचा सरकारों, निवेश और रणनीतिक रास्तों की रक्षा तो करे, लेकिन बाहरी ताकतों के वर्चस्व, संसाधनों पर असमान नियंत्रण और फ़िलिस्तीनियों के जीवन को तबाह करने की प्रक्रिया को भी जारी रखे, तो उससे वास्तविक संप्रभुता और शांति नहीं आ सकती। क्षेत्रीय स्वायत्तता का पैमाना यह होना चाहिए कि उससे जनता की संप्रभुता और फ़िलिस्तीन की आज़ादी को कितना बढ़ावा मिलता है।
चिड़िया की आँख, हाक़िम अल-आकिल (यमन), 2014
साल 1986 में यमन के महान कवि अब्दुल्ला अल-बरदूनी (1929-1999) की ख़ूबसूरत कविता ‘ओ मुस्तफ़ा’ (يا مصطفى) छपी। मैं जनता हूँ यह लंबी कविता है, लेकिन मुझे लगता है कि यह यमन और ईरान से लेकर सूडान तक इस क्षेत्र के मौजूदा दौर को बख़ूबी बयान करती है:
उन्हें बम बरसाने दो : वे तुम्हें तोड़ नहीं सकते।
उन्हें गुस्से में पागल होने दो : तुम्हारा तेवर उनसे कहीं अधिक तीखा है।
उन्हें अपनी पूरी ताक़त जुटाने दो : तुम जानते हो कि
दूसरों को डराने वाले ख़ुद कहीं ज़्यादा डरे हुए हैं।वे अधिक अमीर हैं, फिर भी अधिक बदहाल;
कमज़ोर हैं, फिर भी अधिक क्रूर।
ज़्यादा दिखाई देते हैं, फिर भी ज़्यादा छिपे हुए हैं;
ज़्यादा बदनाम हैं, फिर भी ज़्यादा घमंडी।उनके पास लोहा और आग है,
फिर भी वे तिनके से कमज़ोर हैं।
वे मौत की आशंका से डरते हैं;
तुम मौत से कहीं अधिक परिचित हो,
ख़तरों की ओर कहीं अधिक खिंचे चले जाते हो,
और अपने फ़ैसलों पर कहीं अधिक दृढ़ रहते हो।क्योंकि वे अपनी इच्छाओं के लिए जीते हैं,
और तुम जनता के लिए जीते हो।
इसलिए तुम्हारा सामना
खोखले दिखावे से लैस सेनाओं से है।वे पहले से बँटी हुई चीज़ों को और बाँटते हैं,
पहले से तय वर्गों को फिर से वर्गीकृत करते हैं।
वे अपने चारों ओर पहरे और कड़े करते जाते हैं;
लेकिन तुम्हारी मौजूदगी उनसे कहीं अधिक सघन है।तुम अचानक आई बाढ़ की तरह उमड़ पड़ते हो,
ज्वालामुखियों की तरह आगे बढ़ते हो।
तुम त्योहार और वसंत की तरह चारों ओर फैल जाते हो,
सर्दियों की पनाह और गर्मियों के ठिकाने बन जाते हो,
हर जड़ तक पहुँचने वाला रस बन जाते हो,
हर वाद्य में धड़कने वाली लय बन जाते हो।इंतज़ार ने कभी तुम्हारे बारे में यह नहीं कहा :
कि वह झुक गया या रास्ते से हट गया।
किसी सितारे ने कभी नहीं कहा : वह धीमा पड़ गया।
किसी सुबह ने कभी नहीं कहा : वह पीछे रह गया।तुम समय से होड़ लगाते हो : समय थक जाता है,
लेकिन तुम रुकते नहीं।तुम सूरज को अपने पीछे रेलगाड़ी की तरह खींचते चलते हो,
और रात को ओवरकोट की तरह ओढ़ लेते हो।तुमने उन लोगों को भी हैरान कर दिया है, जो कहते थे : वह हद से आगे बढ़ जाता है,
और उन्हें भी, जो तुम्हें अतिवादी कहते हैं।बीच का रास्ता तो और भी कठोर मौत है,
भले ही उन्होंने उसे नरम नाम दिया हो।
क्योंकि वे भटकावों में ज़्यादा संतुष्ट रहते हैं,
और झूठ को सच की तरह पेश करने में ज़्यादा माहिर हैं।तुम्हारे लिए कायरता, कायरता ही है :
न उसका कोई भद्दा रूप है, न कोई सुरुचिपूर्ण रूप।
तुम्हारी नज़र में शर्मिंदगी और भी घिनौनी हो जाती है,
जब वह ज़्यादा आकर्षक रूप में सामने आती है।ओ मुस्तफ़ा, उस घिसी-पिटी कमीज़ के नीचे
आखिर कौन-सा रहस्य छिपा है?
क्या तुम्हारी काया जितनी दुबली है,
तुम्हारी नज़र उतनी ही पैनी है?
क्या तुम्हारा घर जितना साधारण है,
तुम्हारा दिल उतना ही उर्वर है?
क्या तुम्हारे सपने उतने ही अधिक हैं,
जितना अभाव तुम्हारे चेहरे पर झलकता है?तुम्हें हर किसी की इतनी अधिक चिंता क्यों है,
उन सब लोगों से भी ज़्यादा, जो तुमसे अधिक चतुर और पढ़े-लिखे हैं?
तुम्हारी हर धड़कन में एक गीत है;
और वे हैं कि किसी नाज़ुक सुंदरता के अपमान पर आँसू बहाते हैं।क्षितिज तक पहुँचने का रास्ता तुम बेहतर जानते हो,
ज़मीन के नीचे के रास्तों को भी बेहतर पहचानते हो,
विकल्पों को अधिक गहराई से समझते हो,
अनजानी और अजीब चीज़ों को ज़्यादा उजागर करते हो,
अपने हुनर का बेहतर इस्तेमाल करते हो,
और मुसीबत के समय ज़्यादा सही फ़ैसले लेते हो।तुम्हारे पीछे भटकने का कोई रास्ता नहीं,
और आगे बढ़ते हुए तुम कभी पीछे नहीं हटते।
लंबी दूरी तुम्हें निराश नहीं करती,
और मंज़िल के करीब पहुँचकर तुम्हें कोई पछतावा नहीं होता।क्योंकि तुम्हारी चिंता का दायरा बड़ा है,
तुम्हारा मक़सद अधिक नेक है,
तुम्हारा सीना अधिक विशाल है,
और तुम्हारी जेब अधिक साफ़ है।वे तुम्हें तोड़ सकते हैं, लेकिन
तुम पहले से अधिक मज़बूत और संवेदनशील होकर उठ खड़े होते हो।
क्या तुम पके हुए फल की तरह इतनी ऊँचाई तक इसलिए पहुँचे थे
कि लोग तुम पर पत्थर मारें और तुम्हें तोड़ लें?वे तुम्हें मार सकते हैं, लेकिन
मौत की आख़िरी हद से भी तुम और अधिक तूफ़ानी होकर लौटते हो।
क्योंकि तुम्हारी जड़ें और तेज़ी से फैलती हैं,
तुम्हारी जलधारा ज़मीन को और उपजाऊ बनाती है।
क्योंकि तुम्हारी मौत में भी इतनी ज़िंदगी है
जितनी लाखों ऐशो-आराम में जीने वाले लोगों की ज़िंदगी में नहीं।वे तुम पर अपने सारे हथियार आज़मा लें,
लेकिन तुम्हारे भीतर उनसे कहीं अधिक ताकत है, जिससे तुम पलटकर वार कर सकते हो।
वे मिट जाएँगे, लेकिन तुम्हारे भीतर
वह चीज़ फलती-फूलती रहेगी, जिसे मिटाया नहीं जा सकता।क्योंकि तुम एक व्यक्ति में समाया हुआ पूरा संसार हो,
ऐसी विशेषता, जिसे कोई साँचा अपने भीतर नहीं समेट सकता।ओ मुस्तफ़ा, तुम हर दिल से मिलकर बनी
एक किताब हो,
तुम आने वाला वह समय हो,
जो इस झूठे और बनावटी दौर को मिटा देगा।
स्नेह सहित,
विजय