भविष्य का मतलब कैलेंडर में कोई आने वाली तारीख़ नहीं है। यह संघर्ष है, मानवता को पूँजीवाद की जकड़ से छुड़ाने का और उस राह चलने का जहाँ समस्याएँ सचमुच हल होंगी।
1955 में वैश्विक दक्षिण के तत्कालीन नेता इंडोनेशिया के बांडुंग में राष्ट्रीय स्वतंत्रता और सहयोग की भावना लेकर एक सम्मेलन में इकट्ठा हुए। आज सत्तर साल बाद क्या यह भावना बची है?
यह डोसियर तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष की विशाल सांस्कृतिक विरासत का ब्यौरा पेश करता है और इस बात पर रोशनी डालता है कि कैसे गीतों और नाटकों ने जनता को उपनिवेशवाद, राजशाही और जमींदारी के खिलाफ…