एशिया न्यूज़लेटर

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एशिया से दूर रहो: संप्रभुता और एकजुटता के लिए कोलंबो घोषणापत्र

चौदहवाँ एशिया न्यूज़लेटर (2026)
पंद्रह एशियाई देशों के प्रतिनिधियों ने कोलंबो में आयोजित एक सम्मेलन में विदेशी सैन्य अड्डों, कर्ज की गुलामी, तख्तापलट की कोशिशों, वैचारिक नियंत्रण के अंत का आह्वान किया। 
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अन्य न्यूज़लेटर

ताइवान में यूएस वैचारिक नियंत्रण का बोझ

बारहवाँ एशिया न्यूज़लेटर
1979 में यूएस के आख़िरी सिपाही के ताइवान से चले जाने के बावजूद इस पर वॉशिंगटन की पकड़ ढीली नहीं हुई — बस नियंत्रण की सूरत बदल गई, बैरकों और जंगी जहाज़ों की बजाए शिक्षा…
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ईरान और वह ढाल जो निशाना बन गई

ग्यारहवाँ एशिया न्यूज़लेटर
फ़ारस की खाड़ी की राजशाहियों को हिफ़ाज़त के नाम पर बेचे गए विदेशी सैन्य अड्डों ने उन्हें एक अनचाही जंग में खींच लिया और जवाबी हमलों में उनकी सरज़मीन पहला निशाना बनी।
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केरलम् में कम्युनिस्ट चुनाव भले हारे हों, लेकिन उनका काम जारी है

दसवाँ एशिया न्यूज़लेटर
दशकों के सांगठनिक कार्य ने एक बँटे हुए समाज को सार्वजनिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, सहकारी संस्थाओं और काडर-निर्माण के ज़रिए बदला है। यह इस बात का प्रतीक है कि कम्युनिस्ट आंदोलन चुनावी हार के बावजूद…
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आज़ादी और स्वाधीनता से क़ीमती कुछ नहीं

नौवाँ एशिया न्यूज़लेटर
पूरे एशिया से महिला बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक सच्चाई उजागर की: इस महाद्वीप में फैले यूएस सैन्य अड्डे अपने मेज़बान देशों की रक्षा नहीं करते — वे युद्ध लाते हैं, ज़मीन में ज़हर…
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एशिया के लोग युद्ध की कीमत जानते हैं

आठवाँ एशिया न्यूज़लेटर (2026)
ओकिनावा के किसानों से लेकर फ़िलीपींस के ‘मैग्निफिसेंट 12’ तक — एशिया के लोगों ने यूएस सैन्यवाद का सामना पहले भी किया है। विरोध की यह परम्परा आज और भी ज़रूरी हो उठी है, क्योंकि…
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