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घेरेबंदी के बीच भी अलग-थलग और अकेला नहीं है क्यूबा

क्यूबा के लोगों ने धैर्य व इच्छाशक्ति बनाए रखी है और वे यूएस प्रतिबंधों का दृढ़ता के साथ सामना कर रहे हैं।

Hands Off Asia सम्मेलन में ‘क्यूबा के मौजूदा हालात’ पर श्रीलंका में क्यूबा की राजदूत, पैट्रिशिया पेगो ग्वेरा, द्वारा दिए गए वक्तव्य का हिंदी रूपांतरण।

 

मैं इस मुद्दे पर अपनी बात क्यूबा से हर दिन मिलने वाली जानकारी के आधार पर रखूँगी। मैं इस समय श्रीलंका में हूँ, लेकिन मेरा परिवार क्यूबा में है, इसलिए आपको बता सकती हूँ कि अभी वहाँ क्या चल रहा है। इस समय हालात बेहद कठिन हैं, शायद क्यूबाई क्रांति के बाद से और 60 से ज़्यादा सालों से जारी यूएस नाकेबंदी में सबसे कठिन स्थितियों का सामना कर रहे हैं क्यूबा के लोग।

क्यूबा का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दस साल पहले की तुलना में तेज़ी से नीचे जा रहा है। महँगाई बहुत पहले ही दो अंकों में पहुँच चुकी थी। अर्थशास्त्र के लिहाज से आप जानते हैं कि महँगाई की एक सीमा होती है। अगर यह एक अंक में है तो आप इसे प्रबंधित या नियंत्रित करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन जब यह दो अंकों में चली जाती है, तो अनियंत्रित हो जाती है। और क्यूबा में तो दिसंबर [2025] में ही महँगाई 15% छू चुकी थी। अब पहले से भी अधिक कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के लागू होने के साथ महंगाई और बढ़ी ही होगी। आवश्यक वस्तुओं के दाम —यानी भोजन और लोगों की अन्य दैनिक जरूरतों के दाम— इस महँगाई के कारण लगातार ऊँचे होते जा रहे हैं। यह एक डोमिनो प्रभाव की तरह है जहाँ एक समस्या दूसरी को जन्म देती है।

उदाहरण के लिए, इस समय क्यूबा में लोगों के बीच विनिमय दर (exchange rate) एक डॉलर या एक यूरो की विनिमय दर लगभग 500 [क्यूबन पेसो] हो सकती है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र का वेतन लगभग 3000 से 4000 [क्यूबन पेसो] के आसपास है, जिसे सरकार द्वारा कुछ हफ़्ते पहले ही बढ़ाया गया था। तो आप खुद हिसाब लगा सकते हैं कि मुद्रा के इस भारी अवमूल्यन में 4000-5000 के वेतन से क्या किया जा सकता है। आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी के कारण मुद्रा गिरती जा रही है। सड़कों पर भोजन मिलना/खरीदना मुश्किल हो गया है।

हम बहुत आभारी हैं क्योंकि हमें कई देशों, विशेष रूप से कई एशियाई देशों से सहायता मिल रही है। क्यूबा के लोग एशियाई देशों से मिले समर्थन को गहराई से महसूस करते हैं और इसकी बहुत सराहना करते हैं—हमारे एशियाई देशों के भाइयों, बहनों और कॉमरेडों के समर्थन की हम सराहना करते हैं। मैं यहाँ कोई ख़ास नाम नहीं लेना चाहती ताकि ग़लती से किसी का नाम छूटने पर कोई कूटनीतिक समस्या न हो, लेकिन हम हर प्रकार के समर्थन के लिए अत्यधिक कृतज्ञ हैं।

तेल नाकेबंदी हमारे दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। सार्वजनिक परिवहन की हालत बहुत ख़राब है क्योंकि हमारे पास पर्याप्त बसें नहीं हैं। जिस किसी के पास निजी कार या टैक्सी है, उसे बहुत ऊँची कीमत पर ईंधन ख़रीदना पड़ता है। परिणामस्वरूप, लोगों को टैक्सी का किराया पिछले साल की तुलना में तीन, चार, या पाँच गुना अधिक चुकाना पड़ रहा है। इसके अलावा, दवाओं और चिकित्सा आपूर्ति की भी भारी कमी है।

जो लोग पहले कभी क्यूबा आ चुके हैं, वे आज वहाँ की फार्मेसियों को दवाओं से भरा हुआ नहीं पाएँगे। यूएस के प्रतिबंधों के कारण न केवल वे दवाएँ प्रभावित हैं जिन्हें हम विदेशों से ख़रीद सकते हैं, बल्कि वे दवाएँ भी प्रभावित हैं जिन्हें हम अपने मज़बूत फार्मास्यूटिकल और बायो-टेक्नोलॉजी उद्योग के जरिए ख़ुद बनाते हैं।

आपको शायद याद होगा कि जब कोविड आया था, तब विकासशील दुनिया के गिने-चुने देशों में क्यूबा एक ऐसा देश था, जो अपनी ख़ुद की वैक्सीन बनाने में सक्षम रहा। दुनिया के कई अन्य विकासशील देशों के विपरीत, क्यूबा ने अपनी आबादी को अपनी वैक्सीनों से बचाया और फिर कम विकसित देशों को सहायता के रूप में भी वैक्सीनें भेजी गईं। यह इस बात का उदाहरण है कि हमारा [फार्मास्यूटिकल] सेक्टर कितना मज़बूत है, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए हमें बाहर से सामग्री की आवश्यकता है। यूएस वित्त मंत्रालय द्वारा दुनिया भर के बैंकों पर दबाव डाले जाने के कारण यह एक बहुपक्षीय प्रतिबंध बन चुका है।

इससे पहले यूरोपीय बैंक क्यूबा के साथ लेनदेन करने, पैसे भेजने या लेने, या मध्यस्थ बैंकों (intermediary banks) के रूप में काम करने में सक्षम थे। आज श्रीलंका जैसे मित्र देशों —जिससे क्यूबा के साथ घनिष्ठ और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं— में भी यदि कोई [व्यक्ति/संगठन] बैंक में क्यूबा पैसे भेजने जाता है, तो बैंक इसके लिए तैयार हो जाते हैं, लेकिन समस्या यूरोप के मध्यस्थ बैंकों की है जो यूएस दंड के डर से इसे रोक देते हैं। यदि कोई मध्यस्थ बैंक मिल भी जाए, तो अमेरिकी विभाग द्वारा उस पर एक-दो मिलियन यूरो का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यही कारण है कि व्यापारिक समुदाय और निवेशक क्यूबा के साथ कारोबार करने से कतराते हैं।

कनाडा, यूरोप और लैटिन अमेरिका से आने वाले पर्यटक क्यूबा की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा हैं। यूएस कानून के अनुसार वहाँ से पर्यटन के लिए यात्रा करना अवैध है—यह एक बड़ा विरोधाभास है कि लोकतंत्र का दावा करने वाला देश अपने नागरिकों को क्यूबा जाने से रोकता है और क्यूबा को एक आतंकवादी मुल्क बताता है।

आज कनाडाई पर्यटक पहले जितनी संख्या में नहीं आ रहे हैं, क्योंकि ईंधन की नाकेबंदी के चलते उनकी वापसी के समय विमानों में दोबारा ईंधन भराने की सुविधा क्यूबा में उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, क्यूबा को लेकर भयानक दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है कि वहाँ होटलों में खाना नहीं है, बिजली नहीं है, और एयर कंडीशनर काम नहीं करते, जिसके कारण पर्यटक डोमिनिकन गणराज्य जैसे अन्य कैरिबियन देशों का रुख कर रहे हैं, जो कि बिल्कुल अनुचित है।

मेरे परिवार के अनुसार (मेरी बेटी हर दिन मुझसे बात करती है) शायद यह हमारे इतिहास का सबसे ख़राब दौर है। कल, जिस जगह हम रहते हैं, वहाँ 24 घंटों में से केवल कुछ ही घंटे बिजली थी। लोग बिना बिजली के सोते हैं, बिना बिजली के उठकर काम पर जाते हैं। परिवहन के साधन न होने पर लोग पैदल आना-जाना कर रहे हैं या साइकिल का उपयोग कर रहे हैं। जिन घरों में बिजली नहीं है, वहाँ रेफ्रिजरेटर न चलने के कारण फ्रोज़न फूड और अन्य खाद्य पदार्थों का टिकना असंभव हो रहा है।

जब मैं श्रीलंका में राजनीतिक समूहों से बात करती हूँ, तो हमेशा कहती हूँ कि क्यूबा के लोग जुझारू हैं। हम बहुत भाग्यशाली थे कि हमारे पास फिदेल कास्त्रो जैसे ऐतिहासिक नेता थे जो हमारी प्रेरणा बने। लेकिन अब राष्ट्रपति ट्रम्प के दूसरे शासन काल के साथ स्थिति और बदतर हो गई है—क्यूबा और वेनेजुएला पर हर दिन नए कार्यकारी आदेश और आर्थिक प्रतिबंध थोपे जा रहे हैं।

आज ही मैंने क्यूबा जाने वाले एक व्यक्ति को सलाह दी कि वह अपने साथ पर्याप्त नक़द ज़रूर रखे, क्योंकि वीजा/मास्टरकार्ड जैसे क्रेडिट या डेबिट कार्ड प्रतिबंधों के कारण वहाँ काम नहीं कर रहे हैं।

1959 से लेकर अब तक—चाहे वह कैनेडी के समय चीनी के कोटे को रद्द करना हो, पिग्स खाड़ी का आक्रमण हो, रोनाल्ड रीगन का कार्यकाल हो, बुश की नीतियाँ हों, या क्लिंटन के समय का हेल्म्स-बार्टन अधिनियम हो—हमने हर कठिनाई का सामना किया है। फ्लोरिडा की चुनावी राजनीति के कारण अमेरिकी कांग्रेस पर बने दबाव और मार्को रुबियो जैसे नेताओं की नीतियों के बावजूद क्यूबा के लोगों में गरिमा का बहुत गहरा भाव है और जीने की दृढ़ इच्छाशक्ति है।

क्यूबा का यह संघर्ष केवल क्यूबा के लिए नहीं, बल्कि श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और पूरे एशिया के लिए महत्त्वपूर्ण है। आज स्पष्ट है कि क्यूबा अकेला नहीं है; क्यूबा अकेला नहीं है, एशिया क्यूबा के साथ खड़ा है।

<फिदेल के 100वें जन्मदिवस पर आयोजित एक ऑनलाइन कला प्रदर्शनी Fidel 100 यहाँ देखें>