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आज़ादी और स्वाधीनता से क़ीमती कुछ नहीं

पूरे एशिया से महिला बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक सच्चाई उजागर की: इस महाद्वीप में फैले यूएस सैन्य अड्डे अपने मेज़बान देशों की रक्षा नहीं करते — वे युद्ध लाते हैं, ज़मीन में ज़हर घोलते हैं, और लोगों को अपाहिज करते हैं।

दिन क्यू ले (वियतनाम), बिना शीर्षक, 2004.

प्रिय साथियो,

ट्राईकॉन्टिनेंटल एशिया की ओर से अभिवादन।

वियतनाम मुक्ति की सालगिरह पर इंटरनैशनल पीपल्ज़ असेम्बली और ट्राईकॉन्टिनेंटल एशिया ने ‘एशिया से दूर हटो!’ मुहिम शुरू की। इस मुहिम के तहत एशिया से यूएस और नाटो अड्डों को हटाने, आक्रामक सैन्य समझौतों को ख़त्म करने, और एशियाई संप्रभुता का सम्मान करने की माँग की गई। इस मौक़े पर हमने एशियाई महिला बुद्धिजीवियों और संगठनकर्ताओं के साथ एक वेबिनार का आयोजन किया। हनोई, इस्फ़हान, नाहा, ताइपे, मनीला और सियोल से भाग लेने वाली तमाम महिलाओं ने साम्राज्यवादी उत्पीड़न के अपने अनुभव साझा किए।

वियतनाम: ‘चार इनकार’

मार्क्सवादी-लेनिनवादी अनुवादक लूना न्गुयेन ने ज़ोर देकर कहा कि 1975 में साइगॉन की मुक्ति के बाद भी यूएस साम्राज्यवाद ख़त्म नहीं हुआ है। आज वियतनाम पर फ़ौजों से आक्रमण नहीं हो रहा। बल्कि वह प्रतिबंधों के अप्रत्यक्ष हमले, एनजीओ के जाल, और पश्चिमी फ़ंडिंग एजेंसियों तथा वैश्विक वित्तीय संस्थानों द्वारा आयोजित ‘प्रतिक्रांति गतिविधियों’ का आक्रमण झेल रहा है। 1990 के दशक में वॉशिंगटन से रिश्ते सामान्य करने के लिए हनोई को मजबूर किया गया कि वह हारे हुए साइगॉन शासन का 14.5 करोड़ डॉलर का क़र्ज़ अपने सिर ले ले। यानी वियतनाम ने यूएस को उन बमों की क़ीमत चुकाई जिन्होंने उसके अपने लोगों का क़त्लेआम किया था। यह भुगतान अभी सात साल पहले ही पूरा हो सका।

इसी तजुर्बे से वियतनाम की रक्षा नीति में ‘चार इनकार‘ शामिल हुए: किसी भी तरह के सैन्य गठबंधन को इनकार; किसी एक मुल्क के साथ मिलकर दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा होने से इनकार; वियतनामी ज़मीन पर कोई विदेशी सैन्य अड्डा बनाने से इनकार; और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में बल/धमकियों का प्रयोग करने से इनकार। हालाँकि वॉशिंगटन दशकों से वियतनामी तट पर अपने नौसैनिक अड्डे बनाने के अधिकार के लिए दबाव डालता रहा है, लेकिन जवाब हमेशा ‘इनकार’ ही रहा।

किडलाट ताहिमिक, मैगेलन, मेरिलिन, मिकी और फ़ादर दामासो।“कोंक्विस्तादोर रॉकस्टार्स के 500 वर्ष”, तिथि अज्ञात।

ईरान: सुरक्षा कवच या निशाना

तेहरान विश्वविद्यालय की डॉ. सितारेह सादेक़ी इस्फ़हान, ईरान से जुड़ी थीं। अपने मुल्क पर अमरीकी-इज़राइली हमले में युद्धविराम के कुछ हफ़्ते बाद, उन्होंने उस इलाक़े की बात की जहाँ बहुत से मुल्कों ‘इकरार’ का रास्ता चुना है। फ़ारस खाड़ी की राजशाहियों ने अपनी ज़मीन और हवाई सीमा यूएस सैन्यवाद को लीज़ पर दे दी है। क़तर के अल-उदैद हवाई अड्डे से लेकर बहरीन की नौसैनिक सहायता और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस, फ़ारस खाड़ी की राजशाहियाँ यूएस सैन्य आपूर्ति केन्द्रों के घने जाल में शामिल हो चुकी हैं।

ये सभी अड्डे यह कह कर बेचे गए थे कि युद्ध की स्थिति में ये ढाल बनेंगे; पर हालिया जंग ने साबित कर दिया कि ये ख़ुद निशाना बनते हैं। अक्टूबर 2023 से इस इलाक़े में यूएस अड्डों पर 170 से ज़्यादा हमले दर्ज हो चुके हैं, और क्षेत्रीय नुक़सान 50 अरब अमेरिकी डॉलर से ऊपर जा चुका है। सादेक़ी ने कहा: ‘मेज़बान मुल्क सिर्फ़ ढाल नहीं बनते। वे निशाना भी बनते हैं।’

उन्होंने कहा यह भ्रम विचारधारा के सहारे टिका हुआ है। क्रिस्टोफ़र वीवर के साथ लिखे अपने लेख ‘हाइपररियल वॉरियर्स एंड द ओरिएंटलिस्ट फ़ोज़‘ में सादेक़ी दिखाती हैं कि पश्चिमी विमर्श कैसे ईरान को एक ही साथ पागल और ख़तरनाक बताता है। इस विमर्श से एक ही रास्ता निकलता है, वॉशिंगटन पर हमेशा की निर्भरता। लेकिन सादेक़ी का लेख एक ज़रूरी हक़ीक़त पेश करता है: ‘सुरक्षा के लिए साम्राज्यवादी ताक़त से दूरी चाहिए, उस पर निर्भरता नहीं।’

ओकिनावा, जापान: लोहे का तूफ़ान अभी थमा नहीं

‘नो मोर बैटल ऑफ़ ओकिनावा’ से जुड़ी केइको योनाहा ने अपने लोगों के साथ हुए विश्वासघातों का ब्यौरा दिया। ओकिनावा की लड़ाई (1945) में लगभग 25-30% ओकिनावावासियों ने जान गँवाई थी। यूएस-जापान सैन फ़्रांसिस्को शांति संधि (1951) के साथ जुड़े दो गुप्त समझौतों के तहत वॉशिंगटन को जापान में कहीं भी अड्डे बनाने और किसी भी संकट में जापानी सेना की कमान अपने हाथ ले लेने का अधिकार है। यूएस सेना ने बुलडोज़रों आदि से ज़बरदस्ती ज़मीन छीनकर ओकिनावा के किसानों को देश-निकाला दे दिया, जिनमें से कुछ तो बोलीविया तक जाने को मजबूर हो गए। ओकिनावा जापान के कुल इलाक़े का 0.6 फ़ीसदी है, लेकिन आज पूरे मुल्क में मौजूद यूएस सैन्य केंद्रों में से क़रीब 70 फ़ीसदी यहाँ हैं।

सैन्यीकरण की क़ीमत शारीरिक, मानसिक और पर्यावरणीय — हर तरह से चुकाई जा रही है। ‘ओकिनावा वीमेन एक्ट अगेंस्ट मिलिट्री वायलेंस‘ ने 1945 से यूएस सैनिकों द्वारा किए गए यौन अपराधों का रिकोर्ड तैयार किया है। 1945 में पाँच साल की बच्ची का बलात्कार कर हत्या कर दी गई। यही हुआ 1949 में नौ महीने के शिशु के साथ। 1995 में पाँचवीं कक्षा की एक बच्ची के साथ तीन यूएस सैनिकों ने बलात्कार किया। 2016 में बीस साल की औरत की हत्या कर दी गई। 2023 में सोलह से कम उम्र की एक लड़की का बलात्कार किया गया और यह मामला टोक्यो ने छह महीने दबाए रखा। पीएफ़एएस जैसे ‘कभी न ख़त्म होने वाले रसायनों’ से पीने का पानी ज़हरीला हो रहा है। पर इसकी जाँच नहीं हो सकती क्योंकि यूएस-जापान स्टेटस ऑफ़ फ़ोर्सेज़ एग्रीमेंट ओकिनावावासियों को उनकी अपनी ज़मीन पर जाने से रोकता है।

दिसम्बर 2021 में दोनों सरकारों ने पुष्टि की कि ओकिनावा किसी भी तथाकथित ‘ताइवान आपात स्थिति’ में यूएस हस्तक्षेप का लॉन्च पैड बनेगा। केइको ने हमें याद दिलाया कि 1969 में जनता के विशाल प्रदर्शनों ने यूएस राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की उन्मादी ‘मैडमैन थ्योरी’ को हराया था, जिसके तहत वियतनाम युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल करने की बात की गई थी। उनके कहने का तात्पर्य यह था कि आंदोलन आज भी साम्राज्यों को हरा सकते हैं।

नाकामुरा हिरोशी (जापान), ताचिकावा स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे के रेखाचित्र, 1955.

ताइवान, चीन: वैचारिक उपनिवेशीकरण

नैशनल चेंग कुंग विश्वविद्यालय की एमेरिटा प्रोफ़ेसर और दिआओयूताई शिक्षा संघ की संस्थापक अध्यक्ष चेन मेई-शिया ने ताइवान, चीन को साम्राज्यवादी दख़लों की तीसरी कड़ी बताया: डच (1624–1662) पहली, जापानी (1895–1945) दूसरी, और ‘कभी न ख़त्म होने वाला यूएस सैन्य और वैचारिक नियंत्रण’, जो 1950 से आज तक जारी है। चालीस साल के मार्शल लॉ (1947–1987) और वॉशिंगटन द्वारा समर्थित ‘वाइट टेरर’ ने कितने ऐसे लोगों की जान ले ली जिन्होंने लोकतंत्र या मेनलैंड चीन के साथ पुनर्मिलन के लिए लड़ाई लड़ी।

जब वॉशिंगटन ने 1979 में जनवादी गणराज्य चीन से रिश्ते सामान्य किए, तो ताइवान से फ़ौज तो हटा ली, लेकिन उसे फिर भी अपने नियंत्रण में रखा। ताइवान रिलेशन्ज़ एक्ट के ज़रिये हर यूएस राष्ट्रपति ने हथियारों की बिक्री को मंज़ूरी दी है। इनमें सबसे हालिया उदाहरण है 400 अरब अमेरिकी डॉलर का पैकेज, जिसके तहत यूएस सैनिक ताइवान की सेना को प्रशिक्षण भी देंगे।

इसके साथ ही एक गहरा वैचारिक तंत्र काम कर रहा है। शिक्षा व्यवस्था, ईस्ट-वेस्ट सेंटर जैसे फ़ेलोशिप पाइपलाइन, और एक नियंत्रित मीडिया उद्योग –– इन सबने मिलकर एक व्यापक चेतना गढ़ी है जिसे चेन ‘अमरीका-परस्त, कम्युनिस्ट-विरोधी, चीन-विरोधी’ बताती हैं। चेन ने कहा कि फ़ौज की वापसी ‘वैचारिक नियंत्रण से कम ख़तरनाक नहीं है’।

एम हिल, एआईसीडी (ऑस्ट्रेलिया), अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और वियतनाम युद्ध के ख़िलाफ़ विरोधप्रदर्शन से स्क्रीनप्रिंट, 1970.

फ़िलीपीन्स: ट्रिपवायर से ‘पैक्स सिलिका’ तक

इंटरनैशनल पीस ब्यूरो की सह-अध्यक्ष कोराज़ोन वाल्देज़ फ़ैब्रोस ने बालिकातान 2026 — उनके मुल्क के इतिहास में सबसे बड़े युद्धाभ्यास — के ख़िलाफ़ बात रखी। सात मुल्कों के सत्रह हज़ार सैनिक फ़िलीपीनी ज़मीन पर मौजूद हैं। जापानी टाइप-88 मिसाइलें इस संप्रभु ज़मीन पर तैनात की गई हैं। मनीला की उत्तर-पश्चिम सूबिक नगरपालिका में ईंधन भण्डार और गोला-बारूद केन्द्र बना दिए गए हैं।

सिपरी के मुताबिक़, 2025 में दुनिया भर का सैन्य ख़र्च 2.9 खरब अमेरिकी डॉलर के अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गया, जिसमें अकेला यूएस 954 अरब डॉलर खर्च कर रहा है — यानी पूरी दुनिया के जंगी बजट का एक-तिहाई। फ़ैब्रोस ने कहा कि, ‘जंग पर उड़ाया गया हर पेसो और डॉलर लोगों के जीने के बुनियादी हक़ की सीधी चोरी है।’

जंगी अर्थव्यवस्था का असर रसोई तक होता है। फ़िलीपीन्स में महँगाई दर 4.1 फ़ीसदी चल रही है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य [स्ट्रैट] में, जो ईरान पर यूएस-इज़राइली जंग के कारण बंद हो गया, बीस लाख फ़िलीपीनी प्रवासी मज़दूरों बंधक हैं। इस बीच, ‘पैक्स सिलिका’ के ब्रांड नाम से न्यू क्लार्क सिटी में 4,000 एकड़ का अमरीकी हाई-टेक मैन्यूफ़ैक्चरिंग ज़ोन बना लिया गया है। फ़ैब्रोस के शब्दों में यह ‘एक औपनिवेशिक बस्ती है जिसे राजनयिक छूट प्राप्त है और जो 99 साल तक यूएस कॉमन लॉ से चलेगी’।

लॉकहीड मार्टिन, इंटेल, माइक्रॉन, और अप्लाइड मटीरियल्ज़ प्रौद्यौगिकी कंपनियाँ नहीं हैं। ये उन मिसाइल सिस्टमों को बनाती हैं जिन्हें फ़िलीपीनी समुद्रों में टेस्ट किया जाता है। ‘यह नवाचार नहीं है। यह तरक़्क़ी के भेस में क़ब्ज़ा है।’ उन्होंने ‘स्टॉप द वॉर कोएलिशन फ़िलीपीन्स’ से प्रेरित स्पष्ट माँगें सामने रखीं:  सैन्य बजट कम करो, पैक्स सिलिका को हटाओ, ग़ैर-बराबर समझौते रद्द करो, और पश्चिमी फ़िलीपीन सागर को बतौर वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति बचाओ।

कोरिया: एक ‘स्थाई विमानवाहक पोत’

सियोल के इंटरनैशनल स्ट्रैटजी सेंटर से ह्वांग जॉन्गउन ने वे बात सबके सामने रखी जो अब साम्राज्य खुलकर बोलता है। अगस्त 2025 में डॉनल्ड ट्रम्प ने एक शिखर सम्मेलन में कहा कि उन्हें कोरिया में उस ज़मीन की मिल्कियत चाहिए जहाँ उनका विशाल सैन्य अड्डा है’। मई 2025 में यूएस फ़ोर्सेज़ कोरिया के कमांडर जनरल ज़ेवियर ब्रन्सन ने कोरिया गणराज्य को ‘जापान और मेनलैंड चीन के बीच पानी में तैरता हुआ एक स्थाई विमानवाहक पोत’ बताया। कोरिया बीजिंग के इर्द-गिर्द यूएस का सबसे नज़दीकी सहयोगी है। ब्रन्सन ने एक ‘किल वेब’ की भी घोषणा की जो दक्षिण कोरिया, जापान और संभवत: फ़िलीपीन्स की सेनाओं को एक साथ लाकर जनवादी गणराज्य कोरिया (उत्तर कोरिया), चीन और रूस पर निशाना साधेगा।

दक्षिण कोरिया में स्थित 28,500 यूएस सैनिकों, 62 अड्डों और 9.5 करोड़ वर्ग मीटर ज़मीन का मक़सद तेज़ी से बदला जा रहा है। कोरिया की रक्षा के नाम पर तैनात किए गए ये सारे तामझाम चीन के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ़ सियोल पर दबाव डाला जा रहा है कि वह सैन्य ख़र्च को बढ़ा कर जीडीपी का 3.5 फ़ीसदी करे। ह्वांग ने चेताया कि इस प्रक्रिया में कोरियाई प्रायद्वीप की आपसी सुलह का सपने दफ़नाया जा रहा है।

इंटरनेशनल पीपल्स असेंबली और ट्राईकॉन्टिनेंटल एशिया द्वारा आयोजित “हैंड्स ऑफ एशिया! (एशिया से दूर हटो)” वेबिनार का पोस्टर, 2026.

लंबा इनकार

दुनिया में क़रीब 902 ज्ञात यूएस सैन्य अड्डे हैं, और उनमें से बहुत-से एशिया में हैं। इन अड्डों के साथ सभी जगह एक भ्रम फैलाया जाता है: कि ये अपने मेज़बान देशों की हिफ़ाज़त करते हैं। लेकिन ओकिनावा से मनीला तक, बहरीन से सियोल तक, जहाँ भी यूएस अड्डे हैं, वहाँ एक ही सबक़ सीखने को मिल रहा है: कि ये अड्डे जंग को अपने दरवाज़े तक ले आते हैं और इन जंगों के क़ीमत अपाहिज शरीरों, ज़हरीले पानी, छीनी हुई ज़मीन और भुखमरी द्वारा चुकाई जाती है। उपनिवेश को हमेशा हिफ़ाज़त के नाम पर बेचा जाता है।

लेकिन एशिया साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को भूला नहीं है। ओकिनावा की लड़ाई ओकिनावा के गवाहों को चुप नहीं करा सकी। वाइट टेरर ताइवान के मज़दूर आंदोलन को दबा नहीं सका। ईरान की जनता, चार दशकों के बेरहम प्रतिबंधों के बाद भी, ज़लालत से इनकार करती है। हो ची मिन्ह ने कहा था: ‘आज़ादी और स्वाधीनता से क़ीमती कुछ नहीं।’ यही मुक्ति [संघर्षों] की विरासत है, और यही आज की माँग।

वियतनाम से दूर हटो। ईरान से दूर हटो। ओकिनावा से दूर हटो। ताइवान से दूर हटो। फ़िलीपीन्स से दूर हटो। कोरिया से दूर हटो। एशिया से दूर हटो!

स्नेह सहित,

ट्राईकॉन्टिनेंटल एशिया