चीन की वैश्विक पहल दुनिया को क्या दे सकती हैं: बयालीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)
युद्ध, ऋण, कॉर्पोरेट शक्ति और तकनीकी निर्भरता के बीच, पाँच चीनी प्रस्ताव शांति और संप्रभुता से जुड़े लंबे समय से दबाए गए प्रश्न को फिर से खोलते हैं।
कवि शिए और उनके साथी, यांग शांगशन (चीन), तिथि अज्ञात
प्यारे दोस्तो,
ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।
एक तरफ़ फिलिस्तीन से लेकर यूक्रेन तक और सूडान से लेकर ईरान तक युद्ध की आग भड़की हुई है, दूसरी तरफ़ महँगाई बढ़ रही है। इनसे दुनिया के अरबों लोगों का मनोबल टूट रहा है। इस तनावपूर्ण माहौल से निकालने का कोई रास्ता नज़र नहीं आता। समझ नहीं आता कि हालात कैसे सुधरेंगे। नाटो शक्तियाँ रूस को हराने की क़वायद कर रही हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) ईरान के इस्लामी गणराज्य में तख़्तापलट की कोशिश कर रहा है। ये दोनों ही प्रयास यथार्थ से बहुत दूर हैं: रूस एक परमाणु शक्ति है जो गंभीर से गंभीर ख़तरे का सामना करने की क्षमता रखता है, दूसरी ओर ईरान ने साबित कर दिया है कि वह इस क्षेत्र में यूएस के ठिकानों को गंभीर नुक़सान पहुँचा सकता है। दोनों ही मामलों में समर्पण की कोई संभावना न होते हुए ही आक्रामक शक्तियाँ समझौता करने के बारे में संजीदा नहीं हैं।
निराशा की इस स्थिति में चीन की सरकार ने पाँच पहलें प्रस्तावित की हैं:
- बेल्ट एंड रोड ईनीशिएटिव (बीआरआई): आधारभूत ढाँचे, व्यापार और निवेश के ज़रिए बीआरआई का उद्देश्य है एक ‘साझा भविष्य वाले वैश्विक समुदाय’ का निर्माण। इसकी कल्पना चीन की सरकार ने 2023 के श्वेतपत्र में की थी। एक दशक पहले इसके दो प्रमुख भाग प्रस्तावित किए गए थे: पूरे मध्य एशिया में एक आर्थिक बेल्ट (मार्ग) का निर्माण, इसकी घोषणा सितंबर 2013 में कज़ाकिस्तान में हुई थी, और एक समुद्री रेशम मार्ग जिसकी घोषणा अक्टूबर में इंडोनेशिया में हुई थी।
- वैश्विक विकास पहल: सितंबर 2021 में कोविड महामारी के दौर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक विकास योजना तैयार करने का सुझाव दिया, जैसे संयुक्त राष्ट्र 2023 का अजेंडा, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
- वैश्विक सुरक्षा पहल: अप्रैल 2022 में एशिया के लिए बोआओ मंच पर शी जिनपिंग ने एक ऐसी सोच पेश की, जिसके मुताबिक देशों को स्थायी संघर्ष और दबाव की स्थितियाँ पैदा करने की तैयारी करने के बजाय अपने विकास पर ध्यान देना चाहिए। विकास के मार्गदर्शक सिद्धांत क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होने चाहिए।
- वैश्विक सभ्यता पहल: मार्च 2023 में घोषित इस पहल में सभ्यताओं की विविधता और आधुनिकता तक पहुँचने के अलग-अलग रास्तों को स्वीकार किया गया। यह इस धारणा का सीधा खंडन था कि विकास के लिए विदेशी संस्कृतियों और संस्थानों की नक़ल करना ज़रूरी है।
- वैश्विक शासन पहल: सितंबर 2025 में तियानजिन में हुई शंघाई सहयोग संगठन की मीटिंग में राष्ट्रपति शी ने पाँच विचारों के ज़रिए संस्थागत सुधार की ओर ध्यान आकर्षित किया: समान संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय क़ानून का शासन, बहुपक्षवाद, जन-केंद्रित दृष्टिकोण और वास्तविक परिणाम।
वसंत आ गया, यूआन छिंगयी (चीन), 1984
समग्र रूप से देखें तो, ये पाँच पहलें न केवल शांति पर, बल्कि उसकी भौतिक नींव यानी विकास पर भी एक वैश्विक बातचीत के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान करती हैं। इन पाँच पहलों की सार्थकता इस बात से आँकी जानी चाहिए कि क्या वे हमारे समाजों को शांति के मार्ग बनाने, उत्पादक क्षमता का निर्माण करने, और आर्थिक जीवन पर नियंत्रण रखने में मदद करती हैं। ये पहलें उस बहस को फिर से शुरू करने का प्रयास करती हैं, जो 1974 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की स्थापना की घोषणा को अपनाए जाने के साथ अपने चरम पर पहुँची थी। चीन के प्रस्ताव दिखाते हैं कि हमें फलाने-फलाने वैश्विक संस्था में टुकड़ों में सुधार की, या फलाने-फलाने टकराव में युद्धविराम की आवश्यकता नहीं है; बल्कि हमें बहुपक्षवाद के एक व्यापक पुनर्गठन की आवश्यकता है, जो न केवल राज्यों के बीच औपचारिक समानता सुनिश्चित करे, बल्कि आर्थिक शक्ति में निहित गहरी असमानता को भी समाप्त करे।
ये पाँच पहलें अपने आप ही एक नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था स्थापित नहीं कर देंगी। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था फ़िलहाल व्यापार, निवेश, कर, ऋण और प्रौद्यौगिकी को अनुशासित करने के नियमों का एक समूह है। लेकिन ये नियम कॉर्पोरेट की सत्ता को लागू करने के लिए विकसित किए गए हैं न कि अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र स्थापित करने के लिए। ये बहुराष्ट्रीय निगमों (TNCs) द्वारा आकार दिए जाते हैं, जो निवेश को स्थानांतरित करके, लाभ को इधर-उधर करके, और क्षेत्राधिकारों को एक-दूसरे के विरुद्ध रखकर सरकारों पर हावी हो सकते हैं। यदि ये नियम कॉर्पोरेट लाभ को सबसे ऊपर रखना जारी रखते हैं, तो इन पहलों से क्या हासिल किया जा सकता है?
चान चित्रकला, लू शोउकुन (चीन),1970
इन पाँच पहलों के व्यापक सिद्धांतों को वैश्विक दक्षिण के एक कार्यक्रम में बदलना होगा। इसमें वित्तीय संस्थानों में दक्षिणी प्रभाव का विस्तार, औद्योगिक रूपांतरण के अनुकूल विकास वित्त, और ऐसे व्यापार तथा निवेश नियम शामिल होने चाहिए जो आर्थिक विविधीकरण की अनुमति दें। ये सिद्धांत एक बातचीत शुरू करते हैं, लेकिन वैश्विक दक्षिण के सामने इन्हें संस्थागत बल देने का काम है। यह वह पाँच क्षेत्र हैं जिनमें वह कार्यक्रम आकार ले सकता है:
- कर: 2015 के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक कार्य-पत्र में अनुमान लगाया गया था कि बहुराष्ट्रीय निगमों (TNCs) द्वारा कर से बचने से दीर्घकाल में विकासशील देशों को प्रति वर्ष लगभग 213 अरब डॉलर का नुक़सान हो सकता है। उस समय यह संख्या कम आँकी गई थी और ज़ाहिर है कि अब यह बहुत बढ़ गई होगी। इस समस्या से निपटने के लिए, 2025 में अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा सम्मेलन पर वार्ता शुरू हुई। यह प्रक्रिया अब भी जारी है तथा साझा न्यूनतम मानकों और राजस्व आवंटन के माध्यम से समस्याओं के समाधान के लिए एक मौजूदा मंच प्रदान करती है, जो उत्पादन के साथ-साथ बिक्री को भी दर्शाता है। होना यही चाहिए कि देश TNCs के बारे में सूचना का आदान-प्रदान करें, क्षेत्राधिकार के अनुसार सार्वजनिक रिपोर्टिंग की माँग करें, फर्मों को स्थानांतरण की धमकियों के माध्यम से रियायतें हासिल करने से रोकें, और जहाँ वास्तविक आर्थिक गतिविधि होती है वहाँ लाभ पर कर लगाने के लिए सहयोग करें।
- श्रम मानक: देशों को मज़दूर संघों के अधिकारों, सामूहिक सौदेबाज़ी, कार्यस्थल पर सुरक्षा और बंधुआ मज़दूरी से मुक्ति के लिए ऐसे संरक्षण उपायों पर सहमत होना चाहिए, जिन्हें क़ानूनी रूप से लागू कराया जा सके। उन्हें श्रम निरीक्षण से मिले सबूत एक-दूसरे के साथ साझा करने चाहिए और मज़दूरों को ऐसी व्यवस्था देनी चाहिए, जिससे वे दूसरे देशों में भी अपने अधिकारों के लिए दावा कर सकें। आपूर्ति शृंखलाओं में होने वाले शोषण के लिए प्रमुख कंपनियों की ज़िम्मेदारियाँ स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए। क्षेत्रीय समझौते इस प्रवृत्ति को कम कर सकते हैं कि निवेश आकर्षित करने के लिए मज़दूरी और श्रमिक अधिकारों को दबाया जाए। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की बहुराष्ट्रीय उद्यमों पर घोषणा मार्गदर्शन प्रदान करती है; क़ानूनन लागू करने के लिए और विधिक प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता है।
- कॉर्पोरेट जवाबदेही: 2014 में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने व्यवसाय और मानवाधिकार पर क़ानूनी रूप से बाध्यकारी उपाय पर वार्ता के लिए एक कार्य समूह स्थापित किया। एक दशक से अधिक समय बाद, वार्ताओं से क्रमिक मसौदे तो निकले हैं, लेकिन कोई पारित संधि नहीं। एक गंभीर व्यवस्था निवेश समझौतों में सुधार करेगी, ताकि वैध सार्वजनिक विनियमन की रक्षा हो सके और कॉर्पोरेट दायित्वों को क़ानूनन लागू करवाया जा सके। इसमें कॉर्पोरेट दुराचार की जाँच, उन कंपनियों के लिए दायित्व जिनका आचरण या विफलताएँ हानि में योगदान करती हैं, न्यायिक प्राधिकारियों के बीच सहयोग, और एक विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय क़ानूनी प्रणाली के माध्यम से क़ानूनी रूप से लागू उपचार का प्रावधान होना चाहिए।
लिन हेजिंग के सचिव, वांग हे (चीन), 2024
- प्रौद्योगिकी तक पहुँच: विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौते के तहत रोगजनकों तक पहुँच और उनसे मिलने वाले लाभों के बँटवारे से जुड़े परिशिष्ट पर चल रही बातचीत एक ऐसा ठोस मंच है, जहाँ वैश्विक दक्षिण के देश अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए तकनीकी सहयोग की माँग उठा सकते हैं। इन वार्ताओं का संबंध टीकों, उपचारों और जाँच की सुविधाओं तक पहुँच से है। तकनीक हस्तांतरण के बारे में समझौते में किए गए प्रावधान इस दिशा में शुरुआती आधार देते हैं। हालाँकि, इन प्रावधानों में आपसी सहमति से तय की गई शर्तों पर निर्भरता के कारण बहुत कुछ निजी अधिकारधारकों की इच्छा पर छोड़ दिया गया है। सार्वजनिक वित्तपोषण और खरीद में क़ानूनी रूप से लागू शर्तें होनी चाहिए, ताकि प्रौद्योगिकी लाइसेंस सुरक्षित हों, व्यावहारिक ज्ञान साझा हो, श्रमिकों को प्रशिक्षित किया जाए, और घरेलू अनुसंधान तथा आपूर्तिकर्ताओं को मज़बूत किया जाए। दक्षिणी देश अपनी क्रय शक्ति को संयोजित कर सकते हैं और संयुक्त रूप से शोध संस्थानों को वित्तपोषित कर सकते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय नियमों द्वारा अनुमति दिए जाने पर अनिवार्य लाइसेंसिंग का उपयोग करने का अधिकार बनाए रख सकते हैं। केवल पेटेंट तक पहुँच निर्माण की क्षमता नहीं बना सकती: देशों को उपकरण, कुशल श्रमिक, और उत्पादन को संगठित करने के लिए आवश्यक ज्ञान की भी ज़रूरत होती है। असली काम है समझौते की प्रतिबद्धताओं को स्पष्ट लक्ष्यों और समय-सीमाओं वाले दायित्वों में बदलना, जिससे देश स्वयं प्रौद्योगिकियों को अपना सकें, सुधार सकें, और उत्पादन कर सकें।
- ऋण और वित्त: राष्ट्र की सेविला प्रतिबद्धता वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए एक अधिक न्यायसंगत संप्रभु ऋण व्यवस्था के लिए सामूहिक रूप से संगठित होने का अवसर प्रदान करती है, जो ऋण पुनर्गठन पर संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (UNCTAD) के दीर्घकालिक कार्य पर आधारित है। उधार लेने वाले देशों के लिए इसका मंच उन्हें पारदर्शी ऋण, समय पर पुनर्गठन, और ऐसे बाध्यकारी नियमों की माँगों के समन्वय में सक्षम बनाना चाहिए जो निजी लेनदारों को समझौतों में बाधा डालने से रोकें। प्रतिबद्धता द्वारा कल्पना की गई अंतर-सरकारी प्रक्रिया को एक क़ानूनी तौर से लागू बहुपक्षीय रूपरेखा की ओर ले जाना चाहिए, जो आवश्यक सार्वजनिक व्यय की रक्षा करे और आर्थिक रूपांतरण के लिए आवश्यक निवेश के साथ-साथ भुगतान क्षमता का भी मूल्यांकन करे।
वांग यिन (चीन), रेलगाड़ी में, 2013
मैं यह न्यूज़लेटर चीन के जियांग्शी प्रांत के शिनयू से रवाना होने वाली एक हाई-स्पीड ट्रेन में लिख रहा हूँ। शिनयू वह स्थान है जहाँ सत्रहवीं सदी में सोंग यिंगशिंग ने प्रौद्योगिकी पर आधारित पुस्तक तियांगोंग काईवू (प्रकृति के कार्यों का दोहन) लिखी थी। इस पुस्तक ने लू छुआन द्वारा निर्देशित एक नृत्य नाटिका को भी प्रेरित किया है। आज यह क्षेत्र प्रभावशाली कारखानों का घर है – लिथियम बैटरी और सिलिकॉन स्टील के – जो सबसे परिष्कृत उत्पादक तकनीकों का उपयोग करते हैं। शिनयू में रहते हुए, मैंने चीन के रनमिन विश्वविद्यालय के चोंगयांग वित्तीय अध्ययन संस्थान के डीन वांग वेन से पूछा कि वैश्विक दक्षिण की आगे की प्रगति के लिए उन्हें क्या आवश्यक लगता है। उन्होंने तीन क्षेत्रों की ओर इशारा किया: पर्यावरण की देखभाल के साथ औद्योगीकरण, स्थानीय संस्कृतियों का पुनरुद्धार, और अन्य संस्कृतियों के साथ हीनता के बिना बातचीत करने का आत्मविश्वास। शिनयू से जब मैं निकला तो मेरे सामने ग्रामीण इलाक़ा आगे फैलता गया, तब मैंने यह कविता लिखी:
कारखाने में धूल नहीं है।
वह उस जगह अपनी मेज़ पर बैठी है,
जहाँ से सिलिकॉन स्टील सरकता हुआ गुज़रता है,
बारीक लेस की पट्टी-सा पतला।उसके सिर पर नारंगी सुरक्षा-टोपी
उसके एकाग्र चेहरे पर कुछ बेमेल-सी लगती है;
चाँदी-सी चमकती एक पट्टी नदी की तरह बहती जाती है,
और वह उसकी रफ़्तार पर नज़र रखती है।‘अपनी मेज़ पर बैठकर तुम क्या करती हो?’ मैं पूछता हूँ।
‘बेल्ट की रफ़्तार सही बनाए रखती हूँ।’
की-बोर्ड पर उसका हाथ हल्के से टिका है,
उस पर उभरते अंकों को पढ़ने का हुनर उसी के पास है।इस्पात के बनने की राह हम प्रशस्त करते हैं, मैं सोचता हूँ,
उसकी उँगलियों और आँखों को देखते हुए।
मशीन के पास हज़ारों निर्देश हैं,
वह जानती है कि गड़बड़ी कहाँ पैदा हो सकती है।एक प्राचीन नर्तकी कारखाने में प्रवेश करती है,
हवा में घूमती है उसकी बाँह की आस्तीन;
तियांगोंग काइउ से उतरकर
वह यहाँ अपनी कला के वंशजों को पाती है।वीणा, घंटी, क़दमों की थाप—
पुरानी धुन कारखाने के फ़र्श पर बहती है।
चलते इस्पात के सामने वह पल भर ठिठकती है,
फिर उसके प्रवाह के साथ दरवाज़े तक जाती है।‘जनकल्याण के लिए करुणा।’
लू चुआन, सोंग यिंगशिंग की बात करते हैं।
बाहर मज़दूर बसों में सवार हो रहे हैं,
कारखाने की साँझ रोशनी से दमक रही है।रोज़मर्रा की ज़िंदगी की एक किताब खुलती है—
भट्ठी, करघा और अनाज।
काम करने वालों के नाम उसमें गुम हैं,
पर उनका अर्जित ज्ञान आज भी बाक़ी है।शिन्यू में वे लिथियम बैटरियाँ बनाते हैं,
जो दिन को रात तक ले जाती हैं;
सोंग की उस पुरानी किताब का एक और पन्ना
अब बिजली की रोशनी में लिखा जाता है।इब्न ख़ल्दून शिल्प-कर्म पर विचार करते हैं,
अबुल फ़ज़ल किसी पन्ने पर झुके हैं।
मैनचेस्टर से बहुत पहले भी दुनिया के पास हुनरमंद हाथ थे;
किसी एक देश ने अकेले कोई युग नहीं गढ़ा है।कारखाने में धूल नहीं है।
इस्पात चाँदी-सा, नीला-सा बहता है।
नर्तकी अपने ख़ाली हाथ आगे बढ़ाती है,
और मज़दूर जानती है कि उसे क्या करना है।दुनिया को हम उसकी निरंतर जारी कला के साथ विरासत में पाते हैं।
स्नेह सहित,
विजय