खनिज हड़पने की ट्रम्प की नई चाल: चालीसवाँ न्यूज़लेटर (2026)
महत्त्वपूर्ण खनिजों पर क़ब्ज़े की साम्राज्यवादी होड़ बढ़ी है। सैन्य और औद्योगिक ज़रूरतों के बहाने ग्लोबल साउथ के देशों को पश्चिमी पूँजी पर निर्भर बनाया जा रहा है।
जॉन मोएनाकीफ मोहल (दक्षिण अफ्रीका), सूर्यास्त के समय खनिक, कुछ ड्यूटी पर, कुछ ड्यूटी से मुक्त, कार्लटनविल के पास, 1970-75 के आस-पास
प्यारे दोस्तो,
ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।
खनिजों के लिए नए युद्ध का दायरा दक्षिण अफ़्रीका के लिथीयम वाले मैदानों से लेकर ग्रीनलैंड के दुर्लभ पदार्थों तक फैला है। इसकी हिंसक भाषा वही है: आपूर्ति-शृंखला को और लचीला बनाना, राष्ट्रीय सुरक्षा, विविधता, और सहयोग। इस शालीन से लगने वाले शब्दों के पीछे वही पुरानी चाल है। संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) चाहता है कि पश्चिमी गोलार्द्ध की खनिज संपदा उसकी औद्योगिक और सैन्य आवश्यकताओं के आधार पर पुनर्संगठित हो, और चीन भी इससे एक हाथ की दूरी बना ले। इसी इच्छा को पूरा करने के नए प्रयास का नाम है यूएस राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के 1823 के मुनरो सिद्धांत का उपसिद्धांत – इसे मज़ाक़िया तौर पर ‘डॉनरो सिद्धांत’ भी कहा जा रहा है। यह नाम तो मज़ाक़िया है लेकिन इसकी राजनीति नहीं।
आवश्यक खनिज अपने आप में आवश्यक नहीं हैं। कॉपर, लिथीयम, ग्रैफ़ाइट, कोबॉल्ट, निकल, और दुर्लभ पदार्थ एक ऐसी ख़ास व्यवस्था में आवश्यक बन जाते हैं जो इलेक्ट्रिक ग्रिड, बैटरियों, डाटा केंद्रों, सेमीकंडक्टरों, सैटलाइटों, और लड़ाकू विमानों पर ज़्यादा-से-ज़्यादा निर्भर होती जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का अनुमान है कि मौजूदा नीतियों के चलते इन खनिजों की माँग 2040 तक दोगुनी हो जाएगी, लिथीयम की तो तिगुनी। इसमें प्रमुख अड़चन भूविज्ञान नहीं, बल्कि धातुविज्ञान, पेटेंट, वित्त, धातु को अलग करने, रिफ़ाइनिंग, और बाज़ारों पर नियंत्रण है। दुनियाभर के गैलीयम, ग्रैफ़ाइट, मैगनीज़ और अन्य दुर्लभ पदार्थों का 90% चीन रिफ़ाइन करता है। यही वह औद्योगिक तथ्य है जिसे वॉशिंगटन के सुरक्षा दस्तावेज़ ‘ख़तरे’ की भाषा में बदल देते हैं।
कोयला तोड़ना, मार्जरी अर्नफ़ील्ड (इंगलैंड), लगभग 1920
अप्रैल 2025 में वाइट हाउस ने सेक्शन 232 के तहत तैयार आवश्यक खनिजों और उनसे बने उत्पादों के बारे में जाँच का आदेश दिया, ऐसा करके आयात पर निर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक संभावित ख़तरा माना गया। यह जाँच पूरी हुई और निष्कर्ष निकला कि ऐसे आयात से सच में यूएस सुरक्षा को ख़तरा है, तो जनवरी 2026 में यूएस राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्यापारिक साझेदारों के साथ वार्ताओं का निर्देश दिया और मूल्य सीमाओं तथा अन्य व्यापार प्रतिबंधों का प्रस्ताव रखा। जुलाई में ट्रम्प ने बेकार और पुराने उत्पादों से आवश्यक खनिजों को निकालने के लिए डिफ़ेन्स प्रोडक्शन क़ानून का सहारा लिया। कुल मिलाकर यूएस सरकार के ये सब उपाय एक आक्रामक औद्योगिक नीति को दर्शाते हैं जिसे शुल्क और सैन्य धमकियों द्वारा समर्थन दिया जाता है।
यूएस की आवश्यक खनिज नीति का उद्देश्य न सिर्फ़ विदेशी खदानों तक पहुँच बनाना है बल्कि यह राजनीतिक अधिकार लागू करना भी है कि इन्हें कैसे बेचा जा सकता है, किन की प्रौद्योगिकियाँ इन्हें तैयार (प्रॉसेस) कर सकती हैं, और इन शृंखलाओं को कौन से बैंक वित्त पोषित कर सकते हैं। समुद्रतल के खनिजों पर 2025 के ट्रम्प के कार्यकारी आदेश ने अपना उद्देश्य जिस स्पष्टता से रखा वैसा पहले कभी नहीं किया गया: यूएस ‘समुद्रतल की खनिज संपदा पर चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अपने सहयोगियों और उद्योग को’ मज़बूत करेगा। ट्रम्प का उपसिद्धांत इसी तर्क को पूरे गोलार्द्ध पर लागू करता है। यह लैटिन अमेरिका और कैरिबियन को विकास योजनाओं के संप्रभु क्षेत्रों के रूप में नहीं बल्कि यूएस के क़रीब के विदेशी इलाक़ों के तौर पर देखता है। यानी इस क्षेत्र को यूएस कृषि उत्पादों, धातुओं, खनिजों, बंदरगाहों, और समुद्री-मार्गों के एक सुरक्षित भंडार के रूप में देखता है। एडुआर्डो गैलियानो ने अपनी महान क़िताब ओपन वेन्स ऑफ़ लैटिन अमेरिका (1971) में ‘संपदा की मरणशीलता’ के बारे में लिखा, कि कैसे इस क्षेत्र की प्रचुर प्राकृतिक धरोहर यहाँ की जनता के दुखों का कारण बनी। संपदा और शोषण के बीच का यह घिनौना अंतर्विरोध आज भी बना हुआ है।
एस्किमो की मृत्यु, ओवे गिट्स-योहान्सन (डेनमार्क), 1958
ट्रम्प के उपसिद्धांत को सबसे ज़्यादा बेपर्दा करता है ग्रीनलैंड। ग्रीनलैंड को अमूमन एक खाली सफ़ेद इलाक़े की तरह दर्शाया जाता है लेकिन सच्चाई इससे बहुत अलग है। इस लगभग 57,000 लोगों के इनुइट समाज का इतिहास डेनिश औपनिवेशिक शासन और आत्म-निर्णय के अधूरे संघर्ष का इतिहास है। यह उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित है। पिटफ़्फ़िक में यूएस सैन्य अड्डे, आर्कटिक समुद्री मार्ग के खुलने और दुर्लभ पदार्थों सहित प्राकृतिक संसाधन इसे एक आकर्षक क्षेत्र बनाते हैं। ट्रम्प का बार-बार ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा दोहराना इनुइट लोगों की इस मातृभूमि को महज़ रियल एस्टेट और सैन्य रणनीति की तरह देखना है। ट्रम्प का यह दावा है कि उन्होंने डेनमार्क से ग्रीनलैंड ले लिया है, लेकिन सुरक्षा समझौते की बारीकियाँ उनके सोशल मीडिया पोस्ट से कहीं ज़्यादा अस्पष्ट हैं।
ग्रीनलैंड और लैटिन अमेरिका पर डाला जा रहा दबाव एक ही साम्राज्यवादी कल्पना का हिस्सा हैं। यूएस ग्रीनलैंड को अपने उत्तरी कवच के रूप में देखता है और लैटिन अमेरिका को दक्षिण में स्थित अपने गोदाम की तरह। दोनों ही मामलों में कहा जा रहा है कि ऐसा चीनी पूँजी, आधारभूत ढाँचे और प्रौद्योगिकी को प्रभुत्वशाली बनने से रोकने के लिए किया जा रहा है। लेकिन दांव पर चीनी निवेश की स्वतंत्रता नहीं बल्कि इन देशों की वह संप्रभुता लगी हुई है जिसके ज़रिए ये अपनी स्वतंत्र विदेश और आर्थिक नीति तैयार कर सकते हैं। मुद्दा वॉशिंगटन का यह दावा है कि वह अनुमति देगा कि कौन सा संबंध ठीक है। इससे संप्रभुता के वादे पर यह शर्त लग जाती है कि ख़ुद को यूएस के साम्राज्यवादी मंसूबों के मुताबिक़ ढाल लीजिए।
तीन महिलाएँ चलती हुईं, रोज़मेरी नामुली करुगा (केन्या), 2001
लैटिन अमेरिका इस स्थिति को झेल चुका है। गैलियानो की क़िताब में सब तफ़सील से लिखा गया है बोलिविया से चाँदी बाहर जाना, पेरू से गुआनो (एक प्रकार का प्राकृतिक उर्वरक), चिली से नाइट्रेट, चिली और पेरू दोनों से कॉपर, ब्राज़ील से लौह अयस्क, और वेनेज़ुएला से तेल, ये सब पूँजीवादी संचय के केंद्रों को भेजे जाते रहे। हर देश से बाहर जाने वाली वस्तु अलग थी लेकिन इस लूट का ढाँचा एक ही था: हाशिए के देशों से संसाधन निकालना, प्रौद्योगिकी और वित्तीय संरचना कहीं और होना, और खदानों वाले देशों में बर्बादी का समाजीकरण। तथाकथित हरित संक्रमण इस ढाँचे को बदले बिना इस पर एक मुखौटा चढ़ा सकता है।
आँकड़े अवसर और ख़तरे दोनों को उजागर करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेन्सी की रिपोर्ट है कि लिथीयम को छोड़कर, लैटिन अमेरिकी देशों ने 2025 में निकाले गए कुल प्रमुख ऊर्जा खनिजों में से औसतन सिर्फ़ 20% को ही रिफ़ाइन किया। मौजूदा परियोजना पाइपलाइन के तहत, यह क्षेत्र 2035 तक लगभग 185 अरब डॉलर का आर्थिक मूल्य हासिल कर सकता है, लेकिन इसका केवल एक-पाँचवाँ हिस्सा रिफ़ाइनिंग से आएगा। स्थानीय रिफ़ाइनिंग को बढ़ाकर इस मूल्य को लगभग 220 अरब डॉलर तक बढ़ाया सकता है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) एक क्षेत्रीय औद्योगिक नीति की वकालत करता है, जिसमें बुनियादी ढाँचे और शिक्षा में अधिक सार्वजनिक निवेश, स्थानीय रूप से प्राप्त वस्तुओं और श्रम के लिए स्पष्ट नियम (स्थानीय-सामग्री नियम) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, तथा निष्कर्षण की गति और शर्तों पर नियंत्रण शामिल है। सवाल यह है कि क्या ये उपकरण सार्वजनिक योजना के लिए उपयोग किए जाएँगे या केवल विदेशी निगमों को सब्सिडी देंगे।
सेरा पेलाडा स्वर्ण खान, ब्राज़ील, सेबास्टियाओ साल्गादो (ब्राज़ील), 1986
इस बहस का केंद्रबिंदु ब्राज़ील है, जिसके पास ज्ञात दुर्लभ पदार्थों का भंडार का लगभग 23% है, लेकिन वह वैश्विक उत्पादन का मात्र 1% उत्पादन करता है। इसके पास धातुओं और मिश्र धातुओं के उत्पादन माध्यम से पृथक्करण से लेकर स्थायी चुंबकों के निर्माण तक की एकीकृत प्रॉसेसिंग शृंखला का अभाव है। गोइयास में पेला एमा खदान में, सेरा वर्डे समूह एक मिश्रित दुर्लभ पदार्थ कार्बोनेट का उत्पादन करता है। मुश्किल और लाभदायक चरण विदेशों में पूरे होते हैं। ब्राज़ील उत्खनन, कुछ नौकरियाँ और कर, तथा पर्यावरणीय दायित्व अपने पास रखता है, जबकि उच्च-मूल्य उत्पादन, पेटेंट और सामरिक नियंत्रण देश से बाहर चले जाते हैं।
इसीलिए यूएस-समर्थित यूएसए रेयर अर्थ द्वारा सेरा वर्डे के अधिग्रहण का प्रस्ताव अहम है। इस भंडार में डिस्प्रोसियम और टर्बियम हैं, जो इलेक्ट्रिक मोटरों और सैन्य प्रणालियों में उपयोग किए जाने वाले उच्च-प्रदर्शन चुंबकों के लिए अनिवार्य हैं। यूएस वित्तपोषण और खरीद प्रतिबद्धताएँ इस अधिग्रहण को महज़ एक निजी लेनदेन से ज़्यादा बड़ा बना देती हैं: यह चीन को बाहर रखने वाली आपूर्ति शृंखला के निर्माण के राज्य-निर्देशित प्रयास का हिस्सा है। खदान के आसपास, ग्रामीण और क्विलोम्बोला समुदाय प्रदूषित धाराओं, अपनी भूमि के लिए खतरों, और खनन के उन दावों से जूझते हैं जो कृषि-सुधार बस्तियों के लिए ख़तरा हैं। किसी खनिज को ‘हरित’ नहीं कहा जा सकता जब उसकी लागत उन लोगों पर डाली जाती है जो उसके ऊपर रहते हैं।
इस समस्या का हल ब्राज़ील महज़ ग्राहक बदलकर नहीं निकाल सकता। चीन, यूएस या यूरोप के साथ सहयोग करना या न करना इस बात पर निर्भर होना चाहिए कि ऐसा करके कौन-सा ज्ञान और क्षमता ब्राज़ील के भीतर रह जाएँगी, न कि ख़रीदार की राष्ट्रीयता पर। इसके लिए कुछ बुनियादी नियम ज़रूर लागू किए जाने चाहिए:
- भूवैज्ञानिक जानकारी और सामरिक भंडारों पर सार्वजनिक नियंत्रण।
- ब्रज़िलीयन डेवेलपमेंट बैंक (BNDES) के ज़रिए सार्वजनिक वित्त।
- पारिस्थितिक प्रभाव की सार्वजनिक जाँच, जिसमें संचयी जलग्रहण प्रभावों की जाँच के लिए पर्यावरणीय लाइसेंसिंग शामिल है।
- आदिवासी, क्विलोम्बोला, और स्थानीय कृषि समुदायों के पास स्वतंत्र, पूर्व, और सूचित परामर्श के अधिकार होने चाहिए जिन्हें क़ानूनन लागू किया जा सके।
- विदेशियों द्वारा खदानें खानों के विदेशी अधिग्रहण की जाँच।
- अनुबंधों में लिखित तकनीकी हस्तांतरण की शर्तें।
- ब्राज़ीली विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक शोध संस्थानों के नेतृत्व में अनुसंधान।
- अयस्क का अनिवार्य घरेलू पृथक्करण और शोधन।
- बैटरी, रसायन, मशीनरी, चुम्बक, और पुनर्चक्रण में पैमाना बनाने के लिए क्षेत्रीय सहयोग।
बेल्ट फ़िटरस्, टॉम मक्गिनस (ब्रिटेन), 1963
दक्षिण के देशों को इस झूठे चुनाव को अस्वीकार करना होगा जिसमें या तो चीन-केंद्रित शृंखला के लिए काम करना पड़े या यूएस-नियंत्रित शृंखला का हिस्सा बनना पड़े। सामाजिक आंदोलनों को लोकप्रिय संप्रभुता के लिए संघर्ष करना होगा, जिसके लिए ज़रूरी है कि इस तरह के समझौते सार्वजनिक कंपनियों के साथ हों, सार्वजनिक संस्थानों के माध्यम से हों, इनमें पारदर्शिता रहे, सामान्य पर्यावरणीय स्तर स्थापित हो और अनुसंधान व शोध आपस में बाँटा जाए। धातुओं और खनिजों का निष्कर्षण आवश्यक सामाजिक उपयोग के लिए किया जाए, न कि विलासिता और सतत युद्धों के लिए।
खनिजों की प्रतिस्पर्धा से जो सबसे बड़ी कमज़ोरी उजागर हुई है वह किसी एक देश पर निर्भरता नहीं है। बल्कि यह है कि कहीं और से चलाई जा रही आपूर्ति शृंखला जीवन से ज़्यादा ज़रूरी हो जाती है। ट्रम्प का उपसिद्धांत वादा करता है कि यह गोलार्द्ध को सुरक्षित रहेगा और इसकी संपदा यूएस के लिए रहेगी। एक जनपक्षीय सिद्धांत यह सुनिश्चित करेगा कि प्राकृतिक संसाधनों का लाभ उस ज़मीन पर रहने वालों को मिले, निर्यात से पहले सबको बिजली की सुविधा मिले, खदानों में इस्तेमाल से पहले सबको पेयजल मुहैया करवाया जाए, पेटेंट की रॉयल्टी से ज़्यादा सामूहिक ज्ञान को तरजीह दी जाए, और किसी के पीछे चलने से ज़्यादा संप्रभुता को महत्त्व दिया जाए। ज़मीन के नीचे छिपी संपदा का साकार रूप उस पर बने स्कूलों, अस्पतालों, अनुसंधान केंद्रों, प्रयोगशालाओं, पारिस्थितिक तंत्रों को फिर से ठीक करने और गरिमामय जीवन में दिखाई देना चाहिए। किसी के भविष्य को डब्बों में बंद कर दूसरे देशों में नहीं भेजा जा सकता।
खनिक I, लेना ह्यूगो (दक्षिण अफ़्रीका), 2008
1904 में, निकारागुआ के कवि रुबेन दारियो ने ‘ए रूज़वेल्ट (रूज़वेल्ट के नाम)’ कविता लिखी। यूएस राष्ट्रपति थियोडोर रूज़वेल्ट को संबोधित यह कविता यांकी साम्राज्यवाद (imperialismo yanqui) की तीखी निंदा है। नीचे दिए गए छंद विक्टर ह्यूगो की 1872 की रचना ‘ले मेसेज द ग्रांट’ (ग्रांट का संदेश) की ओर संकेत करते हैं, जिसमें ह्यूगो यूएस राष्ट्रपति यूलिसिस एस. ग्रांट को लिखते हैं कि अमेरिकी झंडा, ‘तारों से बोया हुआ’, ‘कीचड़ के एक दाग’ (tache de boue) से ‘धुँधला’ है:
| Los Estados Unidos son potentes y grandes. Cuando ellos se estremecen hay un hondo temblor que pasa por las vértebras enormes de los Andes. Si clamáis, se oye como el rugir del león. Ya Hugo a Grant le dijo: “Las estrellas son vuestras”. (Apenas brilla, alzándose, el argentino sol y la estrella chilena se levanta…) Sois ricos. Juntáis al culto de Hércules el culto de Mammón; y alumbrando el camino de la fácil conquista, la Libertad levanta su antorcha en Nueva York. | यूनाइटेड स्टेट्स शक्तिशाली और महान। जब यह हिलता है तो ऐंडीज़ की रीढ़ में एक सिहरन दौड़ जाती है। यह रोता है जैसे दहाड़ रहा हो कोई शेर। ह्यूगो ने पहले ही कह दिया था ग्रांट से: ‘ये तुम्हारे सितारे’। (अर्जेंटीना की अभी भोर हुई, अभी इसकी रौशनी भी नहीं बिखरी पूरी तरह, और चिली का सितारा उभर रहा है…) तुम धनवान हो। तुम हर्क्युलीज़ और मैमन को एक भाँति पूजते हो; और आसान विजय के पथ रौशन करते हो, आज़ादी न्यूयॉर्क में अपनी मशाल लिए खड़ी है। |
स्नेह सहित,
विजय