वियतनाम के संप्रभुता रक्षा संघर्ष के सबक
वाशिंगटन की युद्ध मशीन पर विजय पाने के इक्यावन वर्ष बाद, वियतनाम एक ज़्यादा परोक्ष हमले — यानी प्रतिबंधों, कर्ज और गुप्त साजिशों—का सामना कर रहा है। ।
गुयेन डो कुंग (वियतनाम), अंकल हो 1960 में जिया लाम मशीनरी कारखाने का दौरा करते हुए।
प्यारे दोस्तो,
30 अप्रैल 1975 को वियतनामी कम्युनिस्टों ने यूएस साम्राज्यवाद के विरुद्ध अपने प्रतिरोध के युद्ध में एक ऐतिहासिक जीत हासिल की। इक्यावन साल बाद भी, वियतनाम की आज़ादी और वियतनाम के एकीकरण का यह दिन हमारे लिए वर्ष के सबसे खास दिनों में से एक है। यह दिन हमें उस ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है, जो कि हमारे लिए आज भी एक महत्त्वपूर्ण सबक है।
1965 से 1972 के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) ने लगभग तीस लाख सैनिकों को वियतनाम के ख़िलाफ़ युद्ध में उतारा था। जब युद्ध समाप्त हुआ, तब तक बीस लाख से ज़्यादा वियतनामी नागरिक और दस लाख से अधिक सैनिक अपनी जान गंवा चुके थे। वियतनामी जनता के प्रति यूएस की बर्बरता और अमानवीयता जगजाहिर है, और हम आज भी इसके दुष्परिणाम भुगत रहे हैं। वियतनाम, लाओस और कंबोडिया में रासायनिक हथियार ‘एजेंट ऑरेंज’ से चालीस लाख से ज्यादा लोग अब भी पीड़ित हैं; यह एक ऐसा अपराध है जिसके लिए यूएस को कभी कटघरे में खड़ा नहीं किया गया।
आर्थिक दबाव
यूएस का वर्चस्ववाद केवल सैन्य अड्डों के विशाल नेटवर्क, सशस्त्र बलों के प्रयोग और आक्रमण पर ही नहीं टिका है। यह मुख्य रूप से सॉफ्ट पावर, आर्थिक दबाव और कूटनीतिक चालबाज़ियों के ज़रिए काम करता है। आज, वियतनाम को सैन्य हमले से कहीं ज्यादा पश्चिमी साम्राज्यवाद की सॉफ्ट पावर से खतरा है। इस साल वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विदेशी कूटनीति भी सैन्य रक्षा नीति जितनी ही महत्त्वपूर्ण है। हम अच्छी तरह जानते हैं कि यूएस, उसके सहयोगियों और उसकी अन्य कठपुतली ताक़तों को किसी संप्रभु राष्ट्र में हस्तक्षेप करने के लिए बंदूक़ें चलाने या मिसाइलें दागने की आवश्यकता नहीं है। टैरिफ, प्रतिबंध और गुप्त प्रति-क्रांतिकारी गतिविधियों के माध्यम से अशांति फैलाना गोलियों व बमों जितना ही असरदार होता है।
हालाँकि युद्ध 1975 में समाप्त हो गया था, लेकिन यूएस साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष आज भी जारी है। युद्ध के तुरंत बाद, यूएस ने वियतनाम पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए, जिससे हम आर्थिक रूप से अकेले पड़ गए, खासकर तब जब सोवियत संघ कमजोर होते होते टूट गया। वियतनाम युद्ध के कारण तबाह हो चुका था। देश का बुनियादी ढांचा और उद्योग बमबारी के कारण नेस्तनाबूद थे। हम ज़्यादातर देशों के साथ व्यापार करने में असमर्थ थे। 1980 के दशक के अंतिम सालों में वियतनाम अकाल के कगार पर था। लाखों लोगों का जीवन ख़तरे में था। और सोवियत संघ अब मदद करने की स्थिति में नहीं था।
इन्हीं वजहों से, 1986 में वियतनाम ने ‘डॉय मोई’ (Đổi Mới –– नवीनीकरण) नीति अपनाई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से आर्थिक मदद हासिल करने के लिए, वियतनाम ने सीमित निजीकरण को मंजूरी दी और बाज़ार अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया। यही समय था जब यूएस ने वियतनाम के खिलाफ आर्थिक हस्तक्षेप और प्रतिबंधों को और तीखा कर दिया। तब से लेकर आज तक पश्चिमी साम्राज्यवाद वियतनामी लोगों के खिलाफ आर्थिक दबाव का इस्तेमाल करता रहा है।
यूएस के साथ संबंध सामान्य करने के लिए वियतनाम को भारी कर्ज चुकाना पड़ा। यह कर्ज 1975 तक दक्षिण वियतनाम पर राज कर रही फासीवादी कठपुतली सरकार ने लिया था। हमें युद्ध के दौरान वियतनाम के ही नागरिकों का कत्ले-आम करने में लगे पैसे और हथियारों की भरपाई के लिए यूएस को 14.5 करोड़ डॉलर से भी ज़्यादा का भुगतान करना पड़ा। वियतनाम के पास साम्राज्य की शर्तों को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। हमें वह कर्ज चुकाने में बीस साल से भी ज़्यादा लगे। आज से सात साल पहले तक हम यूएस को वह अन्यायपूर्ण युद्ध कर्ज चुका रहे थे।
त्रान वान थांग (वियतनाम), एक नए ग्रामीण क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करते लोग, तिथि अज्ञात।
राजनीतिक साज़िशें
आर्थिक हमलों के अलावा, यूएस ने वियतनाम को राजनीतिक रूप से अस्थिर करने के लिए अपनी सॉफ्ट पावर का भी भरपूर इस्तेमाल किया है। यूएस ने वियतनाम के खिलाफ झूठी खबरें फैलाने और देश के भीतर तख़्तापलट की ज़मीन तैयार करने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं। इस मक़सद से यूएस यूएसएआईडी, ह्यूमन राइट्स वॉच, रेडियो फ्री एशिया और वॉयस ऑफ अमेरिका जैसे संस्थानों तथा कई एनजीओ की खुले तौर पर एवं गुप्त रूप से सहायता करता रहा है। वियतनाम इस तरह के हस्तक्षेप का सामना करने वाला इकलौता देश नहीं है। हम सब 2010 के दशक में एशिया और पूर्वी यूरोप में हुई रंग क्रांतियों से वाक़िफ़ हैं, जैसे पश्चिमी एशिया में अरब स्प्रिंग और यूक्रेन में मयडान क्रांति। यूएस की दखलंदाजी ने इन देशों की पूरी राजनीति और अर्थव्यवस्था को उलट-पुलट कर रख दिया, और कई जगहों पर तो समाज पूरी तरह तबाह गए हैं। यूएस की सबसे बड़ी ख़्वाहिश यही है कि वियतनाम की समाजवादी सरकार गिर जाए। साल 2014 से 2019 के बीच, यूएस ने पूरे वियतनाम में विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक साजिशों को हवा दी। तमाम मुश्किलों और अराजकता के माहौल के बावजूद, वियतनामी जनता और हमारी समाजवादी सरकार के बीच एकजुटता बनी रही और रंग क्रांति की सारी साज़िशें नाकाम साबित हुईं।
हा कियोंगवेन (चीन), यूएस साम्राज्यवाद, दक्षिण वियतनाम से बाहर निकलो!, 1963।
रक्षा नीति में चार इनकार
दशकों के आर्थिक युद्ध और पश्चिम की निरंतर साज़िशों/षड्यंत्रों का मुकाबला करने के लिए वियतनाम को जुझारू और रचनात्मक रुख अपनाना पड़ा है। यूएस साम्राज्यवाद केवल आक्रमण और सैन्य बल तक सीमित नहीं है। आर्थिक और राजनीतिक दखल भी टैंक व युद्धपोत जितने ही दमनकारी उपकरण हैं। राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर लगातार हो रहे हमलों के बीच वियतनाम यह जोखिम नहीं उठा सकता कि वह किसी और देश के साथ संघर्ष में उलझ जाए। कई मायनों में तो हम युद्ध की बर्बादी और चौतरफा पाबंदियों के असर से आज भी उबर रहे हैं, इसलिए यह बेहद ज़रूरी है कि हम अपने सीमित संसाधनों का इस्तेमाल अपने नागरिकों की भलाई और देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में करें।
स्थिरता और शांति की इस आवश्यकता से 1990 के दशक में कई कूटनीतिक रणनीतियों का जन्म हुआ। इन्हें सामूहिक रूप से वियतनाम की ‘चार इनकार (Four No’s)’ की नीति के रूप में जाना जाता है। और इन्हें 2019 के रक्षा श्वेत-पत्र में आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया:
- किसी भी देश के साथ सैन्य गठबंधन करने से इनकार: वियतनाम ने युद्ध की बड़ी मार झेली है। हम दुनिया के बाकी देशों से बेहतर समझते हैं कि युद्ध कितनी तबाही लाता है, और हम किसी अन्य युद्ध में घसीटे जाने से बचने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
- किसी एक देश के साथ मिलकर दूसरे देश के खिलाफ खड़ा होने से इनकार: वियतनाम किसी भी देश की कठपुतली नहीं बनना चाहता, और न ही हम किसी देश को डराना-धमकाना चाहते हैं। वियतनाम, जब तक संभव है, दुनिया के प्रत्येक राष्ट्र से मित्रता का व्यवहार रखना चाहता है।
- वियतनामी ज़मीन पर विदेशी सैन्य अड्डा बनाने से इनकार: वियतनाम किसी भी देश को अपनी ज़मीन पर सैन्य अड्डा बनाने की अनुमति नहीं देता है, या किसी देश को दूसरे देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए हमारी ज़मीन का कोई हिस्सा इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं देता है। इतिहास, और अब विशेष रूप से ईरान के खिलाफ यूएस की आक्रामकता में स्पष्ट रूप से दिखता है कि विदेशी सैन्य अड्डे मेज़बान देशों को जवाबी कार्रवाइयों का निशाना बना देते हैं, और उन्हें अन्य देशों के बीच जारी युद्ध में घसीट लेते हैं। ऐसे अड्डे खुफिया साज़िशों के ठिकाने भी बन जाते हैं जिनका इस्तेमाल राष्ट्रों को भीतर से अस्थिर करने के लिए किया जाता है। सच तो यह है कि अमेरिका बरसों से हम पर दबाव बना रहा है कि हम उसे वियतनाम में, खासकर हमारे तटों पर नौसैनिक अड्डे बनाने की इजाजत दे दें। लेकिन हमारा जवाब ‘इनकार’ रहा है और हमेशा रहेगा।
- अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल या धमकियों का प्रयोग करने से इनकार: वियतनाम हिंसा की भाषा नहीं बोलता; हितों के टकराव को सुलझाने के लिए हम बातचीत और संवाद का रास्ता अपनाते हैं। इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि हम अपनी सेना को आधुनिक नहीं बना रहे या वियतनामी सशस्त्र बलों का मुख्य दायित्व देश की रक्षा करना नहीं है—जिसमें जरूरत पड़ने पर बल का प्रयोग करना भी शामिल है।
न्ग्युएन गिया त्रि (वियतनाम), उत्तर का वसंत उत्सव, तिथि अज्ञात।
संघर्ष जारी है
पिछली शताब्दी में, एशियाई देशों के बीच हुए अधिकतर झगड़ों के पीछे पश्चिमी ताकतों का हाथ रहा है। युद्ध और टकराव एशिया के लिए कोई नई बात नहीं है, और कई एशियाई देशों के बीच तो यूएस बनने से पहले से ही तनाव मौजूद थे। लेकिन यह भी सच है कि यूएस ने एक मजबूत, अधिक शांतिपूर्ण क्षेत्र के निर्माण के लिए एशियाई देशों को मिलकर काम करने देने की बजाय इन्हें आपस में उलझाए रखा; पुराने विवादों का फायदा उठाया है और नए विवाद खड़े किए। वियतनाम एशिया के उन कुछ देशों में से एक है, जिसने 1990 के दशक से अपने पड़ोसियों के साथ किसी भी तरह के टकराव में जाने से खुद को ज्यादातर बचाकर रखा है। स्थिति आदर्श नहीं है, लेकिन हमारी ‘चार इनकार’ की नीति काफी हद तक कामयाब रही है। यह फ़ार्मूला कोई भी देश अपना सकता है।
किसी भी युद्ध-विरोधी आंदोलन के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है कि वह युद्ध के आर्थिक आधार, यानी पूँजी, धन और प्राकृतिक संसाधन आदि को समझे। यही मार्क्सवाद-लेनिनवाद का मूल सबक है। एक बार आप आर्थिक आधार को समझ गए, तो झूठ से पर्दा खुद-ब-खुद हट जाता है। यूएस अपनी आक्रामकता पर पर्दा डालने के लिए स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मुखौटे का इस्तेमाल करता है। ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध किसी को बचाने के लिए नहीं किया गया; मक़सद तेल और उस इलाके पर यूएस का वर्चस्व कायम करना है।
हो ची मिन्ह ने हमें सिखाया है कि सिद्धांत का अध्ययन तथा उसे अमल में लाने का अभ्यास साथ-साथ चलने चाहिए। इसलिए पहले पूंजीवाद और साम्राज्यवाद को समझें और फिर इन्हें हराने के लिए अपनी कार्रवाई व योजना तैयार करें। वियतनाम, लाओस, क्यूबा, चीन ने यह कर के दिखाया है। लेकिन संघर्ष जारी है।
आप एशिया के किसी भी कोने में हों, किसी भी देश या संस्कृति से ताल्लुक रखते हों, मैं उम्मीद करती हूँ कि आप वियतनाम की ‘चार इनकार’ नीति का अध्ययन करेंगे और अपने देश में भी ऐसा कार्यक्रम अपनाने की पैरवी करेंगे। एशिया के हर देश को यूएस सेना और उसके खुफिया तंत्र को हमारे क्षेत्र से बाहर खदेड़ने के लिए एक साथ आना होगा। हमें खुद को और ज्यादा बंटने और एक-दूसरे के खिलाफ हथियारबंद होने से रोकना होगा, इससे साम्राज्य का ही फ़ायदा होता है। Hands off Asia, एशिया से दूर रहो!
शुभकामनाओं सहित,
लूना गुयेन
लूना गुयेन (जो लूना ओई के नाम से भी प्रसिद्ध हैं) एक मार्क्सवादी-लेनिनवादी कॉन्टेंट क्रीयेटर व ट्रान्स्लेटर हैं। वे वियतनाम में रहती हैं और वियतनाम के समाजवादी प्रयोग व साम्राज्य-विरोधी संघर्ष पर शिक्षाप्रद कॉन्टेंट बनाती हैं।
नोट: लेखक के विचार निजी हैं और ज़रूरी नहीं कि ‘ट्राईकॉन्टिनेंटल: इंस्टीट्यूट फॉर सोशल रिसर्च’ इनसे पूरी तरह सहमत हो।